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आजादी की कठिन डगर पर चलकर कई बार जेल गए पलटूराम
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कांधला क्षेत्र के गांव पंजोखरा निवासी स्वतंत्रता सैनानी स्व पलटू राम के परिजन
- फोटो : SHAMLI
कांधला। आजादी की लड़ाई में अनेक लोगों ने अपना घर परिवार छोड़कर अपना योगदान दिया है। क्षेत्र के गांव पंजोखरा निवासी पलटूराम ने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में भर्ती हुए और भूखे प्यासे रहकर कई लड़ाई लड़ी। आजादी की कठिन राह पर चलते हुए कई बार जेल गए, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। उनकी बहादुरी के किस्से आज भी गांव में लोगों की जुबान पर रहते हैैं।
स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने वाले पलटूराम का जन्म गांव पंजोखरा में दो जनवरी 1932 को हुआ था। उनके दत्तक पुत्र देवेंद्र कुमार ने बताया कि स्वतंत्रता सेेनानी पलटूराम के मन में बचपन से ही देेश की सेवा करने का जुनून था। 17 वर्ष की उम्र में वे अपना परिवार छोड़कर आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए थे। देश प्रेम की भावना के चलत वे पहले तो बच्चा पलटन मे भर्ती हुए थे, लेकिन उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें सूबेदार के पद पर रखा गया था। देश सेवा के लिए उन्होंने शादी भी नहीं की। वे कहते थे कि देश सेवा का मार्ग ही सबसे बड़ी सेवा है। इसके अलावा उन्हें कोई मार्ग नहीं दिखाई देता।
नेताजी ने सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्रता आंदोलन में उन्हें कई बड़ी जिम्मेदारी दी। पलटूराम ने उन सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया, जिस कारण वे नेताजी के करीबी लोगों में गिने जाने लगे थे। उनका अधिकतर समय सिंगापुर में बीता। नेताजी के साथ आजादी की लड़ाई के लिए कई बड़े कार्यों में साथ रहे। कई बाद देश की आजादी के लिए जेल भी गए। देवेंद्र कुमार ने बताया कि उनके बुजुर्ग पलटूराम उन्हें आजादी की लड़ाई के लिए हुए संघर्ष के किस्से बताते थे। उन्होंने बताया कि सिंगापुर में एक बार उन्होंने नेताजी के साथ भूखे प्यासे कई दिन तक जंगल में गुजारे थे, लेकिन अपनी हिम्म्त नहीं टूटने दी। वे काफी दिनों तक अपने गांव में भी नहीं आए थे। 21 जुलाई 2019 उनका निधन हो गया। स्वतंत्रता सेनानी पलटूराम की बहादुरी के किस्सों की चर्चा आज भी लोगों के बीच होती रहती है।
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स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने वाले पलटूराम का जन्म गांव पंजोखरा में दो जनवरी 1932 को हुआ था। उनके दत्तक पुत्र देवेंद्र कुमार ने बताया कि स्वतंत्रता सेेनानी पलटूराम के मन में बचपन से ही देेश की सेवा करने का जुनून था। 17 वर्ष की उम्र में वे अपना परिवार छोड़कर आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए थे। देश प्रेम की भावना के चलत वे पहले तो बच्चा पलटन मे भर्ती हुए थे, लेकिन उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें सूबेदार के पद पर रखा गया था। देश सेवा के लिए उन्होंने शादी भी नहीं की। वे कहते थे कि देश सेवा का मार्ग ही सबसे बड़ी सेवा है। इसके अलावा उन्हें कोई मार्ग नहीं दिखाई देता।
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नेताजी ने सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्रता आंदोलन में उन्हें कई बड़ी जिम्मेदारी दी। पलटूराम ने उन सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया, जिस कारण वे नेताजी के करीबी लोगों में गिने जाने लगे थे। उनका अधिकतर समय सिंगापुर में बीता। नेताजी के साथ आजादी की लड़ाई के लिए कई बड़े कार्यों में साथ रहे। कई बाद देश की आजादी के लिए जेल भी गए। देवेंद्र कुमार ने बताया कि उनके बुजुर्ग पलटूराम उन्हें आजादी की लड़ाई के लिए हुए संघर्ष के किस्से बताते थे। उन्होंने बताया कि सिंगापुर में एक बार उन्होंने नेताजी के साथ भूखे प्यासे कई दिन तक जंगल में गुजारे थे, लेकिन अपनी हिम्म्त नहीं टूटने दी। वे काफी दिनों तक अपने गांव में भी नहीं आए थे। 21 जुलाई 2019 उनका निधन हो गया। स्वतंत्रता सेनानी पलटूराम की बहादुरी के किस्सों की चर्चा आज भी लोगों के बीच होती रहती है।

कांधला क्षेत्र के गांव पंजोखरा निवासी स्वतंत्रता सैनानी स्वा पलटू राम का फाइल फोटो- फोटो : SHAMLI
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