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Shamli News: संसद में गूंजा कैराना के शायर मुजफ्फर रज्मी का शेर

Sat, 02 Aug 2025 12:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sat, 02 Aug 2025 12:02 AM IST
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Kairana poet Muzaffar Razmi's sher echoed in the parliament
कैराना के मशहूर शायर मुजफ्फर रज्मी-फाइल फोटो-परिजन
कैराना। कैराना के मशहूर शायर रहे मुजफ्फर रज्मी का शेर देश की संसद में गूंजा। 29 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा , ये जब्र भी देखा है तारीख की नजरों ने, लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई।
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पीएम मोदी ने इस शेर के जरिए इशारा किया कि आजादी के बाद लिए गए गलत फैसलों की सजा आज देश भुगत रहा है। मुजफ्फर रज्मी का जन्म 5 जून 1935 को कैराना में हुआ था। उनका यह शेर पहली बार 1974 में ऑल इंडिया रेडियो पर सुनाया गया, जिसके बाद देशभर में उन्हें पहचान मिली। धीरे-धीरे यह शेर देश और विदेश में मशहूर हो गया। 1996 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे अपनी कविता में शामिल किया। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस शेर से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने 2004 और 2011 में रज्मी को प्रधानमंत्री कार्यालय बुलाकर सम्मानित किया था।
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19 सितंबर 2012 को मुजफ्फर रज्मी का निधन हो गया। विडंबना यह है कि इतना बड़ा नाम छोड़ जाने वाले इस शायर का परिवार आज भी कैराना के मोहल्ला बेगमपुरा में किराए के मकान में जीवनयापन कर रहा है।
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