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ट्रॉमा सेंटर के लिए बजट मिला, भूमि की चल रही तलाश
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जमीन मिली नहीं, बजट हुआ जारी
शामली। जिले में ट्रॉमा सेंटर के लिए प्रशासन अभी तक जमीन चिह्नित नहीं कर सका, जबकि शासन से बजट स्वीकृत करा लिया। ट्रामा सेंटर बनना था शामली जिला अस्पताल के नजदीक, लेकिन प्रशासन ने थानाभवन की भूमि का प्रस्ताव भेज दिया। जिसे शासन ने खारिज कर दिया।
शामली में जिला मुख्यालय से पानीपत-खटीमा, दिल्ली-यमुनोत्री और मेरठ-करनाल हाईवे गुजरते हैं। इसके अलावा अन्य सड़कें हैं। जिले में अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें लोग गंभीर घायल होते हैं। जिले में अभी तक ट्रॉमा सेंटर न होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर समुचित उपचार न मिलने की वजह से जान खतरे में पड़ी रहती है। गंभीर घायलों को हायर सेंटर मुजफ्फरनगर या मेरठ रेफर किया जाता है, जिसमें कभी-कभी बीच रास्ते में ही घायल की मौत हो जाती है।
पिछले साल शासन ने घायलों को जनपद स्तर पर उपचार दिलाने के लिए ट्रॉमा सेंटर बनाने को मंजूरी दी थी। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भूमि चिह्नित करने का निर्देश दिया था। लेकिन अभी तक भूमि चिह्नित नहीं हो सकी। जबकि स्वास्थ्य विभाग ने छह माह पहले ही ट्रॉमा सेंटर निर्माण के लिए 1.20 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत करा लिया। यहीं नहीं जिला अस्पताल के निकट की बजाय थानाभवन में करीब दो हजार वर्ग मीटर भूमि का प्रस्ताव भेज दिया। जिसे शासन से निरस्त कर दिया और जिला अस्पताल के पास ही ट्रामा सेंटर के लिए भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों की इस लापरवाही से लोगों को ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव ही निरस्त होने की आशंका सता रही है। जल्द ही भूमि चिह्नित नहीं हुई तो यह प्रोजेक्ट ही लटक सकता है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय अग्रवाल का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर के लिए शासन से बजट मिला है, लेकिन थानाभवन के निकट चिन्हित की गई भूमि को शासन ने खारिज कर दिया। शासन ने जिला अस्पताल के निकट ट्रॉमा सेंटर निर्माण करने के लिए कहा है। ट्रॉमा सेंटर के लिए भूमि की तलाश की जा रही है।
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शामली। जिले में ट्रॉमा सेंटर के लिए प्रशासन अभी तक जमीन चिह्नित नहीं कर सका, जबकि शासन से बजट स्वीकृत करा लिया। ट्रामा सेंटर बनना था शामली जिला अस्पताल के नजदीक, लेकिन प्रशासन ने थानाभवन की भूमि का प्रस्ताव भेज दिया। जिसे शासन ने खारिज कर दिया।
शामली में जिला मुख्यालय से पानीपत-खटीमा, दिल्ली-यमुनोत्री और मेरठ-करनाल हाईवे गुजरते हैं। इसके अलावा अन्य सड़कें हैं। जिले में अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें लोग गंभीर घायल होते हैं। जिले में अभी तक ट्रॉमा सेंटर न होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर समुचित उपचार न मिलने की वजह से जान खतरे में पड़ी रहती है। गंभीर घायलों को हायर सेंटर मुजफ्फरनगर या मेरठ रेफर किया जाता है, जिसमें कभी-कभी बीच रास्ते में ही घायल की मौत हो जाती है।
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पिछले साल शासन ने घायलों को जनपद स्तर पर उपचार दिलाने के लिए ट्रॉमा सेंटर बनाने को मंजूरी दी थी। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भूमि चिह्नित करने का निर्देश दिया था। लेकिन अभी तक भूमि चिह्नित नहीं हो सकी। जबकि स्वास्थ्य विभाग ने छह माह पहले ही ट्रॉमा सेंटर निर्माण के लिए 1.20 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत करा लिया। यहीं नहीं जिला अस्पताल के निकट की बजाय थानाभवन में करीब दो हजार वर्ग मीटर भूमि का प्रस्ताव भेज दिया। जिसे शासन से निरस्त कर दिया और जिला अस्पताल के पास ही ट्रामा सेंटर के लिए भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों की इस लापरवाही से लोगों को ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव ही निरस्त होने की आशंका सता रही है। जल्द ही भूमि चिह्नित नहीं हुई तो यह प्रोजेक्ट ही लटक सकता है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय अग्रवाल का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर के लिए शासन से बजट मिला है, लेकिन थानाभवन के निकट चिन्हित की गई भूमि को शासन ने खारिज कर दिया। शासन ने जिला अस्पताल के निकट ट्रॉमा सेंटर निर्माण करने के लिए कहा है। ट्रॉमा सेंटर के लिए भूमि की तलाश की जा रही है।