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किसानों के नाम दो-दो बार लिया गया था भुगतान
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किसानों के नाम दो-दो बार लिया गया था भुगतान
शामली। वर्ष 2006-07 से 2015-16 के बीच अनपेड गन्ना मूल्य भुगतान के हड़पे गए करीब एक करोड़ रुपये की गन्ना विभाग ने रिकवरी कर ली है। यह राशि किसानों के खातों में दो-दो बार भुगतान कर हड़पी गई थी। बाद में आरोपियों ने उनसे किसानों से राशि वापस ले ली गई थी। फिलहाल इस मामले में आरोपी रहे लोग अलग-अलग समितियों में तैनात हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
शामली के मोहल्ला रेलपार निवासी भाकियू नेता अजय पंवार ने 2015 में शिकायत कर कहा था कि सहकारी गन्ना विकास समिति में किसानों के अनपेड गन्ना भुगतान में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। इसकी शासन स्तर से जांच हुई तो मामले का खुलासा हुआ था। इस मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। अब गन्ना विकास विभाग ने 2006-07 से 2015-16 तक हड़पे गए करीब एक करोड़ रुपये की रिकवरी कर ली है। अनपेड गन्ना मूल्य भुगतान के मामले में की गई जांच में समिति के कई कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई थी, जिसमें यह आरोप था कि कर्मचारियों ने अपने परिचित किसानों के खाते में गन्ना मूल्य भुगतान भेजा था और बाद में उनसे वह रकम ले ली थी। उस समय किसानों को इस खेल का पता नहीं चल सका था। इसमें शामली, तितावी, खतौली, भैसाना चीनी मिल के किसान शामिल बताए गए थे। गन्ना विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि मामले में मूल धनराशि 82 लाख 37 हजार 930 की धनराशि की वसूली हो चुकी है। इसके साथ ही उस पर लगे ब्याज 26 लाख 76 हजार 758 रुपये में से 16 लाख 43 हजार 579 रुपये वसूल किए जा चुके हैं।
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शामली। वर्ष 2006-07 से 2015-16 के बीच अनपेड गन्ना मूल्य भुगतान के हड़पे गए करीब एक करोड़ रुपये की गन्ना विभाग ने रिकवरी कर ली है। यह राशि किसानों के खातों में दो-दो बार भुगतान कर हड़पी गई थी। बाद में आरोपियों ने उनसे किसानों से राशि वापस ले ली गई थी। फिलहाल इस मामले में आरोपी रहे लोग अलग-अलग समितियों में तैनात हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
शामली के मोहल्ला रेलपार निवासी भाकियू नेता अजय पंवार ने 2015 में शिकायत कर कहा था कि सहकारी गन्ना विकास समिति में किसानों के अनपेड गन्ना भुगतान में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। इसकी शासन स्तर से जांच हुई तो मामले का खुलासा हुआ था। इस मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। अब गन्ना विकास विभाग ने 2006-07 से 2015-16 तक हड़पे गए करीब एक करोड़ रुपये की रिकवरी कर ली है। अनपेड गन्ना मूल्य भुगतान के मामले में की गई जांच में समिति के कई कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई थी, जिसमें यह आरोप था कि कर्मचारियों ने अपने परिचित किसानों के खाते में गन्ना मूल्य भुगतान भेजा था और बाद में उनसे वह रकम ले ली थी। उस समय किसानों को इस खेल का पता नहीं चल सका था। इसमें शामली, तितावी, खतौली, भैसाना चीनी मिल के किसान शामिल बताए गए थे। गन्ना विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि मामले में मूल धनराशि 82 लाख 37 हजार 930 की धनराशि की वसूली हो चुकी है। इसके साथ ही उस पर लगे ब्याज 26 लाख 76 हजार 758 रुपये में से 16 लाख 43 हजार 579 रुपये वसूल किए जा चुके हैं।
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