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पर्यावरण संरक्षण के लिए 38 वर्षों से जंग लड़ रहे ईश्वर
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डॉ उमरशेफ
- फोटो : SHAMLI
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पर्यावरण संरक्षण के लिए 38 वर्षों से जंग लड़ रहे ईश्वरपाल
शामली। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद खंद्रावली निवासी ईश्वरपाल चौहान पिछले 38 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के लिए जंग लड़ रहे हैं। इसके लिए वह वृक्ष मित्रों की फौज तैयार कर रहे हैं। स्कूल-कॉलेज, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, चौपाल समेत तमाम सार्वजनिक स्थलों पर पौधे लगाकर देखभाल करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
युवा पीढ़ी को पौधों का महत्व समझाते हुए उनकी देखभाल के लिए प्रेरित करते हैं। ईश्वरपाल चौहान 1965 में सेना की सिग्नल कोर में वायरलैस आपरेटर के पद पर भर्ती हुए थे। 1971 में भारत-पाक युद्ध में हिस्सा लिया था। 1983 में नायक पद से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का जिम्मा उठाया। अब तक वह आसपास के जनपदों के साथ ही दूसरे प्रदेशों में भी पांच हजार से ज्यादा वृक्ष मित्र बना चुके हैं।
पर्यावरण के प्रहरी बने डॉ. उमर सेफ
शामली। शहर के मोहल्ला तैमूर शाह निवासी डॉ. उमर सेफ ने कई वर्षों से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने जल, वायु और जंतु के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। जिसके लिए कई स्तर पर सम्मानित किया गया है। उनके कुछ कार्यों को राज्य सरकार और एनजीटी ने भी मॉडल माना है। वह सहारनपुर नगर निगम के साथ मिलकर स्मार्ट सोलर सिस्टम बनाया है। जो सबसे खराब हवा की गुणवत्ता स्तर 10 तक ले आता है। इस सिस्टम से लोगों के घरों तक पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ हवा पहुंचाई जाएगी। इसके ट्रायल पूरे हो गए हैं।
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डॉ. उमर सेफ ने खेड़ीकरमू गांव में कृष्णा नदी के माइक्रो वाटर शेड को नीति आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक पुर्नजीवित किया। जिसे प्रदेश सरकार ने मॉडल घोषित किया है। प्रदेश की अन्य ग्राम सभाओं को इस मॉडल को अपनाने के निर्देश दिए हैं। यह अमेरिकी टेक्नोलॉजी से करीब 100 गुना सस्ती है। वहीं उन्होंने नाले के पानी को पुर्नजीवित करने का सोलर स्मार्ट ऑक्सीजेनेटेड सिस्टम बनाया है। गाजियाबाद नगर निगम के साथ मिलकर उन्होंने यह प्रोजेक्ट तैयार किया। इस प्रोजेक्ट को एनजीटी ने सभी नगर निकायों के लिए अनुशंसित किया है। खेड़ीकरमू में डॉ. उमर सेफ ने बटरफ्लाई पार्क का निर्माण कराया है। जहां लाखों तितलियों का पुर्नवास किया गया है। इस पार्क में अन्य कीटों को भी संरक्षित किया जा रहा है।
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शामली। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद खंद्रावली निवासी ईश्वरपाल चौहान पिछले 38 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के लिए जंग लड़ रहे हैं। इसके लिए वह वृक्ष मित्रों की फौज तैयार कर रहे हैं। स्कूल-कॉलेज, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, चौपाल समेत तमाम सार्वजनिक स्थलों पर पौधे लगाकर देखभाल करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
युवा पीढ़ी को पौधों का महत्व समझाते हुए उनकी देखभाल के लिए प्रेरित करते हैं। ईश्वरपाल चौहान 1965 में सेना की सिग्नल कोर में वायरलैस आपरेटर के पद पर भर्ती हुए थे। 1971 में भारत-पाक युद्ध में हिस्सा लिया था। 1983 में नायक पद से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का जिम्मा उठाया। अब तक वह आसपास के जनपदों के साथ ही दूसरे प्रदेशों में भी पांच हजार से ज्यादा वृक्ष मित्र बना चुके हैं।
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पर्यावरण के प्रहरी बने डॉ. उमर सेफ
शामली। शहर के मोहल्ला तैमूर शाह निवासी डॉ. उमर सेफ ने कई वर्षों से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने जल, वायु और जंतु के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। जिसके लिए कई स्तर पर सम्मानित किया गया है। उनके कुछ कार्यों को राज्य सरकार और एनजीटी ने भी मॉडल माना है। वह सहारनपुर नगर निगम के साथ मिलकर स्मार्ट सोलर सिस्टम बनाया है। जो सबसे खराब हवा की गुणवत्ता स्तर 10 तक ले आता है। इस सिस्टम से लोगों के घरों तक पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ हवा पहुंचाई जाएगी। इसके ट्रायल पूरे हो गए हैं।
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डॉ. उमर सेफ ने खेड़ीकरमू गांव में कृष्णा नदी के माइक्रो वाटर शेड को नीति आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक पुर्नजीवित किया। जिसे प्रदेश सरकार ने मॉडल घोषित किया है। प्रदेश की अन्य ग्राम सभाओं को इस मॉडल को अपनाने के निर्देश दिए हैं। यह अमेरिकी टेक्नोलॉजी से करीब 100 गुना सस्ती है। वहीं उन्होंने नाले के पानी को पुर्नजीवित करने का सोलर स्मार्ट ऑक्सीजेनेटेड सिस्टम बनाया है। गाजियाबाद नगर निगम के साथ मिलकर उन्होंने यह प्रोजेक्ट तैयार किया। इस प्रोजेक्ट को एनजीटी ने सभी नगर निकायों के लिए अनुशंसित किया है। खेड़ीकरमू में डॉ. उमर सेफ ने बटरफ्लाई पार्क का निर्माण कराया है। जहां लाखों तितलियों का पुर्नवास किया गया है। इस पार्क में अन्य कीटों को भी संरक्षित किया जा रहा है।

ईशवर पाल चौहान- फोटो : SHAMLI