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नाबालिग नहीं चलाएंगे वाहन, इसका रखेंगे ख्याल
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शामली नगर पालिका सभागार में अमर उजाला द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में बोलते यातायात प्रभारी
- फोटो : SHAMLI
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शामली। नवंबर माह में यातायात विभाग ने यातायात जागरूकता अभियान चलाया, लेकिन सड़कों पर इसका असर नजर नहीं आ रहा। शहर में बच्चे बाइक स्कूटी लिए दौड़ रहे हैं। एक वाहन पर तीन तीन-चार चार बच्चे नजर आते हैं। इस गंभीर सामाजिक समस्या पर अब अमर उजाला फाउंडेशन ने मुहिम शुरू की है। रविवार को शहर के नगर पालिका सभागार में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें शहर के स्कूल कालेजों के प्रधानाचार्य, अभिभावक, व्यापारी, उद्यमी, किसान और समाजसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी, महिलाएं शामिल हुईं। सभी ने इस गंभीर समस्या पर अपने सुझाव दिए और शहर में नाबालिग स्कूली बच्चों की ड्राइविंग पूरी तरह रोकने का संकल्प लिया। संचालन व्यापारी नेता पवन संगल और मास्टर रामकुमार वर्मा ने किया।
सख्ती करे यातायात विभाग
स्कूल में भी बच्चों का वाहन लेकर आना बंद है, लेकिन स्कूल से कुछ ही दूर पर कई बच्चे अपने वाहन खड़े करके आते हैं। यातायात विभाग को ये देखना चाहिए और सख्ती करनी चाहिए। अभिभावक आजकल के बच्चों के दबाव में आकर उनकी इच्छा पूरी करते हैं उन्हें ध्यान देना चाहिए ।अमर उजाला की मुहिम में हमारा स्कूल पूरा सहयोग करेगा। - एके गोयल, प्रिंसिपल सिल्वर बेल्स स्कूल
दिखावा बंद कर बच्चों को समझाएं
बच्चों के हाथ में बाइक स्कूटी और मोबाइल देना बहुत से लोगों ने स्टेटस सिंबल बना लिया है। अपने बच्चे को बाइक चलाता देख कुछ लोग खुश होते हैं। ये ठीक है कि आजकल संसाधन बढे हैं लेकिन ये दिखावा ठीक नहीं है, ये बहुत गलत है। माता पिता को इस तरफ गंभीरता से देना होगा बच्चों की ड्राइविंग रोकनी होगी। - यशपाल पंवार, अध्यक्ष सहोदय
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मुझे अपने बच्चों से प्यार है
उनके बच्चों ने भी 14 साल की उम्र से ही कई बार बाइक लेने की जिद की, तमाम कोशिश की ,लेकिन उन्होंने नहीं दिलाई क्योंकि उन्हें अपने बच्चों से प्यार था। उन्होंने अपने सामने ही कई बच्चों के साथ हादसे होते देखे हैं। स्कूली बच्चों की ड्राइविंग रुके शुरूआत उनके ही स्कूल से क्यों ना हो। - अरविंद संगल, पूर्व पालिकाध्यक्ष शामली
बच्चों को काउंसिलिंग की जरूरत
बच्चों के शहर के अलग अलग स्थानों पर कई कई ट्यूशन होते हैं, इसी मजबूरी में ये सब हो रहा है। इसके लिए बच्चों ओर अभिभावकों की काउंसिलिंग की जरूरत है कि वे कोई ऐसी व्यवस्था करें जिससे बच्चों की ड्राइविंग रुके या उन्हें बिना गेयर वाली इलैक्ट्रिक वाहन दें जो 16 साल के बाद मान्य है। - संजीव कुमार, शिक्षक स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल
ये कानूनी नहीं सामाजिक समस्या
