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पति की शहादत के बाद भी बेटे को सेना में भेजा

Tue, 05 Mar 2019 11:44 PM IST
NAVEEN GUPTA amarujala
amarujala Published by: NAVEEN GUPTA Updated Tue, 05 Mar 2019 11:44 PM IST
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pati ki shahaadat ke baad bete ko sena me bheja
file - फोटो : amarujala
देश की रक्षा के लिए रणबांकुुरों ने अपने प्राण न्योछावर कर जिले का सीना गर्व से हमेशा चौड़ा किया है। गांव हसनपुर में पति की शहादत के बाद उनकी पत्नी ने अपने लाडले छोटे बेटे को सेना में भर्ती कराकर देश की सेवा में भेजकर जो जज्बा दिखाया है, उस पर हर किसी को गर्व है। 
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14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले में शहीद हुए जिले के दो लाल बनत निवासी प्रदीप कुमार और रेलपार निवासी अमित कुमार ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है। इससे पहले भी मातृभूमि की रक्षा के लिए जिले के रणबांकुरों ने हंसते-हंसते प्राण न्योछावर किए है। गांव हसनपुर निवासी शहीद हवलदार सोहनवीर मलिक का नाम भी इनमें से एक है। सोहनवीर सिंह मलिक 16 जुलाई 2002 में सिक्किम में उल्फा उग्रवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। पति की शहादत के बाद उनकी पत्नी सुदेश देवी ने हिम्मत नहीं हारी। उनका बड़ा बेटा नितिश मलिक देहरादून में निजी व्यवसाय कर रहे हैं तो छोटा बेटा अंकित मलिक इंटर करने के बाद सेना में है। शहीद की पत्नी सुदेश देवी ने बताया कि  उनका बेटा अपने पिता की तरह देश की सेवा कर रहा है। शहीद के बड़े बेटे नितिश ने बताया कि छोटे भाई अंकित मलिक मार्च 2013 में 14 जाट रेजीमेंट में बरेली सेंटर से भर्ती हुए। उनकी पहली पोस्टिंग डोकलाम में हुई। इसके बाद राजस्थान में तैनात रहे और अब शाहजहांपुर में तैनात रहकर देश सेवा में लगे हैं। 
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पांच भाइयों में चार सेना में भर्ती हुए
शामली। शहीद सोहनवीर मलिक का परिवार देश सेवा से जुड़ा हुआ है। सोहनवीर मलिक पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनसे छोटे ओमवीर सिंह मलिक और राजकुमार मलिक बीएसएफ में तैनात हैं। इनसे छोटे यशवीर मलिक सेना से कुछ दिन पहले ही रिटायर हुए हैं। सबसे छोटा भाई यश कुमार मलिक गांव में रहकर खेतीबाड़ी संभाल रहे हैं। वर्तमान में शहीद सोहनवीर मलिक के बेटे अंकित मलिक सेना में भर्ती है।
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प्रतिमा और समाधि स्थल शहीद की स्मृति
शामली। शहीद सोहनवीर सिंह मलिक की स्मृति में गांव हसनपुर का मुख्य द्वार का निर्माण कराया गया है। गांव के प्राथमिक हसनपुर नंबर दो भी अमर शहीद सोहनवीर मलिक के नाम पर है। इनके अलावा गांव में हसनपुर-लिसाढ़ मार्ग पर शहीद की प्रतिमा और समाधि स्थल है। 
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