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नेपाल के व्यक्ति की दौरा पड़ने से मौत
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शामली। पानीपत में रहने वाले बेटे से मिलने जा रहे नेपाल निवासी व्यक्ति की बस में दौरा पड़ने से मौत हो गई।
नेपाल के गांव एटपुर महेंद्र नगर निवासी बुद्धराम (40) अपने साथी श्याम लाल निवासी बनखित के साथ बस से पानीपत जा रहा था। श्यामपाल ने पुलिस को बताया कि वे नेपाल से चलकर हल्द्वानी होते हुए मुजफ्फरनगर पहुंचे। मुजफ्फरनगर से रोडवेज बस से पानीपत जा रहे थे। मुजफ्फरनगर और शामली के बीच बुद्धराम को अचानक दौरा पड़ा और तबियत खराब हो गई। चालक बस लेकर शामली पहुंचा और वहां से एंबुलेंस के माध्यम से उनको सीएचसी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, श्यामपाल ने बताया कि उसका बेटा रामकुमार और बुद्धराम का बेटा रोहित पानीपत के निकट पोल्ट्री फार्म पर एक साथ काम करते है। वे दोनों अपने-अपने बेटों से मिलने के लिए जा रहे थे। बुद्धराम भी पहले वहीं काम करता था और उसे ही उनके काम करने वाले स्थान की जानकारी थी। बुद्धराम की मौत होने के बाद अब उसे यह जानकारी नहीं है कि उनके बेटे किस पोल्ट्री फार्म पर काम करते है।
शव के अंतिम संस्कार के लिए रुपये तक नहीं
शामली। नेपाल निवासी श्यामलाल ने पुलिस को बताया कि वह बेहद गरीब है। मेहनत मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन पोषण करते है। बेटे से मिलने के लिए किसी तरह टिकट के पैसे का इंतजाम किया था। पीड़ित ने कहा कि उसके पास अपने साथी बुद्धराम के शव का अंतिम संस्कार करने के भी पैसे नहीं है। अगर वह यहां पर शव का अंतिम संस्कार करता है तो उसके परिजनों को सूचना कैसे पहुंचाएं। उनके पास तो मृतक के पुत्र का मोबाइल नंबर भी नहीं है।
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नेपाल के गांव एटपुर महेंद्र नगर निवासी बुद्धराम (40) अपने साथी श्याम लाल निवासी बनखित के साथ बस से पानीपत जा रहा था। श्यामपाल ने पुलिस को बताया कि वे नेपाल से चलकर हल्द्वानी होते हुए मुजफ्फरनगर पहुंचे। मुजफ्फरनगर से रोडवेज बस से पानीपत जा रहे थे। मुजफ्फरनगर और शामली के बीच बुद्धराम को अचानक दौरा पड़ा और तबियत खराब हो गई। चालक बस लेकर शामली पहुंचा और वहां से एंबुलेंस के माध्यम से उनको सीएचसी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, श्यामपाल ने बताया कि उसका बेटा रामकुमार और बुद्धराम का बेटा रोहित पानीपत के निकट पोल्ट्री फार्म पर एक साथ काम करते है। वे दोनों अपने-अपने बेटों से मिलने के लिए जा रहे थे। बुद्धराम भी पहले वहीं काम करता था और उसे ही उनके काम करने वाले स्थान की जानकारी थी। बुद्धराम की मौत होने के बाद अब उसे यह जानकारी नहीं है कि उनके बेटे किस पोल्ट्री फार्म पर काम करते है।
शव के अंतिम संस्कार के लिए रुपये तक नहीं
शामली। नेपाल निवासी श्यामलाल ने पुलिस को बताया कि वह बेहद गरीब है। मेहनत मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन पोषण करते है। बेटे से मिलने के लिए किसी तरह टिकट के पैसे का इंतजाम किया था। पीड़ित ने कहा कि उसके पास अपने साथी बुद्धराम के शव का अंतिम संस्कार करने के भी पैसे नहीं है। अगर वह यहां पर शव का अंतिम संस्कार करता है तो उसके परिजनों को सूचना कैसे पहुंचाएं। उनके पास तो मृतक के पुत्र का मोबाइल नंबर भी नहीं है।
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