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Shamli News: आम पर तेला-चेपा का कहर, बागवानों की बढ़ी चिंता

Wed, 29 Apr 2026 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2026 12:15 AM IST
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Mango trees are facing havoc due to the attack of Tela-Chippa, increasing the concern of the gardeners.
हसनपुर  लुहारी में   आम के बाग की धुलाई करता किसान । संवाद - फोटो : सांकेतिक
हसनपुर लुहारी। इस बार आम के पेड़ों पर भरपूर बोर आने से बंपर फसल की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन तेला-चेपा रोग के बढ़ते प्रकोप ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। रोग के चलते पेड़ों की फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
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बागवान इस रोग से निजात पाने के लिए अलग-अलग कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद रोग पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बागवानों की नींद उड़ी हुई है और लागत भी लगातार बढ़ती जा रही है।
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जिले के हसनपुर लुहारी, थानाभवन, जलालाबाद क्षेत्र में आम के बाग है, जहां तेला-चेपा रोग ने आम के बोर को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। बीमारी तेजी से फैल रही है और करीब 50 प्रतिशत तक फसल खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
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हसनपुर लुहारी में ठेके पर बाग लेकर खेती करने वाले बागवान महबूब ने बताया कि इस बार बोर अच्छा आया था, जिससे अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन अब रोग के कारण फसल खराब हो रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो केवल 30 से 35 प्रतिशत तक ही फसल बच पाएगी।
लुहारी क्षेत्र के ही बागवान नौशाद, इदरीश और दानिश ने बताया कि तेला-चेपा का प्रकोप काफी अधिक है। यह कीट आम का रस चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाने के साथ ही उसकी गुणवत्ता को भी प्रभावित कर रहा है। अब तक सात बार बाग की धुलाई (स्प्रे) की जा चुकी है, लेकिन रोग खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है।

लगभग पांच हजार हेक्टेयर में खड़ी है आम की फसल
शामली जिले में करीब पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम की फसल खड़ी है। हसनपुर लुहारी, गढ़ीपुख्ता और कांधला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आम की खेती की जाती है। यहां से आम की आपूर्ति दूसरे जिलों और अन्य प्रदेशों में भी होती है। अधिकांश बागवान बेहतर दाम मिलने के कारण दिल्ली की आजादपुर मंडी का रुख करते हैं। रामकेला प्रजाति का आम अचार बनाने के लिए अधिक उपयोग में लाया जाता है।




आम की फसल में तेला-चेपा रोग से बचाव के उपाय
कृषि अधिकारी प्रदीप यादव के अनुसार
1. समय पर छिड़काव करें
बोर आने की अवस्था में ही कीटनाशक का पहला छिड़काव करें
जरूरत के अनुसार 10-15 दिन के अंतराल पर दोहराएं
नीम आधारित उपाय

नीम का तेल (1500-3000 पीपीएम) का छिड़काव
यह कीटों की संख्या कम करने में सहायक और सुरक्षित विकल्प है
बाग की सफाई रखें
सूखी और रोगग्रस्त टहनियों को काटकर नष्ट करें
गिरे हुए पत्तों और अवशेषों को हटाएं
संतुलित खाद और सिंचाई
अत्यधिक नाइट्रोजन खाद से बचें
उचित सिंचाई करें, ज्यादा नमी भी कीट बढ़ाती है
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