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‘नए प्रयोग करने से होते हैं आविष्कार’
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शामली सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलिज में प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के चित्र पर पुष्प ?
- फोटो : SHAMLI
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‘नए प्रयोग करने से होते हैं आविष्कार’
शामली। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज शामली में भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु की जयंती मनाई गई। सोमवार को कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और जगदीश चंद्र बसु के चित्र के सम्मुख पुष्प अर्पित करके किया गया।
मुख्य वक्ता आचार्य अशोक सोम ने छात्रों को बताया कि जगदीश चंद्र बसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। वे पहले वैज्ञानिक थे, जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। उन्होंने वनस्पति विज्ञान में कैस्कोग्राफ नामक यंत्र का आविष्कार किया, जिससे पौधों की क्रियाओं का ज्ञान होता है। उन्हें रेडियो विज्ञान का पिता भी माना जाता है। कार्यक्रम अध्यक्ष उप प्रधानाचार्य मलूक चंद ने सभी छात्रों को जीवन में वैज्ञानिक सोच का विकास करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि विज्ञान में नए प्रयोग एवं नए चिंतन करने से आविष्कार होते हैं, जो सार्वजनिक जीवन को सुलभ बनाने के साथ-साथ जीवन उपयोगी भूमिका निभाते हैं। इसलिए आज वैज्ञानिक युग में हम सबको मिलकर नए आविष्कार करने चाहिए। इस अवसर पर आचार्य मोहर सिंह, पवन कुमार, प्रीतम सिंह, विजय कुमार, सचिन कुमार, नीटू कश्यप, ब्रिजेश कुमार, परितोष कुमार, मधुबन शर्मा, पुष्पेंद्र कुमार, अंकुर कुमार, योगेंद्र सैनी, नितिन कुमार आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन आचार्य सोमदत्त आर्य ने किया।
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शामली। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज शामली में भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु की जयंती मनाई गई। सोमवार को कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और जगदीश चंद्र बसु के चित्र के सम्मुख पुष्प अर्पित करके किया गया।
मुख्य वक्ता आचार्य अशोक सोम ने छात्रों को बताया कि जगदीश चंद्र बसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। वे पहले वैज्ञानिक थे, जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। उन्होंने वनस्पति विज्ञान में कैस्कोग्राफ नामक यंत्र का आविष्कार किया, जिससे पौधों की क्रियाओं का ज्ञान होता है। उन्हें रेडियो विज्ञान का पिता भी माना जाता है। कार्यक्रम अध्यक्ष उप प्रधानाचार्य मलूक चंद ने सभी छात्रों को जीवन में वैज्ञानिक सोच का विकास करने पर बल दिया।
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उन्होंने कहा कि विज्ञान में नए प्रयोग एवं नए चिंतन करने से आविष्कार होते हैं, जो सार्वजनिक जीवन को सुलभ बनाने के साथ-साथ जीवन उपयोगी भूमिका निभाते हैं। इसलिए आज वैज्ञानिक युग में हम सबको मिलकर नए आविष्कार करने चाहिए। इस अवसर पर आचार्य मोहर सिंह, पवन कुमार, प्रीतम सिंह, विजय कुमार, सचिन कुमार, नीटू कश्यप, ब्रिजेश कुमार, परितोष कुमार, मधुबन शर्मा, पुष्पेंद्र कुमार, अंकुर कुमार, योगेंद्र सैनी, नितिन कुमार आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन आचार्य सोमदत्त आर्य ने किया।
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