{"_id":"625c4b1b81d8b663866b2c6b","slug":"lack-of-budget-did-not-come-to-play-and-study-shamli-news-mrt584925194","type":"story","status":"publish","title_hn":"बजट का अभाव, नहीं आया खेलने और पढ़ाई का सामान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बजट का अभाव, नहीं आया खेलने और पढ़ाई का सामान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली। आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्ले स्कूलों की तरह खेल-खेल में बच्चों की पढ़ाई अभी शुरू नहीं हो सकी है। इसकी वजह यह है कि शासन की तरफ से अभी बजट नहीं मिला है। बजट न मिलने से आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के खेलने और पढ़ने का सामान उपलब्ध नहीं हो पाया है, जबकि शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो चुका है।
नई शिक्षा नीति के तहत सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्ले स्कूलों की तर्ज पर बच्चों को पढ़ने व लिखना सिखाने की योजना शुरू की है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं केे प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। जिले के परिषदीय विद्यालयों में करीब 255 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। सरकार की योजना है कि बच्चों को खेल-खेल में पढ़ना लिखना सिखाया जाए। इसके बाद जब उन्हें कक्षा एक में प्रवेश मिले, तब तक उनका बौद्धिक विकास और पढ़ने लिखने की समझ हो सकेगी।
बच्चों को आकर्षित करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को सजाकर खूबसूरत बनाया जाना है। आंगनबाड़ी केंद्रों को शासन की तरफ से प्री-स्कूल किट बांटी जाएगी। इसमें खिलौने के साथ ही खेल-खेल में शिक्षा प्रदान करने वाले उपकरण भी शामिल होंगे। बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चार्ट, टेबल, वॉल पेंटिंग पर हिंदी और अंग्रेजी की वर्णमाला और गिनती का ज्ञान कराएंगे।
विज्ञापन
इसके अलावा बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की गतिविधि का कैलेंडर और एक्टिविटी बुक आदि भी वितरित की जानी है। कुल मिलाकर छोटे बच्चों को अच्छे वातावरण में पढ़ने और खेलने की सुविधाएं उपलब्ध कराने का सरकार का प्रयास है, लेकिन अभी तक आंगनबाड़ी केेंद्रों को शासन की तरफ से बजट न मिलने की वजह से सरकार की यह योजना अभी परवान नहीं चढ़ पाई है।
बेसिक शिक्षा के सामुदायिक सहभागिता के जिला समन्वयक अमित कुमार का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पढ़ने और खेल के सामान के लिए बजट नहीं मिला है। जैसे ही बजट प्राप्त होगा तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पढ़ने और खेलने की समुचित व्यवस्था कराई जाएगी।
विज्ञापन
नई शिक्षा नीति के तहत सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्ले स्कूलों की तर्ज पर बच्चों को पढ़ने व लिखना सिखाने की योजना शुरू की है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं केे प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। जिले के परिषदीय विद्यालयों में करीब 255 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। सरकार की योजना है कि बच्चों को खेल-खेल में पढ़ना लिखना सिखाया जाए। इसके बाद जब उन्हें कक्षा एक में प्रवेश मिले, तब तक उनका बौद्धिक विकास और पढ़ने लिखने की समझ हो सकेगी।
विज्ञापन
बच्चों को आकर्षित करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को सजाकर खूबसूरत बनाया जाना है। आंगनबाड़ी केंद्रों को शासन की तरफ से प्री-स्कूल किट बांटी जाएगी। इसमें खिलौने के साथ ही खेल-खेल में शिक्षा प्रदान करने वाले उपकरण भी शामिल होंगे। बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चार्ट, टेबल, वॉल पेंटिंग पर हिंदी और अंग्रेजी की वर्णमाला और गिनती का ज्ञान कराएंगे।
विज्ञापन
इसके अलावा बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की गतिविधि का कैलेंडर और एक्टिविटी बुक आदि भी वितरित की जानी है। कुल मिलाकर छोटे बच्चों को अच्छे वातावरण में पढ़ने और खेलने की सुविधाएं उपलब्ध कराने का सरकार का प्रयास है, लेकिन अभी तक आंगनबाड़ी केेंद्रों को शासन की तरफ से बजट न मिलने की वजह से सरकार की यह योजना अभी परवान नहीं चढ़ पाई है।
बेसिक शिक्षा के सामुदायिक सहभागिता के जिला समन्वयक अमित कुमार का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पढ़ने और खेल के सामान के लिए बजट नहीं मिला है। जैसे ही बजट प्राप्त होगा तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पढ़ने और खेलने की समुचित व्यवस्था कराई जाएगी।