{"_id":"5c8be643bdec22145b20ddbb","slug":"loksabha-chunaav-me-sapa-ne-khela-muslim-card","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकसभा चुनाव में सपा ने फिर खेला मुस्लिम कार्ड ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकसभा चुनाव में सपा ने फिर खेला मुस्लिम कार्ड
Fri, 15 Mar 2019 11:22 PM IST
NAVEEN GUPTA
amarujala
amarujala
Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Fri, 15 Mar 2019 11:22 PM IST
विज्ञापन
file
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैराना लोकसभा सीट पर सपा ने फिर से मुस्लिम कार्ड खेला है। पार्टी ने हसन परिवार पर भरोसा जताकर उपचुनाव में रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़कर सांसद बनीं तबस्सुम हसन को टिकट थमाया है। तबस्सुम इस सीट पर अब तक दो बार सांसद रह चुकी हैं।
सपा-बसपा -रालोद के बीच गठबंधन के बाद इस बार कैराना लोकसभा सीट सपा के हिस्से में आई। इस सीट पर शामली की तीन और सहारनपुर जनपद की पांच विधान सभाएं लगती हैं। इनके 16 लाख मतदाताओं में करीब पांच लाख मुस्लिम मतदाता हैं। चूंकि मुस्लिम मतदाताओं में हसन परिवार की अच्छी पकड़ हैै। इसी कारण इस सीट पर हसन परिवार का दावा शुरू से ही मजबूत माना जा रहा था। हालांकि सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर पंवार कई महीनों से टिकट के लिए प्रयासरत थे, लेकिन हसन परिवार पर ही सपा ने भरोसा जताया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूर्व मंत्री गुर्जर नेता वीरेंद्र सिंह को भी इसका पता पहले ही लग चुका था और वे इन दिनों भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
बता दें कि तबस्सुम हसन इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा के सिंबल पर चुुनाव लड़ी थीं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह को करीब 22 हजार से अधिक मतों से मात दी थी। सपा प्रत्याशी शाजान मसूद तीसरे नंबर पर रहे थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने तबस्सुम के बेटे नाहिद हसन को टिकट दिया, लेकिन भाजपा की आंधी में नाहिद परास्त हुए। हुकुम सिंह ने 5.65 लाख वोट लेकर सपा के नाहिद हसन को मात दी थी। नाहिद को 3.29 लाख मत मिले थे। सवा दो लाख से अधिक के अंतर से हुकुम सिंह की जीत हुई थी। सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर मई में हुए उपचुनाव में पासा पलट गया। सपा -रालोद के बीच हुए समझौते के बाद पूर्व सांसद तबस्सुम हसन को चौधरी अजित सिंह ने रालोद में शामिल करके कैराना का टिकट दिया । सपा, बसपा और कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारे। विपक्षी पार्टियों की इस एकजुटता का नतीजा हुआ कि रालोद की तबस्सुम हसन ने भाजपा की मृगांका सिंह को हराकर भाजपा से ये सीट छीन ली। तबस्सुम हसन को 51 फीसदी मत मिले थे, जबकि मृगांका को 46 फीसदी। रालोद प्रत्याशी को जाटों के अलावा अनुसूचित जाति के भी काफी मत मिले, जो कि रालोद की जीत में निर्णायक साबित हुए ।
विज्ञापन
हसन और हुकुम परिवारों में फिर से चुनाव जंग के आसार
अभी तक के हालातों में लगता है कि भाजपा इस बार फिर पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को ही चुनाव लड़ाएगी। ऐसे में एक बार फिर से हसन परिवार और हुकुम सिंह परिवार के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती हैं। इन दोनों परिवारों के बीच पिछले तीन चुनावों में लगातार टक्कर रही, जिनमें दो बार बाजी हसन परिवार के हाथ लगी है। हालांकि कांग्रेस भी अकेले दम पर चुनाव लड़ने का दम भर रही है। पूर्व विधायक राव वारिस, हरेंद्र मलिक, पूर्व विधायक पंकज मलिक के अलावा कई अन्य दावेदार हैं।
हर बार अलग पार्टी से प्रत्याशी बना हसन परिवार
सांसद रहे हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर मई 2018 में हुई उपचुनाव में भाजपा को ये सीट गंवानी पड़ी। इन चुनावों में सपा रालोद के बीच हुए समझौते के आधार पर सपा से जुड़ी तबस्सुम बेगम को रालोद के सिंबल से चुनाव लड़वाया गया। बसपा ने भी समर्थन में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। तबस्सुम और भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह में कांटे का मुकाबला हुआ, लेकिन जाट मतों का रालोद के पक्ष में अधिक झुकाव होने से भाजपा को ये सीट गवांनी पड़ी।
