फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Malnourished 451 children, only ten milch cows in gaushalas

Shamli News: अतिकुपोषित 451 बच्चे, गोशालाओं में दुधारू गाय मात्र दस

Fri, 10 Mar 2023 11:53 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Fri, 10 Mar 2023 11:53 PM IST
विज्ञापन
Malnourished 451 children, only ten milch cows in gaushalas
- सरकार की अतिकुपोषित बच्चों को दुधारू गाय भेंट करने की है योजना
विज्ञापन

- गोशालाओं में संरक्षित लगभग सभी गाय खुद हैं अतिकुपोषित
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। सरकार की अतिकुपोषित बच्चों को दुधारू गाय देने की योजना है। लेकिन गोशालाओं में अधिकतर गाय खुद कुपोषित हैं। जिले में 451 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी के हैं और गोशालाओं में दुधारू गाय मात्र 10 हैं। ऐसे में अतिकुपोषित बच्चे कुपोषण से जंग नहीं जीत पा रहे हैं।
भोजन का ठीक से ध्यान न रखने के कारण बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में आ जाते हैं। प्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों को चिह्नित कर पुष्टाहार देने के लिए आदेश दे रखा है। अतिकुपोषित बच्चों का स्वस्थ करने के लिए सरकार दो वर्ष पूर्व उनको गोशाला में बंधी दुधारू गाय देने का निर्णय लिया था। पिछले वर्ष भी अतिकुपोषित बच्चों को गाय देने के लिए कहा था, जिसके बाद बीस परिवारों को चिह्नित किया था। जिसके बाद डीएम की अध्यक्षता में उन पर मोहर लगा दी थी। चिह्नित परिवारों को गाय देने के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने गाय बांधने के लिए जगह न होने का हवाला देते हुए मना कर दिया था। जिसके चलते उन्हें गाय नहीं दी जा सकी थी।
विज्ञापन

अब एक बार फिर अतिकुपोषित बच्चों के परिजनों को गाय देने के लिए चिन्हित किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जनपद में 451 अतिकुपोषित बच्चे हैं और गोशालाओं में दुधारू गाय की संख्या मात्र 10 है। ऐसे में कैसे सभी बच्चों को दुधारू गाय दी जाएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

-

जिले में नहीं है एनआरसी
अतिकुपोषित बच्चों के उपचार के लिए एनआरसी में भर्ती कराया जाता है। जहां वह चिकित्सकों की देखरेख में रहते हैं। बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाता है। साथ ही खेलने और मनोरंजन की सुविधाएं भी होतीं हैं। जिले अभी तक एनआरसी की स्थापना नहीं हुई। यहां के अतिकुपोषित बच्चों को मुजफ्फरनगर भेजा जाता है। लेकिन अधिक दूर होने के कारण ज्यादातर बच्चों के परिजन वहां जाने से साफ इंकार कर देते हैं। उन्हें घर पर ही उपचार करना पड़ता है।
--

गाय बांधने पर सरकार देती है चारा-पानी का खर्चा
अतिकुपोषित बच्चों के परिजन यदि गाय बांधते हैं उनको चारा-पानी खिलाने का खर्चा दिया जाता है। पहले सरकार तीस रुपये देती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 62 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। लेकिन मजबूरी में परिजन गाय को नहीं ले पाते।
---

अप्रैल में जिला अस्पताल में बन सकती है एनआरसी
जिला कार्यक्रम विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से वार्ता करके जिला अस्पताल में एनआरसी बनाने की मांग रखी है। जिस पर सीएमओ ने उन्हें अप्रैल माह तक एनआरसी बनाने का आश्वासन दिया है। पहले भी एनआरसी के निर्माण की मांग उठ चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

---

जनपद में 451 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी के हैं। उनका ध्यान रखने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को लगाया गया है। पिछले वर्ष भी परिवार चिह्नित किए गए थे, लेकिन किसी ने दुधारु गाय नहीं ली थी। इस बार तैयारी की जा रही है। यहां के अतिकुपोषित बच्चों को मुजफ्फरनगर एनआरसी भेजा जाता है, लेकिन दूर होने के कारण परिजन जाते नहीं है। जिला अस्पताल में एनआरसी बनाने के लिए सीएमओ से वार्ता की गई। - बाबर खान, जिला कार्यक्रम अधिकारी, शामली।
--

दीपक गुप्ता
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed