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Shamli News: जाम के झाम से जूझे लोग
Thu, 04 Apr 2024 01:31 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Thu, 04 Apr 2024 01:31 AM IST
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शामली। शामली शुगर मिल तकनीकी खराबी के कारण हर पंद्रह दिन में कुछ घंटों के लिए बंद हो जाती है, जिसके कारण शहर 10 से लेकर 12 घंटे तक जाम से जूझ रहा है। मंगलवार की देर रात से लेकर बुधवार सुबह सुबह तक शहर में जाम लगा रहा। दोपहर बाद फिर से शहर में जाम लग गया, जिसके कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम के कारण जहां जहां दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
अपर दोआब शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1931 में की गई थी। जबकि मिल 1933 में चालू हुई थी। मिल से करीब 75 हजार शामली और आसपास क्षेत्र के किसान जुड़े हुए हैं। मिल की पेराई क्षमता करीब 75 हजार क्विंटल है, जिसमें से मिल 50 हजार क्विंटल से अधिक की पेराई करता है। मिल एशिया की सबसे पुरानी मिलों में गिनी जाती थी। मिल अब तकनीकी समस्या से जूझ रही है। पिछले तीन दिन से मिल में तकनीकी खराबी के कारण गन्ना किसान परेशान है। शहर के धीमानपुरा रेलवे फाटक, कोतवाली के पास, शुगर मिल रोड, बुढ़ाना रोड, हनुमान धाम रोड, फव्वारा चौक पर जाम लग रहा है। किसानों का कहना है कि हर 15वें दिन मिल में तकनीकी खराबी आई रहती है, जिसके कारण उन्हें गन्ना मिल में डालने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। किसानों ने मामले की शिकायत फिर से डीएम से कर ने की बा त कहीं है। कहा कि मिल में उपकरण पुराने हो चुके हैं, जिसके कारण तकनीकी खराबी आती है। जल्द समाधान की मांग की है।
यह है जाम लगने का प्रमुख कारण
दरअसल, शामली शुगर मिल में आने वाले गन्ने के वाहन शहर से होकर ही आते हैं। उन्हें शहर से बाहर खड़े करने की कोई व्यवस्था मिल प्रशासन ने नहीं की है, जिसके कारण मिल में तकनीकी खराबी आते ही सड़क पर ही गन्ना लदे वाहनों की लाइन लग जाती है। जिस कारण शहर में जाम लगता है।
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बकाया 214 करोड़ रुपये के गन्ना भुगतान की आस में किसान
किसानों का मिल पर अभी भी पिछले साल का 214 करोड़ रुपया बकाया चल रहा है। कलक्ट्रेट में हुई डीएम, ए डीएम के समक्ष मिल प्रशासन ने बैठक में करीब चार माह पूर्व जल्द किसानों का 214 करोड़ रुपये बकाया देने का आश्वासन दिया गया था। मगर अभी तक बकाया भुगतान किसानों को नहीं किया गया है। किसान नेता बाबा संजय कालखंडे, संजीव कुमार, किसान यामीन का कहना है कि बार-बार मांग के बावजूद बकाया भुगतान किसानों को नहीं दिया जा रहा, जिसके कारण किसानों को परेशानी हो रही है।
किसानों को बकाया गन्ना भुगतान के लिए मिल अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। प्रयास रहेगा कि किसानों को बकाया भुगतान जल्द कराया जाए। जाम से निजात दिलाने का भी प्रयास किया जाएगा।
- संतोष कुमार, एडीएम शामली
हर साल बकाया भुगतान के लिए किसान दे रहे धरना
वर्ष 2017 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 17 दिन तक धरना दिया था। इसके बाद वर्ष 2018 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक के नेतृत्व में किसानों ने कलक्ट्रेट पर 19 दिन तक धरना दिया था। जिसके बाद किसानों को बकाया 120 करोड़ का भुगतान दिया गया था। वर्ष 2018 में ही बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 12 दिन तक धरना दिया था। 2020 में 17 दिन तक किसानों ने बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर धरना दिया। 2022 में तहसील में किसानों ने 6 दिन तक धरना दिया था। इसके बाद 2023 में 95 दिन तक धरना दिया गया। डीएम की मौजूदगी में हुई बैठक में शुगर मिल के मालिक रजत लाल ने मिल को बेचकर किसानों का गन्ना भुगतान करने की बात कहीं थी। मगर अभी तक बकाया भुगतान नहीं किया गया ।
जाम का खामियाजा भुगत रहे व्यापारी
इलेक्ट्रानिक व्यापारी मुकेश कुमार का कहना है कि आए दिन जाम के कारण कारोबार ठप होता जा रहा है। ग्राहक भी नहीं आते हैं। पहले की अपेक्षा काम आधा रह गया है।
फर्नीचर व्यापारी कमलकांत का कहना है कि किराए की दुकान है, जाम से उन्हें ज्यादा परेशानी हो रही है। कई बार तो खर्च भी नहीं निकल पाता है।
