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Engineers Day 2020: संसाधन न सुविधाएं, शामली में दोनों निजी इंजीनियरिंग कालेज हुए बंद

Tue, 15 Sep 2020 10:57 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Tue, 15 Sep 2020 10:57 AM IST
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Happy Engineers Day 2020: No Resource Facilities, Both Private Engineering Colleges Closed In Shamli
प्रतीकात्मक तस्वीर
शामली। आईआईटी के लिए युवाओं में रुझान है, लेकिन जिले में इंजीनियरिंग कालेज न होने के कारण यहां पर संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। न यहां पर कालेज है और न ही कोचिंग सेंटर। आईआईटी बनने का सपना संजोने वाले छात्रों को इंटर करने के बाद हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान आदि राज्यों या बड़े शहरों की तरफ रख करना पड़ता है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए छात्रों के लिए यहां पर न सुविधाएं है और नहीं संसाधन उपलब्ध है।
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पूर्व में खुले दोनों निजी इंजीनियरिंग कालेज हुए बंद

शामली में पूर्व में खुले निजी दो इंजीनियरिंग कालेज बंद हो चुके हैं। 2008 में सिल्वर बेल्स ग्रुप द्वारा झिंझाना में शामली इंस्टीट्यूट के नाम से इंजीनियरिंग कालेज शुरू किया था। इस संस्थान में इलेक्ट्रानिक्स, कंप्यूटर साइंस, आईटी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के कोर्स उपलब्ध थे। 2015 में यह कालेज बंद हो गया।
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कालेज के डायरेक्टर अतुल बंसल का कहना है कि शुरूआत में कालेज में छात्रों के एडमिशन हुए, लेकिन बाद में छात्रों की संख्या कम होती चली गई, जिस कारण कालेज बंद हो गया। 2008 में ही कैराना रोड पर रुड़की इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट टेक्नालाजी इंस्टीट्यूट (रेमटेक) खुला था, लेकिन यह कालेज भी 2019 में बंद हो गया। इस कालेज में कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल, सिविल, मैकेनिकल, पॉलीटेक्निक आदि कोर्स थे। कालेज में जनसंपर्क अधिकारी के पद पर रहे रविकांत शर्मा ने बताया कि छात्रों के एडमिशन कम होने की वजह से कालेज बंद हुआ है।
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आईआईटी में कम नहीं हुआ रुझान

शहर के बड़ा बाजार निवासी अंकित तायल 2010 में आईआईटी पासआउट करने के बाद वर्तमान में मुंबई में जीएसटी विभाग में सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत है। अंकित का कहना है कि छात्रों में आईआईटी के प्रति पहले से ज्यादा रुझान बढ़ा है। इस बार भी देश में करीब नौ लाख से ज्यादा छात्रों ने प्रवेश परीक्षा दी है। शामली में इंजीनियरिंग करने वाले छात्रों के लिए संसाधन और सुविधाओं का अभाव है, जिस कारण उन्हें बाहर दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है।

बाहर के कालेजों की तरफ बढ़ा रुझान

शामली निवासी पवन गोयल मुजफ्फरनगर के कालेज में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष है। उनका कहना है कि शामली में जो कालेज पूर्व में खुले थे, उनमें एक तो कोर्स कम थे। दूसरा संसाधन व सुविधाओं की कमी रही, जिस कारण शामली जिले के छात्रों का रुझान बाहर के कालेजों की तरफ बढ़ा है। आज भी छात्र दूसरे जिलों और राज्यों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए जा रहे हैं।

इंजीनियरिंग के लिए क्वालिटी जरूरी

सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर रामौतार तायल का कहना है कि सरकार ने इंजीनियरिंग को बढ़ावा देने के लिए निजी कालेज खोलने को मंजूरी तो दी, लेकिन उनमें संसाधन और सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा गया, जो एक इंजीनियर के लिए जरूरी होता है। कालेजों में संसाधन और सुविधाएं जुटानी होगी। इंजीनियर बनने के लिए क्वालिटी होना जरूरी है।
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