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सरकार का कुछ नहीं बिगड़ा, हमारा तो घर बर्बाद हो गया

Thu, 27 May 2021 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 12:27 AM IST
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Nothing of the government was spoiled, our house was destroyed
शामली। पिछले महीने हुए पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित होकर कई शिक्षकों ने जान गंवाई है। शिक्षकों के निधन पर परिजन बेहाल हैं। परिजनों का दर्द है कि शासन-प्रशासन की तरफ से अभी तक परिवार की किसी ने सुध नहीं ली है। उन्होंने कहा कि सरकार का तो कुछ नहीं बिगड़ा, पर उनका घर बर्बाद हो गया। उनकी मांग है कि सरकार को पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नौकरी और उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए, जिससे परिवार गुजर बसर कर सके। पीड़ित परिवारों से बात कर उनका हाल जाना।
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चार माह से वेतन भी नहीं मिला
शिक्षक बबलू कुमार मूल रूप से जिला मुजफ्फरनगर के गांव सरनावली के निवासी थे। वह कुछ माह पहले ही स्थानांतरित होकर शामली जिले में आए थे। उन्हें अभी विद्यालय आवंटित नहीं हुआ था। उनके पुत्र कृष और रिश्तेदार मोना ने बताया कि उनकी ड्यूटी 19 अप्रैल केे मुजफ्फरनगर जिले में चुनाव में लगी थी। वहीं से वह संक्रमित हुए। कोरोना के लक्षण होने पर मेरठ मेडिकल में भर्ती कराया गया था। 26 अप्रैल को उनका निधन हो गया। उनकी पत्नी सोनू भी कोरोना संक्रमित हुई थी। मोना का कहना है कि मेरठ अस्पताल में सही तरीके से न देखभाल हुई और न ही सही उपचार मिला। उनके 14 साल की पुत्री नंदिनी, दो पुत्र 12 वर्षीय कृष व सात साल का कुणाल है। उनका कहना है कि शासन-प्रशासन की तरफ से किसी ने कोई सुध नहीं ली। विभाग की तरफ से करीब चार माह से उन्हें वेतन भी नहीं मिला है। सरकार को पीड़ित परिवार के बारे में सोचना चाहिए।
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- परिवार में कमाने वाला कोई नहीं रहा
शिक्षक नीरज कुमार मूल रूप से गांव भाज्जू के निवासी थे। उनके पुत्र विशरुत, रिश्तेदार हर्ष तोमर ने बताया कि वे 19 अप्रैल को मुजफ्फरनगर जिले में चुनाव ड्यूटी में गए थे। वहीं पर वह संक्रमित हुए। पांच मई को उनका निधन हो गया। परिवार में मां सुदेश देवी, पत्नी ममता चौधरी, 16 साल का पुत्र विशरूत और सात साल की बेटी निवेदिका है। मां सुदेश भी संक्रमित हो गई थी। परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं है। परिवार की गुजर बसर के लिए सरकार को चाहिए कि एक सदस्य को नौकरी और आर्थिक सहायता दे।
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परिवार के गुजारे के लिए आय का कोई स्रोत नहीं
शिक्षक सुनील कुमार मूल रूप से जिला मेरठ के गांव आलमगीरपुर के निवासी थे। उनकी पत्नी अंजना ने बताया कि चुनाव प्रशिक्षण के बाद उनकी तबियत बिगड़ गई थी। उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। कोविड एल-2 अस्पताल शामली में इलाज चला, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए डाक्टरों से लेकर अधिकारियों तक गुुहार की, लेकिन इंजेक्शन नहीं मिला। दो मई को उनका निधन हो गया। परिवार में सास राजो बीमार रहती है। उनके छह व सात साल के दो पुत्र है। उनकी नौकरी से ही परिवार चलता था। अंजना ने बताया कि वह एमए बीएड है। सरकार को शिक्षक की नौकरी व मुआवजे नाम पर आर्थिक सहायता करनी चाहिए, ताकि वह अपने बच्चों के साथ गुजर बसर कर सके।
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परिवार के सदस्य को नौकरी मिले
शिक्षक उधम सिंह मलिक गांव लांक के निवासी थे। उनके रिश्तेदार रविंद्र ने बताया कि 26 अप्रैल को चुनाव ड्यूटी से आने के बाद उसी दिन तबियत खराब हो गई थी। तीन दिन बाद कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट आ गई थी। अस्पताल में उपचार के दौरान 10 मई को निधन हो गया। परिवार में पत्नी कामना, 16 साल का बेटा रमन व 14 साल की बेटी कनिका है। शासन-प्रशासन की तरफ से अभी किसी ने कोई सुध नहीं ली। सरकार को पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद करनी चाहिए।
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परिवार के पालन पोषण की बनी समस्या
शिक्षक ओमवीर सिंह मूल रूप से चंदेनामाल गांव के निवासी थे। उनके 16 वर्षीय बेटे अंशु ने बताया कि चुनाव ड्यूटी के बाद उनके पिता कोरोना संक्रमित हुए थे। छह मई को उनका निधन हो गया। परिवार में उनकी पत्नी सविता, बेटा अंशु, 15 साल की बेटी रिधिमा है। बताया कि अभी तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली। सरकार को पीड़ित परिवार की मदद कर सरकारी नौकरी और मुआवजा देना चाहिए।
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हमारा तो सब कुछ बर्बाद हो गया
शिक्षक अनिल कुमार मूल रूप से जिला बागपत के गांव बछौड़ के निवासी थे। उनकी पत्नी दीपा ने बताया कि 18 अप्रैल को चुनाव ड्यूूटी में मुजफ्फरनगर गए थे। वहां से आने के बाद कोरोना के लक्षण होने पर उन्हें पहले बड़ौत में फिर बागपत अस्पताल ले गए। चार मई को उनका निधन हो गया। परिवार में चार साल की बेटी अंशिका, चार माह का बेटा दक्ष है। उनके जाने के बाद सब कुछ बर्बाद हो गया। आजीविका का कोई साधन नहीं है। वह एमए बीएड है, सरकार नौकरी दे दे तो परिवार पल जाएगा। हालांकि अभी तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली है।

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कोट
पंचायत चुनाव संबंधी ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर जिले के आठ शिक्षक और एक शिक्षामित्र ने जान गंवाई है। इसकी जानकारी संघ के प्रदेश नेतृत्व को भेजी गई है। - ब्रिजेश शर्मा, जिला संयोजन, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
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