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कूड़ा निस्तारण के दावे बड़े, धरातल पर नहीं हुआ काम
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शामली। नगरपालिका द्वारा कूड़ा निस्तारण के दावे बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा है। इसी वजह से डंपिंग ग्राउंड में लाखों टन कूड़ा एकत्र हो चुका है।
शहर से निकलने वाले कूड़े को इकट्ठा करने की व्यवस्था तो पालिका द्वारा की जा रही है, लेकिन उसके निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं बनी है। पालिका ने प्लांट लगाकर कूड़ा निस्तारण करने की योजना बनाई, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई। उस समय पालिका का दावा था कि कूड़े से निकलने वाली बारीक मिट्टी खाद के रूप में इस्तेमाल होगी। कूड़े से निकलने वाले ईंट पत्थर के टुकड़े भराव में काम आ सकेंगे। पॉलिथीन और कपड़ा आदि अलग कर उसे किसी अन्य काम में लिया जाएगा। इसकी बिक्री होने से पालिका की आमदनी भी बढ़ेगी और कूड़े का निस्तारण भी होगा, लेकिन खाद व अन्य मैटीरियल का खरीदार नहीं मिल सका। यह प्लांट पहले कई साल तक बंद रहा और वर्तमान में भी कई महीने से बंद चल रहा है। जब चलता है तब भी आधे से कम कूड़े से मैटीरियल ही अलग-अलग हो पाता है। एक दिन में शहर से करीब 38 टन कूड़ा निकलता है। कूड़ा निस्तारण न होना बड़ी समस्या बन रही है। शासन के भी स्पष्ट निर्देश है कि कूड़े का निस्तारण किया जाए, लेकिन पालिका के पास अभी तक कोई ठोस योजना कूड़ा निस्तारण की नहीं है। यही हाल रहा तो पालिका के पास कूड़ा डंप करने को भी जगह नहीं बचेगी और यह समस्या और विकट हो जाएगी।
डंपिंग ग्राउंड में इकट्ठा हो रहे कूड़े के बायोवेनिडेशन निस्तारण के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है। डीपीआर की स्वीकृति होने पर टेंडर निकाला जाएगा। प्रोसेसिंग प्लांट के लिए भी डीपीआर तैयार की गई है, ताकि कूड़े का जल्द निस्तारण किया जा सके।
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- सुरेंद्र सिंह, ईओ नगरपालिका शामली।
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शहर से निकलने वाले कूड़े को इकट्ठा करने की व्यवस्था तो पालिका द्वारा की जा रही है, लेकिन उसके निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं बनी है। पालिका ने प्लांट लगाकर कूड़ा निस्तारण करने की योजना बनाई, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई। उस समय पालिका का दावा था कि कूड़े से निकलने वाली बारीक मिट्टी खाद के रूप में इस्तेमाल होगी। कूड़े से निकलने वाले ईंट पत्थर के टुकड़े भराव में काम आ सकेंगे। पॉलिथीन और कपड़ा आदि अलग कर उसे किसी अन्य काम में लिया जाएगा। इसकी बिक्री होने से पालिका की आमदनी भी बढ़ेगी और कूड़े का निस्तारण भी होगा, लेकिन खाद व अन्य मैटीरियल का खरीदार नहीं मिल सका। यह प्लांट पहले कई साल तक बंद रहा और वर्तमान में भी कई महीने से बंद चल रहा है। जब चलता है तब भी आधे से कम कूड़े से मैटीरियल ही अलग-अलग हो पाता है। एक दिन में शहर से करीब 38 टन कूड़ा निकलता है। कूड़ा निस्तारण न होना बड़ी समस्या बन रही है। शासन के भी स्पष्ट निर्देश है कि कूड़े का निस्तारण किया जाए, लेकिन पालिका के पास अभी तक कोई ठोस योजना कूड़ा निस्तारण की नहीं है। यही हाल रहा तो पालिका के पास कूड़ा डंप करने को भी जगह नहीं बचेगी और यह समस्या और विकट हो जाएगी।
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डंपिंग ग्राउंड में इकट्ठा हो रहे कूड़े के बायोवेनिडेशन निस्तारण के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है। डीपीआर की स्वीकृति होने पर टेंडर निकाला जाएगा। प्रोसेसिंग प्लांट के लिए भी डीपीआर तैयार की गई है, ताकि कूड़े का जल्द निस्तारण किया जा सके।
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- सुरेंद्र सिंह, ईओ नगरपालिका शामली।