बच्चों की ड्राइविंग कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक समस्या है। बच्चों की पहली पाठशाला उसका परिवार होता है। परिवार के बड़े उसे अच्छा बुरा समझाएं। हम स्कूलों को कोसते हैं लेकिन परिवार इसके लिए सबसे बडेे़ जिम्मेदार हैं। हम लोग राजनेताओं के वोट मांगने के तो बड़े बड़े होर्डिंग लगवाते हैं, कभी यातायात नियमों का पालन करने के भी होर्डिंग लगवाने चाहिए। - प्रताप चौधरी, प्रवक्ता जनता वैदिक कालेज बड़ौत
सप्ताह में एक घंटा यातायात नियमों पर हो
यदि हर व्यक्ति अपने परिवार के बच्चों को ही सुधार ले तो ये समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। सप्ताह में एक दिन गांव शहर के सभी स्कूलों में एक घंटा यातायात नियमों के बारे में जानकारी देने का होना चाहिए। उसमें बच्चों की अच्छी काउंसिलिंग होनी चाहिए। उनका व्यापार संगठन इस मुहिम में पूरी तरह अमर उजाला के साथ है। - धनश्याम दास गर्ग, अध्यक्ष पं.उप्र. सं उ व्यापार मंडल
लाइसेंस से पहले टेस्ट जरूरी
परिवहन निगम लाइसेंस देने में खानापूरी करता है। बेहतर हो कि लाइसेंस देने से पहले प्रेेक्टिकल के तौर पर वाहन चलवाकर देखने चाहिए। मेरा खुद का भी लाइसेंस इसी तरह जारी हुआ। बेहतर होगा कि लाइसेंस जारी करने से पहले वाहन चलवाना चाहिए। देखना चाहिए कि व्यक्ति को यातायात नियम पता हैं या नहीं। - प्रियंका मित्तल, प्रधानाचार्या ओशोदीप पब्लिक स्कूल
बच्चों की जिद पूरी करने की बजाय समझाएं
यदि बच्चे स्कूटी बाइक लेकर स्कूल जाते हैं, तो इसमें अभिभावक की सहमति होती है। बेहतर होगा कि अभिभावक बच्चों की जिद पूरी करने की बजाय उन्हें कम उम्र में ड्राइविंग के अच्छे बुरे के बारे में समझाएं । - पवन संगल, अध्यक्ष उप्र उत्तर व्यापार प्रदेश मंडल
बदल लिया बेटी को स्कूटी सिखाने का इरादा
मेरी बेटी 12 साल की है। वो भी कई दिन से स्कूटी सीखने की जिद कर रही है। वो भी सोच रही थी कि स्कूटी सिखा दूं, लेकिन अमर उजाला के आज के संवाद कार्यक्रम के बाद उन्होंने इरादा बदल लिया है। अब वो बेटी को बालिग होने तक स्कूटी नहीं चलाने दूंगी। अमर उजाला का अभियान सराहनीय है। - रीतू गोयल, अभिभावक
गांवों में भी हों गोष्ठी
शहर की तरह गांवों में भी इस तरह के जागरूकता अभियान की जरूरत है। अमर उजाला को गांवों में भी इस तरह की गोष्ठी करनी चाहिए। उनका खुद का स्कूल है वह अमर उजाला की इस मुहिम में पूरी तरह साथ हैं। वाहनों में पटाखे लगाकर चलने वालों के साथ बाइक में पटाखा लगाने वाले मिस्त्री पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। - प्रसन्न चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष पति
बच्चो को कानून के बारे में बताएं
उनकी भी एक बेटी और बेटा है। वे दोनों भी स्कूटी चलाने की जिद करते हैं। कभी कभी तो नाराज होकर खाना नहीं खाते लेकिन उन्हें इसके दुष्परिणाम पता हैं। बच्चों को समझाना चाहिए, थोड़ा कानून का भी डर बिठाना चाहिए कि कम उम्र में ड्राइविंग के ये नुकसान होते हैं। - डॉक्टर नीलम शुक्ला
परिजन पहल करें
बच्चों के वाहन चलाने के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार परिजन हैं। बच्चे को वही तो वाहन दिलाते हैं । माना की आज के बच्चे जिद करते हैं, लेकिन उनकी जिद पूूरी करने से बेहतर उन्हें प्यार से समझाएं तो बच्चे मान जाएंगे। - सरोज तोमर, रिटायर्ड शिक्षिका
