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मां के साथ पिता की भी जिम्मेदारी निभा रही सोमती

Sat, 11 May 2019 11:02 PM IST
NAVEEN GUPTA अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: NAVEEN GUPTA Updated Sat, 11 May 2019 11:02 PM IST
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maa ke saath pita ki bhi jimedaari nibha rahi somti
file photo - फोटो : amarujala
शांति मोहल्ला निवासी सोमती के पति की बीमारी के कारण मौत हो गई।  घर में छह छोटे छोटे बच्चे थे। कमाने वाला कोई नहीं रहा। दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ गए । कभी कभी तो भूखे पेट भी सोना पड़ा, लेकिन सोमती ने हार नहीं मानी। मन मजबूत किया और घर में ही सिलाई बुनाई का काम शुरू कर दिया । अपने जज्बे और मेहनत के बूते उसने बच्चों को पढ़ाया लिखाया और काबिल बनाया। आज परिवार में पूरी खुशियां हैं।
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शहर के शांति मोहल्ला निवासी सोमती देवी के पति इलम चंद की शहर में किराए की दुकान थी। घर में तीन बेटी अंजू, मंजू, रेखा, रजनी और दो बेटे राजन और राजीव थे। जब बड़ी बेटी अंजू जब केवल 13 साल और सबसे छोटा बेटा राजीव केवल दो साल का था, तो इलम चंद की बीमारी के चलते मौत हो गई। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। वहीं, घर में एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। पिता की मौत के बाद तो परिवार पर तो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा। कुछ दिन तो रिश्तेदारों ने मदद की ,लेकिन इसके बाद सोमती ने अपना मन मजबूत किया। उसने मां के साथ पिता की जिम्मेेदारी भी उठाई। रिश्तेदारों की मदद से घर में सिलाई मशीन खरीदी और घर में ही महिलाओं के कपड़े बनाने का काम शुरू किया। धीरे धीरे बेटियां बड़ी होती रही और काम में हाथ बंटाने लगी। सबने मिलकर काम बढ़ाया और आज इस परिवार में सब खुशियां हैं।
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बेटे बेटी में फर्क नहीं समझा
 सोमती ने कहा कि उसने किसी भी बेटे या बेटी में फर्क नहीं समझा। सबको स्कूल भेजा। ग्रेजुएशन तक कराया। एक बेटी की बीमारी से मौत हो गई। दो बेटियों की शादी की। दोनों बेटों को पोस्ट ग्रेजुुएशन कराया। एक बेटा प्राइवेट कंपनी में एकाउंटेंट है जबकि दूसरा प्राइवेट स्कूल में जॉब कर रहा है। सबसे छोटी अविवाहित बेटी रजनी भी काम में हाथ बंटाती है।
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भूखे पेट भी सोना पड़ा
सोमती ने बताया कि पति की मौत के बाद सिलाई का काम शुरू किया, लेकिन इसे जमने में वक्त लगा। कभी कभी तो वो भी वक्त आया जब पूरे दिन भूखे रहना पड़ा। किसी किसी दिन एक वक्त ही रोटी नसीब हुई। लेकिन का कहना है कि वो खुशनसीब है कि उनके बेटे और बेटियों ने कभी किसी भी चीज की डिमांड नहीं की जो दिया वो खाया और पहना। उन्हें अपने पूरे परिवार पर नाज है।
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