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20 वर्षों में सलेकचंद विहार कॉलोनी का ही हुआ विनियमितीकरण

Thu, 09 Dec 2021 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Dec 2021 12:30 AM IST
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Only one colony could be regulated in twenty years
शहर के बाहरी क्षेत्र में विकसित कॉलोनी - फोटो : SHAMLI
बीस साल में सिर्फ एक कॉलोनी का हो पाया विनियमितीकरण
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शामली। नगर पालिका परिषद की सीमा से बाहर 20 वर्षों बाद भी मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण महज एक कॉलोनी सलेकचंद विहार का ही विनियमितीकरण ही करा पाया है। जबकि जिले में विकसित कई कॉलोनियां विनियमितीकरण का इंतजार कर रहीं हैं।
नगर पालिका परिषद की सीमा खत्म होने के बाद एक किमी के दायरे में मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण का क्षेत्र है। विकास प्राधिकरण की सीमा के बाद जिला पंचायत क्षेत्र का दायरा शुरू होता है। 21 नवंबर 1996 को शामली को मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण में शामिल किया गया था। तहसील और जिला मुख्यालय का दर्जा मिलने के बाद विकास प्राधिकरण क्षेत्र से लेकर जिला पंचायत क्षेत्र में पांच से सात किमी के दायरे में सैकड़ों की तादाद में कृषि भूमि में अनाधिकृत कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। नवीन जिला मुख्यालय और शामली बाईपास की जद में अनाधिकृत कॉलोनियों की भरमार हो गई है। इनमें सिर्फ सलेकचंद विहार कॉलोनी का ही विनियमितीकरण हो पाया है। नियमानुसार पचास प्रतिशत से ज्यादा विकसित हो चुकी कॉलोनियों के विनियमितीकरण के प्रस्ताव शासन को भेजे जा सकते हैं। लेकिन प्राधिकरण के अफसर प्रस्ताव शासन को नहीं भेज रहे हैं। प्राधिकरण विकसित कॉलोनियों के विनियमितीकरण और अनाधिकृत कालोनियों को वैध करने में रुचि ले तो विकास प्राधिकरण का खजाना भर जाएगा।
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- अनाधिकृत कालोनियों का वैध करने, विनियमितीकरण का यह है नियम
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता राजीव त्यागी के मुताबिक नगर पालिका परिषद की सीमा से बाहर एक किमी के दायरे में मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में विकसित अवैध कॉलोनियों से पेनल्टी और विकास शुल्क के रूप में 895 वर्गमीटर के रुप में वसूलेगा। मकान का नक्शा पास करके कॉलोनी में जन सुविधा के रुप में पार्क, पानी, सड़क नाली का एस्टीमेट बनाकर पेनल्टी वसूली जाएगी। पचास प्रतिशत से अधिक विकसित अनाधिकृत कॉलोनी के विनियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजेंगे। कॉलोनी का नक्शा पास होने के बाद सुविधा उपलब्ध कराएंगे।
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भूमि अधिग्रहण नियम बदलने से नहीं विकसित कर पा रहे कॉलोनी
अवर अभियंता राजीव त्यागी का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के नियम बदलने से प्राधिकरण नई कॉलोनी विकसित नहीं कर पा रहा है। इसमें कृषि भूमि का चार गुना मूल्य और आबादी क्षेत्र का दोगुना मूल्य देने का प्रावधान है। इतनी महंगी भूमि खरीदकर उसमें कॉलोनी विकसित की जाएंगी तो महंगे मकानों के खरीदार ही नहीं मिल पाएंगे।
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