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महिमा की मौत से हर कोई आहत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Feb 2017 11:46 PM IST
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शामली। महिमा का परिवार 15 साल पूर्व शामली से मुजफ्फरनगर शिफ्ट हो गया था। पूर्व में उनके पिता देवप्रकाश शामली में प्राइवेट स्कूल चलाते थे। महिमा के दादा रामस्वरूप जागिड़ शामली नगरपालिका परिषद में बाबू के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। महिमा की मौत से हर शख्स आहत है।
फिलहाल रामस्वरूप कांबोज कॉलोनी में पूर्व चेयरमैन बलबीर कांबोज के मकान में अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। महिमा की मौत के बाद वह भी मुजफ्फरनगर गए हुए हैं। विश्वकर्मा समाज के लोगों का कहना है कि इनका परिवार बहुत शालीन है, कभी किसी से इनका विवाद नहीं रहा। पूर्व में महिमा के पिता देवप्रकाश शामली में बुढ़ाना रोड पर बलभद्र मंदिर के पास स्थित मकान में रहते थे, वहीं पर प्राइवेट स्कूल का संचालन करते थे। करीब 15 साल पूर्व वह अपना मकान बेचकर मुजफ्फरनगर शिफ्ट हो गए थे।
महिमा की मौत की खबर सुनकर हर कोई आहत है। विश्वकर्मा समाज के सुभाष धीमान का कहना है कि देवप्रकाश के पिता रामस्वरूप नगरपालिका परिषद में बाबू रहते हुए सादगी के साथ जीवनयापन किया। उधर, रविवार को महिमा के दादा-दादी से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वहां मकान पर महिमा की दादी ही मिली। उनका कहना था कि महिमा के दादा मुजफ्फरनगर गए हुए हैं। महिमा की आत्महत्या के संबंध में उनका कहना था कि आरोपियों ने मेरी पोती की जान ले ली। युधिष्ठिर पहलवान का नाम लेकर वह बोली कि वह तो मेरे मायके लखनऊ तक पहुंच गया था। उन्होंने कहा कि यही लोग मेरी पोती की मौत के जिम्मेदार हैं।
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फिलहाल रामस्वरूप कांबोज कॉलोनी में पूर्व चेयरमैन बलबीर कांबोज के मकान में अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। महिमा की मौत के बाद वह भी मुजफ्फरनगर गए हुए हैं। विश्वकर्मा समाज के लोगों का कहना है कि इनका परिवार बहुत शालीन है, कभी किसी से इनका विवाद नहीं रहा। पूर्व में महिमा के पिता देवप्रकाश शामली में बुढ़ाना रोड पर बलभद्र मंदिर के पास स्थित मकान में रहते थे, वहीं पर प्राइवेट स्कूल का संचालन करते थे। करीब 15 साल पूर्व वह अपना मकान बेचकर मुजफ्फरनगर शिफ्ट हो गए थे।
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महिमा की मौत की खबर सुनकर हर कोई आहत है। विश्वकर्मा समाज के सुभाष धीमान का कहना है कि देवप्रकाश के पिता रामस्वरूप नगरपालिका परिषद में बाबू रहते हुए सादगी के साथ जीवनयापन किया। उधर, रविवार को महिमा के दादा-दादी से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वहां मकान पर महिमा की दादी ही मिली। उनका कहना था कि महिमा के दादा मुजफ्फरनगर गए हुए हैं। महिमा की आत्महत्या के संबंध में उनका कहना था कि आरोपियों ने मेरी पोती की जान ले ली। युधिष्ठिर पहलवान का नाम लेकर वह बोली कि वह तो मेरे मायके लखनऊ तक पहुंच गया था। उन्होंने कहा कि यही लोग मेरी पोती की मौत के जिम्मेदार हैं।
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