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जिले में सुविधाओं को तरस रहे पैरा खिलाड़ी
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शामली पैरा खिलाडी सारिक मलिक
- फोटो : SHAMLI
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जिले में सुविधाओं को तरस रहे पैरा खिलाड़ी
शामली। टोक्यो पैरा ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर देश का नाम विश्व पटल पर चमकाया है। भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन को लेकर जिले के पैरा खिलाड़ियों में खुशी और उत्साह का माहौल है। हालांकि जिले में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। प्रैक्टिस के लिए न स्टेडियम है और न ही मैदान है। मजबूरी में जान जोखिम में डालकर एथलीटों को सड़कों पर दौड़ लगाकर प्रैक्टिस करनी पड़ रही है।
गांव काबड़ौत निवासी पैरा एथलीट अंकित कश्यप ने बताया कि 2014 में कोल्हू पर काम करते समय उसका एक हाथ गन्ना पेराई करने की मशीन में आ गया था। वह उस समय सेना की भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ की प्रैक्टिस कर रहे थे। एक हाथ गंवाने के बाद सेना में जाने का सपना अधूरा रह गया। साथ ही इंटर के बाद पढ़ाई भी छूट गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2016 में शामली के वीवी डिग्री कॉलेज में हुई मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया, जिसमें वह 27वें स्थान पर रहा था। इसके बाद उसकी उम्मीदों को पंख लगे और वह प्रैक्टिस करने मुजफ्फरनगर स्टेडियम पहुंच गए। छह माह तक वहां प्रैक्टिस की, लेकिन खाने व रहने का खर्चा वहन न करने पर वह वापस आ गया।
वर्ष 2017 में गाजियाबाद में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, 2018 में लखनऊ में राज्यस्तर पर स्वर्ण पदक, वर्ष 2021 में गाजियाबाद में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में फिर स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2017 में जयपुर, 2018 में पंचकुला और 2021 में बंगलूरू में राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता में 800 मीटर व 1500 मीटर दौड़ में प्रतिभाग कर चुका है। एथलीट अंकित का कहना है कि जिले में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा और संसाधन नहीं है। प्रैक्टिस के लिए दूसरे जिलों व राज्यों में जाना पड़ता है। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। जिले में सुविधा मिले तो पैरा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
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गांव चूनसा निवासी पैरा एथलीट समीर मलिक टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन को लेकर उत्साहित है। उसने वर्ष 2019 में लखनऊ में राज्यस्तर पर 400 मीटर में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। वर्ष 2019 में ही पंचकुला में राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में सिल्वर पदक, 2021 में गाजियाबाद में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 1500 व 400 मीटर में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इसी साल बंगलूरू में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उसने प्रतिभाग कर चौथा स्थान पाया। समीर का कहना है कि जिले में खिलाड़ियों को सुविधा व संसाधनों का अभाव है। शासन-प्रशासन खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराएं तो वे खेल में देश का नाम विश्व पटल पर चमकाने में पीछे नहीं रहेंगे।
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शामली। टोक्यो पैरा ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर देश का नाम विश्व पटल पर चमकाया है। भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन को लेकर जिले के पैरा खिलाड़ियों में खुशी और उत्साह का माहौल है। हालांकि जिले में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। प्रैक्टिस के लिए न स्टेडियम है और न ही मैदान है। मजबूरी में जान जोखिम में डालकर एथलीटों को सड़कों पर दौड़ लगाकर प्रैक्टिस करनी पड़ रही है।
गांव काबड़ौत निवासी पैरा एथलीट अंकित कश्यप ने बताया कि 2014 में कोल्हू पर काम करते समय उसका एक हाथ गन्ना पेराई करने की मशीन में आ गया था। वह उस समय सेना की भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ की प्रैक्टिस कर रहे थे। एक हाथ गंवाने के बाद सेना में जाने का सपना अधूरा रह गया। साथ ही इंटर के बाद पढ़ाई भी छूट गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2016 में शामली के वीवी डिग्री कॉलेज में हुई मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया, जिसमें वह 27वें स्थान पर रहा था। इसके बाद उसकी उम्मीदों को पंख लगे और वह प्रैक्टिस करने मुजफ्फरनगर स्टेडियम पहुंच गए। छह माह तक वहां प्रैक्टिस की, लेकिन खाने व रहने का खर्चा वहन न करने पर वह वापस आ गया।
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वर्ष 2017 में गाजियाबाद में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, 2018 में लखनऊ में राज्यस्तर पर स्वर्ण पदक, वर्ष 2021 में गाजियाबाद में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में फिर स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2017 में जयपुर, 2018 में पंचकुला और 2021 में बंगलूरू में राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता में 800 मीटर व 1500 मीटर दौड़ में प्रतिभाग कर चुका है। एथलीट अंकित का कहना है कि जिले में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा और संसाधन नहीं है। प्रैक्टिस के लिए दूसरे जिलों व राज्यों में जाना पड़ता है। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। जिले में सुविधा मिले तो पैरा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
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गांव चूनसा निवासी पैरा एथलीट समीर मलिक टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन को लेकर उत्साहित है। उसने वर्ष 2019 में लखनऊ में राज्यस्तर पर 400 मीटर में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। वर्ष 2019 में ही पंचकुला में राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में सिल्वर पदक, 2021 में गाजियाबाद में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 1500 व 400 मीटर में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इसी साल बंगलूरू में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उसने प्रतिभाग कर चौथा स्थान पाया। समीर का कहना है कि जिले में खिलाड़ियों को सुविधा व संसाधनों का अभाव है। शासन-प्रशासन खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराएं तो वे खेल में देश का नाम विश्व पटल पर चमकाने में पीछे नहीं रहेंगे।

शामली पैरा खिलाडी अंकित- फोटो : SHAMLI