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Shamli News: हाईवे के ढाबों से खरीदा तेल, दूर-दूर तक फैलाया जालसाजी का खेल
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शामली। तेल तस्करी के अंतरराज्यीय गिरोह के चार सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि गिरोह का नेटवर्क केवल शामली या आसपास के जिलों तक सीमित नहीं था, बल्कि वेस्ट यूपी, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड तक फैला हुआ था। गिरोह चोरी और मिलावटी डीजल-पेट्रोल की सप्लाई 40 से अधिक ट्रांसपोर्टरों, होटल-ढाबा संचालकों, पेट्रोल पंप मालिकों और मैनेजरों तक करता था। पुलिस ने ऐसे लोगों को चिन्हित कर लिया है, जिनमें से 12 के मोबाइल नंबर बंद मिल रहे हैं।
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों बागपत निवासी राहुल और मुजफ्फरनगर निवासी राजन ने पूछताछ में खुलासा किया है कि गिरोह दिल्ली-सहारनपुर हाईवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और हरियाणा के कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे के आसपास स्थित ढाबों और होटलों से डीजल-पेट्रोल खरीदता था। इतना ही नहीं, सड़क किनारे खड़े ट्रकों और अन्य भारी वाहनों से भी ईंधन चोरी किया जाता था। इसके बाद चोरी किए गए तेल में थिनर मिलाकर उसे बाजार में खपाया जाता था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि ऑनलाइन ऑर्डर मिलने पर शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ समेत हरियाणा के पानीपत, सोनीपत, अंबाला, रोहतक, हिसार, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर तक तेल की सप्लाई की जाती थी। गिरोह की तीन अलग-अलग टीमें रास्ते में निगरानी करती थीं ताकि पुलिस या अन्य एजेंसियों की गतिविधियों की जानकारी समय रहते मिल सके।
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चार साल से चला रहे थे काला कारोबार
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से इस धंधे में सक्रिय थे। राहुल और राजन ही तय करते थे कि किस जिले में कितनी मात्रा में तेल भेजना है। लगभग हर दूसरे दिन अलग-अलग जिलों में डीजल और पेट्रोल की खेप पहुंचाई जाती थी।
कई पेट्रोल पंप जांच के घेरे में
पुलिस को आशंका है कि शामली समेत आसपास के कई जिलों के पेट्रोल पंपों पर भी मिलावटी तेल की आपूर्ति की जा रही थी। एसपी ने बताया कि पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच की जा रही है। गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है और जल्द ही इससे जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि जल्दी पैसा कमाने और अमीर बनने की चाहत में उन्होंने यह रास्ता चुना। गिरोह में अधिकतर युवाओं को जोड़ा गया था, जिन्हें तेल की डिलीवरी और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी जाती थी।
''''जितने रुपये कहो देंगे, बस छोड़ दो''''
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने पुलिस को भी लालच देने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने कार्रवाई से बचने के लिए रुपये देने की पेशकश की, लेकिन पुलिस ने साफ इन्कार कर दिया।
उधर, जिला पूर्ति अधिकारी अंकुर यादव ने बताया कि कैराना के जिस पेट्रोल पंप पर मिलावटी डीजल और पेट्रोल की सप्लाई होने की पुष्टि हुई थी, उसे सीज कर दिया गया है। मामले की जांच जारी है।
बॉक्स
कल पढ़िए स्टिंग की अगली किस्त
हरियाणा और आसपास के जिलों के कनेक्शन से चल रहा था तेल तस्करी का सिंडिकेट, पूछताछ में हुए चौंकाने वाले खुलासे।
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एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों बागपत निवासी राहुल और मुजफ्फरनगर निवासी राजन ने पूछताछ में खुलासा किया है कि गिरोह दिल्ली-सहारनपुर हाईवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और हरियाणा के कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे के आसपास स्थित ढाबों और होटलों से डीजल-पेट्रोल खरीदता था। इतना ही नहीं, सड़क किनारे खड़े ट्रकों और अन्य भारी वाहनों से भी ईंधन चोरी किया जाता था। इसके बाद चोरी किए गए तेल में थिनर मिलाकर उसे बाजार में खपाया जाता था।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि ऑनलाइन ऑर्डर मिलने पर शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ समेत हरियाणा के पानीपत, सोनीपत, अंबाला, रोहतक, हिसार, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर तक तेल की सप्लाई की जाती थी। गिरोह की तीन अलग-अलग टीमें रास्ते में निगरानी करती थीं ताकि पुलिस या अन्य एजेंसियों की गतिविधियों की जानकारी समय रहते मिल सके।
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चार साल से चला रहे थे काला कारोबार
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से इस धंधे में सक्रिय थे। राहुल और राजन ही तय करते थे कि किस जिले में कितनी मात्रा में तेल भेजना है। लगभग हर दूसरे दिन अलग-अलग जिलों में डीजल और पेट्रोल की खेप पहुंचाई जाती थी।
कई पेट्रोल पंप जांच के घेरे में
पुलिस को आशंका है कि शामली समेत आसपास के कई जिलों के पेट्रोल पंपों पर भी मिलावटी तेल की आपूर्ति की जा रही थी। एसपी ने बताया कि पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच की जा रही है। गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है और जल्द ही इससे जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि जल्दी पैसा कमाने और अमीर बनने की चाहत में उन्होंने यह रास्ता चुना। गिरोह में अधिकतर युवाओं को जोड़ा गया था, जिन्हें तेल की डिलीवरी और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी जाती थी।
''''जितने रुपये कहो देंगे, बस छोड़ दो''''
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने पुलिस को भी लालच देने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने कार्रवाई से बचने के लिए रुपये देने की पेशकश की, लेकिन पुलिस ने साफ इन्कार कर दिया।
उधर, जिला पूर्ति अधिकारी अंकुर यादव ने बताया कि कैराना के जिस पेट्रोल पंप पर मिलावटी डीजल और पेट्रोल की सप्लाई होने की पुष्टि हुई थी, उसे सीज कर दिया गया है। मामले की जांच जारी है।
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