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Shamli News: 11 अगस्त को होगा जलाभिषेक, श्रद्धालुओं ने तैयारी की शुरू
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊन। सावन का महीना आते ही शिवभक्तों में भोलेनाथ को जल चढ़ाने की आस्था अपने चरम पर पहुंच गई है। 11 अगस्त को होने वाले जलाभिषेक के लिए क्षेत्र के शिवभक्तों ने तैयारियां एक माह पहले से ही शुरू कर दी हैं। आस्था, तप और समर्पण का प्रतीक मानी जाने वाली कांवड़ यात्रा के लिए युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
ब्लॉक क्षेत्र के गांव-गांव से शिवभक्त कंधों पर जल से भरे कलश वाली भारी कांवड़ उठाकर अभ्यास कर रहे हैं। ऊन-चौसाना मार्ग पर रोजाना सुबह और शाम बोल बम, बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों के साथ शिवभक्तों का जत्था कांवड़ लेकर पैदल चलता नजर आ रहा है।
कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहे गांव हरसाना के प्रिंस, राजीव ने बताया कि लंबी दूरी और भारी वजन के लिए अभ्यास जरूरी है। वह अब दूसरी बार 81 लीटर की कलश कांवड़ लेकर जाएंगे। इससे पहले भी वह 81 लीटर की कलश कांवड़ ला चुके हैं। उनके साथ पहली बार अक्षय 51 लीटर, कुलदीप 41 लीटर, अंकुश 31 लीटर और वंश 41 लीटर की कलश कांवड़ लेकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे।
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प्रिंस ने बताया कि इतनी भारी कांवड़ को कई दिन और कई किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर चलना आसान नहीं होता। कंधों और पैरों में छाले पड़ जाते हैं। इसलिए वे रोजाना सुबह-शाम 5 से 6 किलोमीटर तक कांवड़ लेकर अभ्यास करते हैं। इससे शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है और यात्रा के दिन दिक्कत नहीं होती।
वंश ने बताया कि उनकी टोली 20 जुलाई को गांव हरसाना से ई-रिक्शा द्वारा हरिद्वार के लिए रवाना होगी। 25 जुलाई को हरिद्वार से पवित्र गंगाजल उठाकर वे पैदल यात्रा शुरू करेंगे। इस दौरान वे प्रतिदिन 8 से 9 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे।
यात्रा करते हुए 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर वे अपने गांव हरसाना के प्राचीन शिव मंदिर में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे।
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ऊन। सावन का महीना आते ही शिवभक्तों में भोलेनाथ को जल चढ़ाने की आस्था अपने चरम पर पहुंच गई है। 11 अगस्त को होने वाले जलाभिषेक के लिए क्षेत्र के शिवभक्तों ने तैयारियां एक माह पहले से ही शुरू कर दी हैं। आस्था, तप और समर्पण का प्रतीक मानी जाने वाली कांवड़ यात्रा के लिए युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
ब्लॉक क्षेत्र के गांव-गांव से शिवभक्त कंधों पर जल से भरे कलश वाली भारी कांवड़ उठाकर अभ्यास कर रहे हैं। ऊन-चौसाना मार्ग पर रोजाना सुबह और शाम बोल बम, बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों के साथ शिवभक्तों का जत्था कांवड़ लेकर पैदल चलता नजर आ रहा है।
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कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहे गांव हरसाना के प्रिंस, राजीव ने बताया कि लंबी दूरी और भारी वजन के लिए अभ्यास जरूरी है। वह अब दूसरी बार 81 लीटर की कलश कांवड़ लेकर जाएंगे। इससे पहले भी वह 81 लीटर की कलश कांवड़ ला चुके हैं। उनके साथ पहली बार अक्षय 51 लीटर, कुलदीप 41 लीटर, अंकुश 31 लीटर और वंश 41 लीटर की कलश कांवड़ लेकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे।
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प्रिंस ने बताया कि इतनी भारी कांवड़ को कई दिन और कई किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर चलना आसान नहीं होता। कंधों और पैरों में छाले पड़ जाते हैं। इसलिए वे रोजाना सुबह-शाम 5 से 6 किलोमीटर तक कांवड़ लेकर अभ्यास करते हैं। इससे शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है और यात्रा के दिन दिक्कत नहीं होती।
वंश ने बताया कि उनकी टोली 20 जुलाई को गांव हरसाना से ई-रिक्शा द्वारा हरिद्वार के लिए रवाना होगी। 25 जुलाई को हरिद्वार से पवित्र गंगाजल उठाकर वे पैदल यात्रा शुरू करेंगे। इस दौरान वे प्रतिदिन 8 से 9 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे।
यात्रा करते हुए 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर वे अपने गांव हरसाना के प्राचीन शिव मंदिर में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे।