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नवरात्र आज से, डोली पर सवार होकर आएंगी मैया
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शामली नवरात्रों पर सांझी की खरीदारी करती महिला।
- फोटो : SHAMLI
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शामली। शारदीय नवरात्र बृहस्पतिवार को शुरू हो रहे हैं। इस बार मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आएंगी। नवरात्र में पहले दिन घट स्थापना सुबह 6:17 बजे से 10:11 बजे तक विधि विधान से होगी। पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरुप शैलपुत्री की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।
चैत्र माह में बड़े नवरात्र और आषाढ़ और आश्विन माह में शारदीय नवरात्र, जिसे छोटी नवरात्र भी कहते हैं। पहले नवरात्र साधना और दूसरे में साधना और उत्सव दोनों के होते हैं। यह दोनों ही नवरात्र आम लोगों के लिए है, जबकि आषाढ़ और माघ मास की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहते हैं। यह दोनों ही तंत्र साधना की नवरात्र होते है। शारदीय नवरात्र आश्विन माह की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के बाद श्री दुर्गा नवरात्र का पारायण होता है। दुर्गा नवरात्र बृहस्पतिवार शुरू होकर 14 अक्तूबर तक विधि विधान से परायण होगा।
पंडित प्रभु शंकर शास्त्री, पंडित कुशलानंद जोशी के मुताबिक दुर्गा नवरात्र की शुरुआत यदि सोमवार या रविवार को हो तो इसका अर्थ है कि माता हाथी पर सवार होकर आएंगी। शनिवार और मंगलवार को माता अश्व यानी घोड़े पर सवार होकर आती है। बृहस्पतिवार या शुक्रवार को नवरात्रि का पर्व प्रारंभ हो तो माता डोली पर सवार होकर आती है।
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व्रत पारण समय : नवरात्र का पारण 15 अक्तूबर को समय 6:22 मिनट के बाद होगा।
घट स्थापना मुहूर्त
घट स्थापना का समय या मुहूर्त प्रात:काल 6:17 बजे से 10:11 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 11:46 बजे से 12:32 बजे तक रहेगा।
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चैत्र माह में बड़े नवरात्र और आषाढ़ और आश्विन माह में शारदीय नवरात्र, जिसे छोटी नवरात्र भी कहते हैं। पहले नवरात्र साधना और दूसरे में साधना और उत्सव दोनों के होते हैं। यह दोनों ही नवरात्र आम लोगों के लिए है, जबकि आषाढ़ और माघ मास की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहते हैं। यह दोनों ही तंत्र साधना की नवरात्र होते है। शारदीय नवरात्र आश्विन माह की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के बाद श्री दुर्गा नवरात्र का पारायण होता है। दुर्गा नवरात्र बृहस्पतिवार शुरू होकर 14 अक्तूबर तक विधि विधान से परायण होगा।
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पंडित प्रभु शंकर शास्त्री, पंडित कुशलानंद जोशी के मुताबिक दुर्गा नवरात्र की शुरुआत यदि सोमवार या रविवार को हो तो इसका अर्थ है कि माता हाथी पर सवार होकर आएंगी। शनिवार और मंगलवार को माता अश्व यानी घोड़े पर सवार होकर आती है। बृहस्पतिवार या शुक्रवार को नवरात्रि का पर्व प्रारंभ हो तो माता डोली पर सवार होकर आती है।
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व्रत पारण समय : नवरात्र का पारण 15 अक्तूबर को समय 6:22 मिनट के बाद होगा।
घट स्थापना मुहूर्त
घट स्थापना का समय या मुहूर्त प्रात:काल 6:17 बजे से 10:11 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 11:46 बजे से 12:32 बजे तक रहेगा।