अमर उजाला का ये सामाजिक अभियान बेहद सराहनीय है। शहर को इसकी जरुरत थी। रोजाना सडकों पर एक बाइक पर तीन तीन बच्चे चलते हैं। उनके सामने ही कई सड़क हादसे हो चुके हैं। उनका संगठन इस अभियान में अमर उजाला के साथ खड़ा रहेगा। - अंकित गोयल अध्यक्ष, शामली मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीयल स्टेट
इन्होंने भी रखे विचार
अग्रवाल मित्र मंडल के अनुज बंसल ने कहा कि कल ही उनकी दुकान के सामने बाइक सवार तीन बच्चे बुरी तरह फिसले। तीनों को चोट लगी। यातायात विभाग को इसे लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत है। उन्हें ऐसे नंबर व्हाट्सएप नंबर जारी करने चाहिए कि यदि कोई बच्चा वाहन चलाता मिले, या ट्रिपल राइडिंग करे तो उनके फोटो खींचकर भेजे ताकि उन पर कार्रवाई हो। अमर उजाला की ये सामाजिक मुहिम वास्तव में बहुत सराहनीय है। वास्तव में ये बेहद गंभीर समस्या है। अमर उजाला के इस संवाद कार्यक्रम में स्कूल कालेजों के प्रधानाचार्या, प्रबंधक, अभिभावकों के अलावा इससे प्रभावित शहर के सभी वर्ग के गणमान्य लोग शामिल हुए। इस कार्यक्रम में आए सुझावों को पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखेंगे और उन पर अमल किया जाएगा। अमर उजाला की इस मुहिम में यातायात विभाग पूरी तरह साथ रहेगा। अमर उजाला टीम के साथ स्कूलों में जाकर भी बच्चों और अभिभावकों को जागरुक किया जाएगा। सड़कों पर भी अब सख्ती की जाएगी।
आज रॉयल पब्लिक स्कूल में होगी कार्यशाला
अमर उजाला की इस मुहिम के अंतर्गत आज शहर के रॉयल पब्लिक स्कूल में कार्यशाला का आयोजन होगा। इसमें स्कूली छात्र-छात्राओं के अलावा बच्चों के कुछ जागरूक अभिभावक और स्टॉफ भी शामिल होगा। इसमें अमर उजाला और यातायात विभाग के अधिकारी जागरूक करेंगे।
इन्होंने भी रखे विचार
वरिष्ठ समाजसेवी वीना अग्रवाल, महिला अग्रवाल समाज की अध्यक्ष अंजली गर्ग, मा.रामकुमार वर्मा, अनुराग जैन, व्यापारी नेता पंकज वालिया, अनीता बंसल, आरती संगल, व्यापारी नेता सुभाष धीमान, शालू गर्ग आदि ने भी विचार रखे और इस समस्या में अमर उजाला मुहिम में साथ रहने का संकल्प लिया।
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सख्ती करे यातायात विभाग
स्कूल में भी बच्चों का वाहन लेकर आना बंद है, लेकिन स्कूल से कुछ ही दूर पर कई बच्चे अपने वाहन खड़े करके आते हैं। यातायात विभाग को ये देखना चाहिए और सख्ती करनी चाहिए। अभिभावक आजकल के बच्चों के दबाव में आकर उनकी इच्छा पूरी करते हैं उन्हें ध्यान देना चाहिए ।अमर उजाला की मुहिम में हमारा स्कूल पूरा सहयोग करेगा। - एके गोयल, प्रिंसिपल सिल्वर बेल्स स्कूल
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दिखावा बंद कर बच्चों को समझाएं
बच्चों के हाथ में बाइक स्कूटी और मोबाइल देना बहुत से लोगों ने स्टेटस सिंबल बना लिया है। अपने बच्चे को बाइक चलाता देख कुछ लोग खुश होते हैं। ये ठीक है कि आजकल संसाधन बढे हैं लेकिन ये दिखावा ठीक नहीं है, ये बहुत गलत है। माता पिता को इस तरफ गंभीरता से देना होगा बच्चों की ड्राइविंग रोकनी होगी। - यशपाल पंवार, अध्यक्ष सहोदय
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मुझे अपने बच्चों से प्यार है
