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मरीजों को नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी, अस्पतालों में लगे सात प्लांट

Fri, 08 Apr 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Apr 2022 12:15 AM IST
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Patients will not have lack of oxygen, seven plants are installed in the district
शामली जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट। - फोटो : SHAMLI
शामली। कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपाया था। उस समय मरीजों को सांस लेने में परेशानी की शिकायतें ज्यादा सामने आई थी, लेकिन उस समय ऑक्सीजन की किल्लत का मरीजों को सामना करना पड़ा था, लेकिन अब जिले में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए जिले के सरकारी अस्पतालों में सात ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए और सभी चालू हालत में हैं।
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पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना के मरीजों में फेफड़ों में संक्रमण फैलने के कारण सांस लेने की समस्या रही थी। उस समय जिले के किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट नहीं था। कोविड अस्पताल में भी ऑक्सीजन की कमी सामने आई थी। इस वजह से गंभीर मरीजों को सहारनपुर या मेरठ अस्पताल रेफर करने पड़े थे। ऑक्सीजन की किल्लत को शासन स्तर पर गंभीरता से लिया गया और हर जिले में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई। इसके बाद जिले में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का काम शुरू हुआ। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में चार ऑक्सीजन प्लांट हैं, जिनमें दो प्लांट 45-45 एलपीएम क्षमता के, एक प्लांट एक हजार एलपीएम और एक प्लांट 333 एलपीएम क्षमता का स्थापित है। इनके अलावा झिंझाना, कांधला और थानाभवन सीएचसी पर 250-250 एलपीएम क्षमता के लगाए गए हैं। जिले के सभी सात प्लांट चालू हालत में है। सीएमएस ने बताया कि अब जिले में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा जिला अस्पताल में बनाए गए 200 बैड के कोविड अस्पताल में 40 बैड का पीकू वार्ड और छह बेड का ओमिक्रॉन वार्ड तैयार किया गया था।
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तीसरी लहर में ऑक्सीजन की नहीं पड़ी जरूरत
कोरोना की तीसरी लहर में मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी। कोरोना वायरस ओमिक्रॉन का संक्रमण तेजी से फैला, लेकिन ज्यादा घातक नहीं रहा। फेफड़ों पर इसका असर नहीं होने से मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी। सभी मरीज होम आइसोलेशन में ही रहकर तीन से पांच दिन में ठीक हो गए थे।
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बीएसएल-2 लैब भी चालू हुई
कोरोना संक्रमण की आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल मेरठ व मुजफ्फरनगर भेजे जाते थे। कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों को एक सप्ताह से ज्यादा समय तक सैंपल की जांच रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ा था। कोरोना की तीसरी लहर से पहले ही जसाला में बीएसएल-2 लैब चालू कर दी गई थी। वरिष्ठ लैब पर्यवेक्षक रोहित कुमार ने बताया कि बीएसएल टू लैब में रोजाना करीब एक हजार सैंपलों की आरटीपीसीआर जांच हो रही है। लैब चालू होने से अब जांच रिपोर्ट का कई दिन का इंतजार नहीं करना पड़ता।
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