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Shamli News: राजपूत वंशावली लिखने वाले महेंद्र सिंह ने दर्ज कराए बयान
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शामली। जलालाबाद ऐतिहासिक किले के मामले में राजस्थान के राजपूतों की वंशावली लिखने वाले और आदर्श बड़वा राव महासभा प्रबंधन समिति जयपुर के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने शामली तहसील के एसडीएम सदर विनय कुमार भदौरिया के यहां अपने कलम बंद बयान दर्ज कराए हैं। उन्होंने दावा किया कि जलालाबाद का प्राचीन नाम मनहारखेड़ा था। यहां पुंडीर वंश के राजपूतों का शासन था।
एसडीएम सदर विनय कुमार भदौरिया के यहां दर्ज बयान में कहा कि मनहार खेड़ा के राजा धारु के पुत्र करमचंद, धामदेव, जीत सिंह, कपूर सिंह हुए। करमचंद मनहारखेड़ा, धामदेव लुहारी, जीत सिंह थानाभवन, कपूर सिंह बड़गांव में रहे। करमचंद के सात पुत्र हास दखोड़ी, नुकसपाल भावसी, 1784 संवत में केहर सिंह, तुरति सिंह, मदन सिंह, महीराम सिंह के तीन पुत्र प्रेमसिंह, हिम्मत सिंह, दीवान सिंह सहारनपुर जिले के भावसी, रायपुर, भारी दिनदारपुर, काशीपुर गांव में रह रहे हैं।
बयान में यह दर्ज कराया कि राजा भिक्कन सिंह के शासन काल में किले और खेड़े पर जलालखान का कब्जा हो गया था। मनहारखेड़ा राज परिवार मारा गया। एक रानी बची, जो उस समय अपने मायके में गर्भवती हालात में थी। महारानी की संतान मामचंद सिंह को संवत 1784 में गांव भावसी आना पड़ा।
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उधर, किले के मामले में थानाभवन विधायक अशरफ अली को एसडीएम सदर ने गत पांच फरवरी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। विधायक अशरफ अली ने अपना पक्ष रखने के लिए 20 फरवरी तक समय मांगा था।
एसडीएम सदर के यहां मनहारखेड़ा दुर्ग कल्याण समिति के पहले दौर में छह लोग और पांच फरवरी को भावसी गांव के राजपूत पक्ष के दर्जनों लोग बयान दर्ज करा चुके हैं। मामला उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग लखनऊ के यहां विचाराधीन है। विधायक के एसडीएम सदर के यहां बयान दर्ज होने और साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद साफ होगा कि किले का मालिक आखिर कौन है।
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एसडीएम सदर विनय कुमार भदौरिया के यहां दर्ज बयान में कहा कि मनहार खेड़ा के राजा धारु के पुत्र करमचंद, धामदेव, जीत सिंह, कपूर सिंह हुए। करमचंद मनहारखेड़ा, धामदेव लुहारी, जीत सिंह थानाभवन, कपूर सिंह बड़गांव में रहे। करमचंद के सात पुत्र हास दखोड़ी, नुकसपाल भावसी, 1784 संवत में केहर सिंह, तुरति सिंह, मदन सिंह, महीराम सिंह के तीन पुत्र प्रेमसिंह, हिम्मत सिंह, दीवान सिंह सहारनपुर जिले के भावसी, रायपुर, भारी दिनदारपुर, काशीपुर गांव में रह रहे हैं।
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बयान में यह दर्ज कराया कि राजा भिक्कन सिंह के शासन काल में किले और खेड़े पर जलालखान का कब्जा हो गया था। मनहारखेड़ा राज परिवार मारा गया। एक रानी बची, जो उस समय अपने मायके में गर्भवती हालात में थी। महारानी की संतान मामचंद सिंह को संवत 1784 में गांव भावसी आना पड़ा।
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उधर, किले के मामले में थानाभवन विधायक अशरफ अली को एसडीएम सदर ने गत पांच फरवरी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। विधायक अशरफ अली ने अपना पक्ष रखने के लिए 20 फरवरी तक समय मांगा था।
एसडीएम सदर के यहां मनहारखेड़ा दुर्ग कल्याण समिति के पहले दौर में छह लोग और पांच फरवरी को भावसी गांव के राजपूत पक्ष के दर्जनों लोग बयान दर्ज करा चुके हैं। मामला उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग लखनऊ के यहां विचाराधीन है। विधायक के एसडीएम सदर के यहां बयान दर्ज होने और साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद साफ होगा कि किले का मालिक आखिर कौन है।