मनोज गुप्ता का कहना है कि जाम से निजात दिलाने को प्रशासन को उचित प्रबंध करना चाहिए, वरना कारोबार ठप हो जाएगा।
किताब विक्रेता सचिन का कहना है कि इस समय सीजन चल रहा है, मगर जाम के कारण ग्राहकों की संख्या कम होती है। प्रशासन को जाम से निजात दिलाने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।
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अपर दोआब शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1931 में की गई थी। जबकि मिल 1933 में चालू हुई थी। मिल से करीब 75 हजार शामली और आसपास क्षेत्र के किसान जुड़े हुए हैं। मिल की पेराई क्षमता करीब 75 हजार क्विंटल है, जिसमें से मिल 50 हजार क्विंटल से अधिक की पेराई करता है। मिल एशिया की सबसे पुरानी मिलों में गिनी जाती थी। मिल अब तकनीकी समस्या से जूझ रही है। पिछले तीन दिन से मिल में तकनीकी खराबी के कारण गन्ना किसान परेशान है। शहर के धीमानपुरा रेलवे फाटक, कोतवाली के पास, शुगर मिल रोड, बुढ़ाना रोड, हनुमान धाम रोड, फव्वारा चौक पर जाम लग रहा है। किसानों का कहना है कि हर 15वें दिन मिल में तकनीकी खराबी आई रहती है, जिसके कारण उन्हें गन्ना मिल में डालने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। किसानों ने मामले की शिकायत फिर से डीएम से कर ने की बा त कहीं है। कहा कि मिल में उपकरण पुराने हो चुके हैं, जिसके कारण तकनीकी खराबी आती है। जल्द समाधान की मांग की है।
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यह है जाम लगने का प्रमुख कारण
दरअसल, शामली शुगर मिल में आने वाले गन्ने के वाहन शहर से होकर ही आते हैं। उन्हें शहर से बाहर खड़े करने की कोई व्यवस्था मिल प्रशासन ने नहीं की है, जिसके कारण मिल में तकनीकी खराबी आते ही सड़क पर ही गन्ना लदे वाहनों की लाइन लग जाती है। जिस कारण शहर में जाम लगता है।
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बकाया 214 करोड़ रुपये के गन्ना भुगतान की आस में किसान
किसानों का मिल पर अभी भी पिछले साल का 214 करोड़ रुपया बकाया चल रहा है। कलक्ट्रेट में हुई डीएम, ए डीएम के समक्ष मिल प्रशासन ने बैठक में करीब चार माह पूर्व जल्द किसानों का 214 करोड़ रुपये बकाया देने का आश्वासन दिया गया था। मगर अभी तक बकाया भुगतान किसानों को नहीं किया गया है। किसान नेता बाबा संजय कालखंडे, संजीव कुमार, किसान यामीन का कहना है कि बार-बार मांग के बावजूद बकाया भुगतान किसानों को नहीं दिया जा रहा, जिसके कारण किसानों को परेशानी हो रही है।
किसानों को बकाया गन्ना भुगतान के लिए मिल अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। प्रयास रहेगा कि किसानों को बकाया भुगतान जल्द कराया जाए। जाम से निजात दिलाने का भी प्रयास किया जाएगा।
- संतोष कुमार, एडीएम शामली
हर साल बकाया भुगतान के लिए किसान दे रहे धरना
वर्ष 2017 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 17 दिन तक धरना दिया था। इसके बाद वर्ष 2018 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक के नेतृत्व में किसानों ने कलक्ट्रेट पर 19 दिन तक धरना दिया था। जिसके बाद किसानों को बकाया 120 करोड़ का भुगतान दिया गया था। वर्ष 2018 में ही बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 12 दिन तक धरना दिया था। 2020 में 17 दिन तक किसानों ने बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर धरना दिया। 2022 में तहसील में किसानों ने 6 दिन तक धरना दिया था। इसके बाद 2023 में 95 दिन तक धरना दिया गया। डीएम की मौजूदगी में हुई बैठक में शुगर मिल के मालिक रजत लाल ने मिल को बेचकर किसानों का गन्ना भुगतान करने की बात कहीं थी। मगर अभी तक बकाया भुगतान नहीं किया गया ।
जाम का खामियाजा भुगत रहे व्यापारी
इलेक्ट्रानिक व्यापारी मुकेश कुमार का कहना है कि आए दिन जाम के कारण कारोबार ठप होता जा रहा है। ग्राहक भी नहीं आते हैं। पहले की अपेक्षा काम आधा रह गया है।
फर्नीचर व्यापारी कमलकांत का कहना है कि किराए की दुकान है, जाम से उन्हें ज्यादा परेशानी हो रही है। कई बार तो खर्च भी नहीं निकल पाता है।
मनोज गुप्ता का कहना है कि जाम से निजात दिलाने को प्रशासन को उचित प्रबंध करना चाहिए, वरना कारोबार ठप हो जाएगा।
किताब विक्रेता सचिन का कहना है कि इस समय सीजन चल रहा है, मगर जाम के कारण ग्राहकों की संख्या कम होती है। प्रशासन को जाम से निजात दिलाने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।