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तीन दिन फंदे पर लटकाया गया था मोहर सिंह का शव

Thu, 13 Aug 2020 10:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2020 10:51 PM IST
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Mohar Singh's body was hanged for three days
शामली एसटी तिराहे पर एकता पार्क में स्थपित चौधरी मोहर सिंह की प्रतिमा। - फोटो : SHAMLI
तीन दिन फंदे पर लटका कर रखा गया था मोहर सिंह का शव
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शामली। भारत को आजादी दिलाने में अनेक वीरों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। शामली में भी अनेक वीरों ने अंग्रेजों से लोहा लिया और स्वतंत्रता की राह में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया।

शामली के चौधरी मोहर सिंह भी ऐसे ही सेनानी थे। उन्होंने अन्य क्रांतिकारियों के साथ वर्ष 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला और उनकी तोपों के आगे तन गए। कहा जाता है कि शहीद होने के बावजूद क्रांतिकारियों में दहशत फैलाने के लिए उनके शव को तीन दिन तक फांसी पर लटकाकर रखा गया था। एसटी तिराहे पर स्थित एकता पार्क में चौधरी मोहर सिंह की प्रतिमा लगी है। इस प्रतिमा पर लगे शिलापट्ट पर चौधरी मोहर सिंह की शहादत की दास्तां लिखी है। मोहर सिंह शामली के जमींदार चौधरी घासीराम के यहां जन्में थे। उनका नाम आजादी के आंदोलन में अग्रणी सेनानियों में रहा। उन्होंने आंदोलन की योजना मथुरा में गुरु विरजानंद के आश्रम में बनाई थी। चौधरी मोहर सिंह के साथ थानाभवन के काजी नियामत अली खां व महबूब अली खां ने मिलकर तहसील और रेजिडेंसी में आग लगा दी थी। उनकी अगुवाई में नौजवान अलग-अलग टुकड़ियों में अंग्रेजों से मुकाबला कर रहे थे। करीब दो महीने तक तहसील पर क्रांतिकारियों का कब्जा रहा था। फतेहपुर के जंगल में अंग्रेजों के साथ क्रांतिकारियों का संघर्ष हुआ था। शिलापट्ट पर दर्ज जानकारी के अनुसार यहां पर 225 पुरुष और 27 महिलाएं शहीद हुए थे। अंग्रेजों ने तोपें लगाकर शामली को चारों ओर से घेर लिया था। यहां पर थानाभवन के अब्दुल रहीम खां, सैदपुर के चौधरी भगवान सिंह, थानाभवन के चौधरी हरज्ञान सिंह, भैंसवाल के भवानी सिंह, आशा देवी, हरड़ के गेंदा सिंह, इंद्राकौर देवी, पुरबालियान के चौधरी हरपाल सिंह, शोभा देवी, परासौली के खैराती खां, शामली से मामकौर, सोरम से चौधरी लक्ष्मण सिंह, राजकौर, ढिकौली से शोभा सिंह के साथ चौधरी मोहर सिंह भी शहीद हो गए थे। इस शिलापट्ट पर दर्ज है कि क्रांतिकारियों में दहशत फैलाने के लिए झिंझाना-करनाल रोड पर मोहर सिंह के शव को तीन दिन तक फांसी पर लटकाकर रखा गया था।
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