उनके बच्चों ने भी 14 साल की उम्र से ही कई बार बाइक लेने की जिद की, तमाम कोशिश की ,लेकिन उन्होंने नहीं दिलाई क्योंकि उन्हें अपने बच्चों से प्यार था। उन्होंने अपने सामने ही कई बच्चों के साथ हादसे होते देखे हैं। स्कूली बच्चों की ड्राइविंग रुके शुरूआत उनके ही स्कूल से क्यों ना हो। - अरविंद संगल, पूर्व पालिकाध्यक्ष शामली
बच्चों को काउंसिलिंग की जरूरत
बच्चों के शहर के अलग अलग स्थानों पर कई कई ट्यूशन होते हैं, इसी मजबूरी में ये सब हो रहा है। इसके लिए बच्चों ओर अभिभावकों की काउंसिलिंग की जरूरत है कि वे कोई ऐसी व्यवस्था करें जिससे बच्चों की ड्राइविंग रुके या उन्हें बिना गेयर वाली इलैक्ट्रिक वाहन दें जो 16 साल के बाद मान्य है। - संजीव कुमार, शिक्षक स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल
ये कानूनी नहीं सामाजिक समस्या
बच्चों की ड्राइविंग कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक समस्या है। बच्चों की पहली पाठशाला उसका परिवार होता है। परिवार के बड़े उसे अच्छा बुरा समझाएं। हम स्कूलों को कोसते हैं लेकिन परिवार इसके लिए सबसे बडेे़ जिम्मेदार हैं। हम लोग राजनेताओं के वोट मांगने के तो बड़े बड़े होर्डिंग लगवाते हैं, कभी यातायात नियमों का पालन करने के भी होर्डिंग लगवाने चाहिए। - प्रताप चौधरी, प्रवक्ता जनता वैदिक कालेज बड़ौत
सप्ताह में एक घंटा यातायात नियमों पर हो
यदि हर व्यक्ति अपने परिवार के बच्चों को ही सुधार ले तो ये समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। सप्ताह में एक दिन गांव शहर के सभी स्कूलों में एक घंटा यातायात नियमों के बारे में जानकारी देने का होना चाहिए। उसमें बच्चों की अच्छी काउंसिलिंग होनी चाहिए। उनका व्यापार संगठन इस मुहिम में पूरी तरह अमर उजाला के साथ है। - धनश्याम दास गर्ग, अध्यक्ष पं.उप्र. सं उ व्यापार मंडल
लाइसेंस से पहले टेस्ट जरूरी
परिवहन निगम लाइसेंस देने में खानापूरी करता है। बेहतर हो कि लाइसेंस देने से पहले प्रेेक्टिकल के तौर पर वाहन चलवाकर देखने चाहिए। मेरा खुद का भी लाइसेंस इसी तरह जारी हुआ। बेहतर होगा कि लाइसेंस जारी करने से पहले वाहन चलवाना चाहिए। देखना चाहिए कि व्यक्ति को यातायात नियम पता हैं या नहीं। - प्रियंका मित्तल, प्रधानाचार्या ओशोदीप पब्लिक स्कूल
बच्चों की जिद पूरी करने की बजाय समझाएं
यदि बच्चे स्कूटी बाइक लेकर स्कूल जाते हैं, तो इसमें अभिभावक की सहमति होती है। बेहतर होगा कि अभिभावक बच्चों की जिद पूरी करने की बजाय उन्हें कम उम्र में ड्राइविंग के अच्छे बुरे के बारे में समझाएं । - पवन संगल, अध्यक्ष उप्र उत्तर व्यापार प्रदेश मंडल
बदल लिया बेटी को स्कूटी सिखाने का इरादा
मेरी बेटी 12 साल की है। वो भी कई दिन से स्कूटी सीखने की जिद कर रही है। वो भी सोच रही थी कि स्कूटी सिखा दूं, लेकिन अमर उजाला के आज के संवाद कार्यक्रम के बाद उन्होंने इरादा बदल लिया है। अब वो बेटी को बालिग होने तक स्कूटी नहीं चलाने दूंगी। अमर उजाला का अभियान सराहनीय है। - रीतू गोयल, अभिभावक
गांवों में भी हों गोष्ठी
शहर की तरह गांवों में भी इस तरह के जागरूकता अभियान की जरूरत है। अमर उजाला को गांवों में भी इस तरह की गोष्ठी करनी चाहिए। उनका खुद का स्कूल है वह अमर उजाला की इस मुहिम में पूरी तरह साथ हैं। वाहनों में पटाखे लगाकर चलने वालों के साथ बाइक में पटाखा लगाने वाले मिस्त्री पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। - प्रसन्न चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष पति
