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Shamli News: अब स्कूली बच्चों को पढ़ाई जाएंगी देश पर गर्व करने वाली कहानियां

Mon, 12 Aug 2024 12:31 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Mon, 12 Aug 2024 12:31 AM IST
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Now school children will be taught stories that make them proud of the country
शामली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर पाठ्यक्रम में कई तरह के बदलाव किए जा रहे हैं। इस बार से बच्चों को देश पर गर्व करने वाली कहानियां पढ़ाई जाएंगी। माना जा रहा है कि इससे बच्चों में देश प्रेम की भावना बढ़ेगी।
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जिन घटनाओं पर भारतीयों को नाज है, उसके बारे में जानकारी एकत्र कर सकेंगे। अब तक बच्चों को इस तरह की कोई तथ्यपरक जानकारियां नहीं दी जाती थीं। फिलहाल इसको लेकर बाजार में नई किताबों की खेप पहुंचने लगी है। यह बदलाव कक्षा तीन और छह के बच्चों के लिए किया गया है। शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर शिक्षा नीति में बदलाव किए हैं। स्कूली शिक्षा के स्तर पर तीसरी और छठी कक्षा के लिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत नई पाठ्य पुस्तकें बाजार में आ गई हैं। किताबों में बच्चों को चंद्रयान अभियान से जुड़ी रोचक कहानियों के अलावा जीवन मूल्यों और पारिवारिक जुड़ाव को बढ़ाने वाले पाठ के साथ भारत को अच्छी तरह से जानने-समझने वाली विषय वस्तु पढ़ने को मिलेगी। दो कक्षाओं की पाठ्य पुस्तकें सामने आई हैं, उसमें तीसरी कक्षा के गणित विषय की पाठ्य पुस्तक सबसे रोचक है। इसे गणित मेला नाम दिया गया है। वह बच्चों के कौतूहल को ठीक वैसे ही बढ़ाने वाली है, जैसे मेले में बच्चे हर खिलौने को देखकर इतराने लगते हैं। बच्चों को दोहरा शतक, नानी मां के साथ छुट्टियां, कुछ लेना कुछ देना, सूरजकुंड मेला जैसी कहानियों से भी रूबरू कराया जाएगा।
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तीसरी कक्षा के बच्चों को चंद्रयान मिशन की कहानी को जिस अंदाज में परोसा गया है, वह बच्चों के मन-मस्तिष्क पर सदैव के लिए छप जाने वाली है।
-आखिर क्यों पड़ा भारत नाम....किताब में होगी व्याख्या
भारत और इंडिया नाम को लेकर अब अक्सर राजनीति होती रहती है। ऐसे में छठवी कक्षा के सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्य पुस्तक में एनसीईआरटी ने इंडिया-दैट इज भारत नाम से एक पाठ रखा गया है। इसमें बताया है कि देश का प्राचीन नाम क्या था। साथ ही देश का इंडिया नाम कैसे विदेशी लोगों ने रखा। इसके साथ ही देश इनमें देश की संस्कृति और इसके इतिहास की भी पूरी जानकारी दी गई है। शिक्षक नितिन कुमार ने बताया पाठ्य पुस्तकों में बदलाव से बच्चों को नई जानकारियां मिलेगी।
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