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कई विकारों से बचाता है जैन धर्म
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शामली। महावीर जयंती के उपलक्ष्य में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत काशी विद्यापीठ बनारस के तत्वावधान में महावीर की आज के समय में प्रासंगिकता विषय पर राष्ट्रीय संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता स्मार्ट गर्ल कार्यशाला की प्रशिक्षिका व समाजसेवी डॉ. रितु जैन ने भगवान महावीर के सिद्धांत अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचारी, अनेकांतवाद, स्यादवाद आदि पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि जैन सिर्फ एक धर्म ही नहीं बल्कि जीवन शैली है। यह एक संस्कृति है, इसकी उत्पत्ति अनादि काल से हैं। जैन धर्म जीवन का एक मूलाधार है। जो हमें बहुत सारे विकारों और पापों से बचाता है।
अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. विश्वनाथ शर्मा ने कहा कि मुझे दूसरा जन्म मिलता है, तो मैं चाहूंगा कि जैन परिवार में जन्म लूं। नालंदा विश्वविद्यालय से डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा कि जैन साधुओं का आचरण और व्यवहार बहुत ही प्रशंसनीय व अनुकरणीय है। डॉ. बीएन शर्मा ने कहा कि हमें महावीर भगवान के सिद्धांतों को पढ़ना ही नहीं चाहिए, बल्कि अपने जीवन में उन्हें धारण भी करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बाला लखेंद्र कार्यक्रम समन्वयक काशी विद्यापीठ ने किया कार्यक्रम में डॉ. अन्नपूर्णा दीक्षित, मोहित जैन, डॉ. भूपेंद्र कुमार, सुनील जैन, शशिकांत झा, अंजली सिंह, प्रतिभा चौहान, मनीष, सृष्टि, अदिति, नेहा, बानो आदि ने सहभागिता की।
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मुख्य वक्ता स्मार्ट गर्ल कार्यशाला की प्रशिक्षिका व समाजसेवी डॉ. रितु जैन ने भगवान महावीर के सिद्धांत अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचारी, अनेकांतवाद, स्यादवाद आदि पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि जैन सिर्फ एक धर्म ही नहीं बल्कि जीवन शैली है। यह एक संस्कृति है, इसकी उत्पत्ति अनादि काल से हैं। जैन धर्म जीवन का एक मूलाधार है। जो हमें बहुत सारे विकारों और पापों से बचाता है।
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अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. विश्वनाथ शर्मा ने कहा कि मुझे दूसरा जन्म मिलता है, तो मैं चाहूंगा कि जैन परिवार में जन्म लूं। नालंदा विश्वविद्यालय से डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा कि जैन साधुओं का आचरण और व्यवहार बहुत ही प्रशंसनीय व अनुकरणीय है। डॉ. बीएन शर्मा ने कहा कि हमें महावीर भगवान के सिद्धांतों को पढ़ना ही नहीं चाहिए, बल्कि अपने जीवन में उन्हें धारण भी करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बाला लखेंद्र कार्यक्रम समन्वयक काशी विद्यापीठ ने किया कार्यक्रम में डॉ. अन्नपूर्णा दीक्षित, मोहित जैन, डॉ. भूपेंद्र कुमार, सुनील जैन, शशिकांत झा, अंजली सिंह, प्रतिभा चौहान, मनीष, सृष्टि, अदिति, नेहा, बानो आदि ने सहभागिता की।
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