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Shamli News: पाकिस्तान जेल में रिश्तेदारों से नहीं मिल सकते भारतीय कैदी

Sun, 20 Aug 2023 11:54 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sun, 20 Aug 2023 11:54 PM IST
सार

- रिश्तेदार मिलने के लिए पहुंचे तो हमेशा के लिए कर दिए जाते हैं ब्लैक लिस्टेड
- आईएसआई एजेंट कलीम के पिता ने पाकिस्तान जेल में हुए उत्पीड़न की कहानी को किया बयां

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Indian prisoners cannot meet relatives in Pakistan jail
कलीम का पिता नफीस पाकिस्तान जेल की आपबीती बताते हुए।

विस्तार

पाकिस्तान में भारत के लोगों को घृणा की दृष्टि से देखा जाता है। जब तक भारतीय पाकिस्तान की जेल में बंद रहेंगे, उनसे किसी भी की मिलाई यानी मुलाकात नहीं कराई जाती है। यदि कोई मुलाकात करने का प्रयास भी करता है, तो उसे सदा के लिए ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाता है। यह दावा 11 अगस्त को पाकिस्तान की जेल से छूटे आईएसआई एजेंट कलीम के पिता नफीस और मां आमना ने किया है। तीनों पाकिस्तान की कोटला जेल में बंद थे।

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नफीस ने बताया कि वह तीनों एक माह के वीजा पर पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद रिश्तेदारी में शादी समारोह में शामिल होने के लिए गए थे। लौटते समय कस्टम अधिकारियों से अधिक सामान लाने को लेकर कलीम की नोकझोंक हो गई थी, जिस पर उन्हें दो माह की सजा सुनाते हुए कोटला जेल में रखा गया।
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नफीस ने बताया कि जेल में उनसे दुश्मनों जैसा व्यवहार किया जाता था। जेल प्रशासन भी सही से बात नहीं करता था। कई बार मिलाई के लिए जेल में रिश्तेदारों से मिलने की गुहार लगाई, मगर हर बार जेल के अधिकारी मना कर देते थे।

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बाद में पता चला कि भारतीय कैदियों की पाकिस्तान की जेल में मिलाई नहीं की जाती है। यदि कोई मिलाई करने का प्रयास भी करता है तो उसके परिवार को उम्र भर के लिए ब्लैक लिस्टेड की सूची में डाल दिया जाता है।

ब्लैक लिस्टेड का मतलब यह होता है कि यदि भारतीय से मिलने का प्रयास करने वाले इस परिवार का पाकिस्तान का कोई सदस्य जेल में किसी आरोप में बंद होता है, तो उन्हें मिलने की मनाही होती है। जेल में बंद कैदी भी उन्हें बेवकूफ इंडियन कहकर चिढ़ाते थे। यही कारण था कि उनसे कोई मिलना पसंद नहीं करता था। जिसके कारण वह जेल में चुप रहते थे, किसी से बात नहीं करते थे।

अच्छे लोगों की भी कमी नहीं
नफीस और आमना ने बताया कि पाकिस्तान में कुछ अच्छे लोग भी हैं। एक ठाकुर नाम का शख्स उन्हें मिला, जिसने जेल से निकलवाने में भी मदद की और घर तक पहुंचाने का पूरा प्रयास किया। उसे वह लोग नहीं जानते थे। जेल में वह किसी से मिलने के लिए पहुंचा था। इसी दौरान उन्होंने ठाकुर को अपनी पीड़ा सुनाई थी। ठाकुर ने किसी तरह की टेंशन नहीं लेने की बात कहीं थी।

पाकिस्तान की जेलों में 50 से कैदी हैं भारतीय
सूत्रों के अनुसार, यूपी और अन्य स्थानों के 50 से अधिक लोग पाकिस्तान की कोटला, मुजफ्फराबाद और अन्य स्थानों की जेलों में बंद है। जो सामान अधिक लाने से लेकर अन्य आरोपों में सजा काट रहे हैं। कहा जाता है कि सजा पूरी होने के बाद भी भारत के लोगों को एक से लेकर डेढ़ साल अधिक समय तक जेलों में रखा जाता है।

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