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दहशत और पलायन के कारण चौपट हुआ कारोबार, संपत्तियों के दाम धराशायी

Fri, 23 Sep 2016 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
अमर उजाला ब्यूरो, शामली Updated Fri, 23 Sep 2016 12:26 AM IST
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palayan se chaupat hua karobaar
कैराना के पलायन मामले और वेस्ट यूपी में खराब कानून व्यवस्था को लेकर सांसद हुकुम ‌‌सिंह, राजेंद्र अग्रवाल, सत्यपाल सिंह, राघव लखनपाल शर्मा, यशवंत सिंह और कई विधायक आईजी से मिले। - फोटो : अमर उजाला
शामली। सन 2000 में कैराना के प्रमुख सराफा व्यापारी हरि प्रकाश मित्तल के पुत्र आलोक मित्तल की दुकान बंद करके घर जाते समय लूट के बाद हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद उनका परिवार सहारनपुर जाकर बस गया है। अमरनाथ पारवा की चौक बाजार में खाद बीज की तीन दुकानें 2005 से बंद पड़ी हैं। मोहल्ला पट्टों वाला पर परचून की दुकान करने वाले व्यापारी राधे लाल को पांच लाख की रंगदारी की धमकी मिलने के बाद 2010 में   उनका परिवार ऋषिकेश जाकर बस गया। उनका मकान आज भी वीरान पड़ा है। 
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सेठ जगदीश प्रसाद की 1990 में अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। रंगदारी की धमकी मिलने के बाद पलायन करके पानीपत गए। कोल्ड ड्रिंक्स एजेंसी संचालक ईश्वर चंद मित्तल का मकान और दुकान आज भी वीरान पड़े हैं। व्यापार मंडल के अध्यक्ष अरविंद सिंघल की बर्फ फैक्ट्री और मकान बंद पड़ा है। 10 साल पहले कैराना में जिस जमीन की कीमत 10 लाख रुपये थी, आज उसी जमीन की कीमत घटकर सिर्फ ती लाख रुपये तक रह गई है। इस कारण यहां से पलायन करने वालों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तो व्यापार नए सिरे से जमाने की कयावद, दूसरे बडे़ शहरों में जमीन के भाव तेज तथा उनकी कैराना स्थित सैकड़ों वर्ष पुरानी जमीन के भाव कोड़ी हो गए। 
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