बच्चो को कानून के बारे में बताएं
उनकी भी एक बेटी और बेटा है। वे दोनों भी स्कूटी चलाने की जिद करते हैं। कभी कभी तो नाराज होकर खाना नहीं खाते लेकिन उन्हें इसके दुष्परिणाम पता हैं। बच्चों को समझाना चाहिए, थोड़ा कानून का भी डर बिठाना चाहिए कि कम उम्र में ड्राइविंग के ये नुकसान होते हैं। - डॉक्टर नीलम शुक्ला
परिजन पहल करें
बच्चों के वाहन चलाने के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार परिजन हैं। बच्चे को वही तो वाहन दिलाते हैं । माना की आज के बच्चे जिद करते हैं, लेकिन उनकी जिद पूूरी करने से बेहतर उन्हें प्यार से समझाएं तो बच्चे मान जाएंगे। - सरोज तोमर, रिटायर्ड शिक्षिका
अमर उजाला का ये सामाजिक अभियान बेहद सराहनीय है। शहर को इसकी जरुरत थी। रोजाना सडकों पर एक बाइक पर तीन तीन बच्चे चलते हैं। उनके सामने ही कई सड़क हादसे हो चुके हैं। उनका संगठन इस अभियान में अमर उजाला के साथ खड़ा रहेगा। - अंकित गोयल अध्यक्ष, शामली मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीयल स्टेट
इन्होंने भी रखे विचार
अग्रवाल मित्र मंडल के अनुज बंसल ने कहा कि कल ही उनकी दुकान के सामने बाइक सवार तीन बच्चे बुरी तरह फिसले। तीनों को चोट लगी। यातायात विभाग को इसे लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत है। उन्हें ऐसे नंबर व्हाट्सएप नंबर जारी करने चाहिए कि यदि कोई बच्चा वाहन चलाता मिले, या ट्रिपल राइडिंग करे तो उनके फोटो खींचकर भेजे ताकि उन पर कार्रवाई हो। अमर उजाला की ये सामाजिक मुहिम वास्तव में बहुत सराहनीय है। वास्तव में ये बेहद गंभीर समस्या है। अमर उजाला के इस संवाद कार्यक्रम में स्कूल कालेजों के प्रधानाचार्या, प्रबंधक, अभिभावकों के अलावा इससे प्रभावित शहर के सभी वर्ग के गणमान्य लोग शामिल हुए। इस कार्यक्रम में आए सुझावों को पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखेंगे और उन पर अमल किया जाएगा। अमर उजाला की इस मुहिम में यातायात विभाग पूरी तरह साथ रहेगा। अमर उजाला टीम के साथ स्कूलों में जाकर भी बच्चों और अभिभावकों को जागरुक किया जाएगा। सड़कों पर भी अब सख्ती की जाएगी।
आज रॉयल पब्लिक स्कूल में होगी कार्यशाला
अमर उजाला की इस मुहिम के अंतर्गत आज शहर के रॉयल पब्लिक स्कूल में कार्यशाला का आयोजन होगा। इसमें स्कूली छात्र-छात्राओं के अलावा बच्चों के कुछ जागरूक अभिभावक और स्टॉफ भी शामिल होगा। इसमें अमर उजाला और यातायात विभाग के अधिकारी जागरूक करेंगे।
इन्होंने भी रखे विचार
वरिष्ठ समाजसेवी वीना अग्रवाल, महिला अग्रवाल समाज की अध्यक्ष अंजली गर्ग, मा.रामकुमार वर्मा, अनुराग जैन, व्यापारी नेता पंकज वालिया, अनीता बंसल, आरती संगल, व्यापारी नेता सुभाष धीमान, शालू गर्ग आदि ने भी विचार रखे और इस समस्या में अमर उजाला मुहिम में साथ रहने का संकल्प लिया।

शामली नगर पालिका सभागार में अमर उजाला द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में भाग लेते शहर के गणमान्?- फोटो : SHAMLI

शामली नगर पालिका सभागार में अमर उजाला द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में भाग लेते शहर के गणमान्?- फोटो : SHAMLI