कैराना। कथा व्यास स्वरुपानंद महाराज ने भागवत कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि नारायण-नारायण पुकारने पर जीव को यमदूत छोड़कर भाग जाते हैं। भागवत कथा मनुष्य के लिए ज्ञान के अमृत के समान है।
बृहस्पतिवार को डीके कांवेंट स्कूल में आयोजित भागवत कथा में कथा व्यास स्वरुपानंद महाराज ने कहा कि भागवत गीता का एक श्लोक के मुताबिक गंगाजल की बूंद का दान, अमृत के समान है। श्रीकृष्ण का जप जो भी करता है, उसकी यमराज के यहां जाने की चिंता नहीं, बल्कि उसके लिए नारायण के द्वार खुल जाते हैं। हिरण्य कश्यप तथा प्रहलाद की कथा में स्वामी ने कहा कि प्रहलाद नारायण का भक्त था। हिरण्य कश्यप चाहते थे कि सारी दुनिया में मेरा नाम गाया जाए, परंतु प्रहलाद नारायण का अनंत भक्त था। प्रहलाद को उसकी बुआ होलिका अग्नि में लेकर बैठ गई, लेकिन ऐसी हवा चली कि होलिका जलकर राख हो गई, प्रहलाद का कुछ नहीं बिगड़ा। अंत में महल के खंबे को लाल करके प्रहलाद को खड़ा करके कहा कि इस खंबे को पकड़ो, जैसे ही प्रहलाद ने खंभा पकड़ा तो नारायण ने नरसिंह का रूप धर कर हिरण्य कश्यप को गोद में लेकर अपने तेज नाखूनों से फाड़ दिया। कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य यदि जीवन में अपना कल्याण चाहते है, तो बुरा देखना बुरा सुनना तथा बुरा बोलना छोड़कर नारायण का स्मरण करना चाहिए। मुख्य यजमान रामकुमार, आलोक चौहान, सलेकचंद, श्याम सिंह, दीपिका गोयल, सावित्री देवी, गीता रानी आदि मौजूद रहे।