चुनावी आंकड़े
लोकसभा उपचुनाव 2018 मृगांका सिंह भाजपा 4,36,564
तबस्सुम हसन विजयी रालोद 4.81182
लोकसभा चुनाव 2014
हुकुम सिंह भाजपा 5,65,909
नाहिद हसन सपा 3,29,081
कंवर हसन बसपा 160414
करतार भड़ाना रालोद 42706
लोकसभा चुनाव 2009
तबस्सुम हसन बसपा 283259
हुकुम सिंह भाजपा 260796
शाजान मसूद सपा 124802
सुरेंद्र सिंह कांग्रेस 37795
विज्ञापन
सपा-बसपा -रालोद के बीच गठबंधन के बाद इस बार कैराना लोकसभा सीट सपा के हिस्से में आई। इस सीट पर शामली की तीन और सहारनपुर जनपद की पांच विधान सभाएं लगती हैं। इनके 16 लाख मतदाताओं में करीब पांच लाख मुस्लिम मतदाता हैं। चूंकि मुस्लिम मतदाताओं में हसन परिवार की अच्छी पकड़ हैै। इसी कारण इस सीट पर हसन परिवार का दावा शुरू से ही मजबूत माना जा रहा था। हालांकि सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर पंवार कई महीनों से टिकट के लिए प्रयासरत थे, लेकिन हसन परिवार पर ही सपा ने भरोसा जताया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूर्व मंत्री गुर्जर नेता वीरेंद्र सिंह को भी इसका पता पहले ही लग चुका था और वे इन दिनों भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
विज्ञापन
बता दें कि तबस्सुम हसन इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा के सिंबल पर चुुनाव लड़ी थीं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह को करीब 22 हजार से अधिक मतों से मात दी थी। सपा प्रत्याशी शाजान मसूद तीसरे नंबर पर रहे थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने तबस्सुम के बेटे नाहिद हसन को टिकट दिया, लेकिन भाजपा की आंधी में नाहिद परास्त हुए। हुकुम सिंह ने 5.65 लाख वोट लेकर सपा के नाहिद हसन को मात दी थी। नाहिद को 3.29 लाख मत मिले थे। सवा दो लाख से अधिक के अंतर से हुकुम सिंह की जीत हुई थी। सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर मई में हुए उपचुनाव में पासा पलट गया। सपा -रालोद के बीच हुए समझौते के बाद पूर्व सांसद तबस्सुम हसन को चौधरी अजित सिंह ने रालोद में शामिल करके कैराना का टिकट दिया । सपा, बसपा और कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारे। विपक्षी पार्टियों की इस एकजुटता का नतीजा हुआ कि रालोद की तबस्सुम हसन ने भाजपा की मृगांका सिंह को हराकर भाजपा से ये सीट छीन ली। तबस्सुम हसन को 51 फीसदी मत मिले थे, जबकि मृगांका को 46 फीसदी। रालोद प्रत्याशी को जाटों के अलावा अनुसूचित जाति के भी काफी मत मिले, जो कि रालोद की जीत में निर्णायक साबित हुए ।
विज्ञापन
हसन और हुकुम परिवारों में फिर से चुनाव जंग के आसार
अभी तक के हालातों में लगता है कि भाजपा इस बार फिर पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को ही चुनाव लड़ाएगी। ऐसे में एक बार फिर से हसन परिवार और हुकुम सिंह परिवार के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती हैं। इन दोनों परिवारों के बीच पिछले तीन चुनावों में लगातार टक्कर रही, जिनमें दो बार बाजी हसन परिवार के हाथ लगी है। हालांकि कांग्रेस भी अकेले दम पर चुनाव लड़ने का दम भर रही है। पूर्व विधायक राव वारिस, हरेंद्र मलिक, पूर्व विधायक पंकज मलिक के अलावा कई अन्य दावेदार हैं।
हर बार अलग पार्टी से प्रत्याशी बना हसन परिवार
सांसद रहे हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर मई 2018 में हुई उपचुनाव में भाजपा को ये सीट गंवानी पड़ी। इन चुनावों में सपा रालोद के बीच हुए समझौते के आधार पर सपा से जुड़ी तबस्सुम बेगम को रालोद के सिंबल से चुनाव लड़वाया गया। बसपा ने भी समर्थन में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। तबस्सुम और भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह में कांटे का मुकाबला हुआ, लेकिन जाट मतों का रालोद के पक्ष में अधिक झुकाव होने से भाजपा को ये सीट गवांनी पड़ी।
चुनावी आंकड़े
लोकसभा उपचुनाव 2018 मृगांका सिंह भाजपा 4,36,564
तबस्सुम हसन विजयी रालोद 4.81182
लोकसभा चुनाव 2014
हुकुम सिंह भाजपा 5,65,909
नाहिद हसन सपा 3,29,081
कंवर हसन बसपा 160414
करतार भड़ाना रालोद 42706
लोकसभा चुनाव 2009
तबस्सुम हसन बसपा 283259
हुकुम सिंह भाजपा 260796
शाजान मसूद सपा 124802
सुरेंद्र सिंह कांग्रेस 37795