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सबकी मनोकामना पूर्ण करती हैं मां शाकंभरी देवी

Sun, 10 Oct 2021 11:31 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 11:31 PM IST
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Mother Shakambhari Devi fulfills everyone's wishes
कांधला के मोहल्ला रायजाद गान में प्राचीन सिद्वपीठ शाकुंभरी देवी मन्दिर - फोटो : SHAMLI
कांधला। कस्बे के मोहल्ला रायजादगान स्थित प्राचीन सिद्घपीठ शाकंभरी देवी भवन मंदिर का महाभारत कालीन इतिहास है। यह मंदिर दूरदराज के क्षेत्रों में भी विख्यात है। मंदिर की मान्यता है कि नवरात्र में यहां भक्तों की मांगी सभी मन्नत पूरी होती हैं। जिसके चलते यहां नवरात्र में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं।
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महाभारत युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र की ओर अपनी सेना को लेकर रवाना होते महाराज कर्ण कांधला कैराना की धरती पर रुके थे। इस दौरान उन्होंने कांधला में सिद्घपीठ शाकंभरी देवी भवन मंदिर की नींव रखी थी। इस जगह अब मोहल्ला रायजादगान बस गया है। कांधला का नाम कर्ण के नाम पर ही जाना जाता है। कांधला में कर्ण द्वार था और कैराना में कर्ण का किला था। जिसकी वजह से कस्बे का नाम कांधला हुआ। यह आज उन्हीं के नाम पर जाना जाता है। प्राचीन सिद्धपीठ शाकंभरी देवी मंदिर की मान्यता है कि नवरात्र में यहां पर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने पर मां दुर्गा भक्तों की सभी मन्नत पूरी करती हैं।
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मंदिर के पुजारी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि कांधला में मां शाकंभरी की स्थापना उस समय की है, जब मां ने पृथ्वी पर स्वयं प्रकट होकर दर्शन दिए थे। यहां प्रतिवर्ष शारदीय और चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर विशाल पूजा-पाठ का होता है। दोपहर में महिलाओं द्वारा कीर्तन का आयोजन किया जाता है। दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग आते हैं। इसलिए मंदिर में भीड़भाड़ देखने को मिलती है।
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कोरोना महामारी के दौरान भी भक्तों ने मां के दर्शन नहीं छोड़े। दुर्गा अष्टमी के दिन परंपरागत शोभायात्रा निकाली जाती है, जो मां की छोटी बहन के मंदिर में जाती है। इसी प्रकार छोटी बहन के मंदिर से भी रात्रि में बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा के रूप में शाकंभरी देवी भवन में आती हैं। जहां पर दोनों बहनों का मिलाप होता है। इसी मंदिर से कांधला की रामलीला का ध्वजारोहण शोभायात्रा निकलती है।

शामली प्राचीन सिद्वपीठ शाकुंभरी देवी  का भवन

शामली प्राचीन सिद्वपीठ शाकुंभरी देवी का भवन- फोटो : SHAMLI

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