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Shamli News: होम्योपैथिक की तरफ मरीजों का बढ़ रहा विश्वास

Mon, 10 Apr 2023 12:16 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Apr 2023 12:16 AM IST
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Increasing trust of patients towards homeopathic
विश्व होम्योपैथिक दिवसः
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- बीमारी को ठीक करने के लिए कराना पड़ता है लंबा उपचार, खान-पान का परहेज भी करना जरूरी
- ज्यादा समय दवाई व परहेज करने से बचना चाहता है मरीज, इसलिए अंग्रेजी दवाई खाना करते है पसंद

संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। होम्योपैथिक की दवाई का यदि मनुष्य जीवन में ठीक से प्रयोग करें तो उसकी बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। लेकिन होम्योपैथिक में सिर्फ कई माह तक दवाई खाना, खान-पान का परहेज करना मरीजों को ज्यादा पसंद नहीं होता है। इसलिए वह अंग्रेजी दवाइयों को खाना पसंद करता है। अंग्रेजी दवाई खाने से वह जल्दी ठीक हो जाता है और फिर अपनी पसंद का खाना-पीना खाता है। पिछले तीन साल से होम्योपैथिक के प्रति लोगों में विश्वास जरूर बढ़ा है।
होम्योपैथिक का उपचार सदियों से चलता आ रहा है और डॉक्टर क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन ने 1796 में इसकी खोज की थी। तभी से होम्योपैथिक दवाई से इलाज किया जाता है, लेकिन आज भी लोगों को होम्योपैथिक दवाई पर पूरा विश्वास नहीं है, क्योंकि यह दवाई जल्दी से मरीज को ठीक नहीं करती है। होम्योपैथिक के स्थान पर अंग्रेजी दवाई खाना व्यक्ति पसंद करता है। लेकिन पिछले कई वर्षाें से लोगों में होम्योपैथिक के प्रति विश्वास तो बढ़ा है। आज के समय में करीब 25 प्रतिशत मरीज होम्योपैथिक दवाई को खाना पसंद करते है, क्योंकि यह बीमारी को जड़ से खत्म करता है।
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डॉक्टर बताते है कि होम्योपैथिक दवाई कई माह तक लगातार खानी पड़ती है और इसके लिए उनको खट्टा, ठंडा, खटाई, तेल, रिफाइंड, आचार काे छोड़ना पड़ता है, लेकिन मरीज चाहता है कि वह इन सभी को छोड़े बिना ठीक हो जाए। लेकिन होम्योपैथिक में ऐसा नहीं हो सकता। यदि वह एक बार दवाई को बीच में बंद कर देता है, तो उसको फिर से पूरा कोर्स करना पड़ता है। जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डाॅ. विधु शेखर मलिक ने बताया कि होम्योपैथिक में कैंसर, टीबी, शुगर, चर्म रोग, बुखार, मनोरोग, लीवर, पेट की बीमारियां, हड्डियों एवं जोड़ों की बीमारियों को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है।
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लोगों को होम्योपैथिक के प्रति अपना विश्वास करना होगा। पिछले पांच वर्षों में देखा जाए तो काफी संख्या में मरीज दवाई लेने आते है। पहले तो मात्र बीस से तीस मरीज ही दवाई लेने आते थे, लेकिन आज के समय में यह आंकडा सौ के पार पहुंच चुका है। बताया कि होम्योपैथिक एक सुरक्षित, सुलभ एवं सस्ती चिकित्सा पद्धति है। इसकी मीठी गोलियां बच्चे भी खुशी-खुशी खा लेते हैं। यह इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि शरीर में खुद को ठीक करने की क्षमता है और इसकी दवाई शरीर की क्षमता का उपयोग करके मरीज को पूरी तरह स्वस्थ करती है। इस दवाई के खाने से शरीर को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता है।

एक चिकित्सक पर तीन जिलों का चार्ज
जनपद में होम्योपैथिक अस्पताल सिर्फ बनत कस्बे में है और वह भी आंगनबाड़ी के कक्ष में संचालित है। वहां एक फार्मासिस्ट की तैनाती है। जबकि डॉ. विधु शेखर मलिक पर मंडल के तीनों जिलों का चार्ज है। एक डॉक्टर के सहारे ही सरकार लोगों को होम्योपैथिक के प्रति विश्वास लाने की बात करती है, लेकिन यहां उनके पास बैठने की उपयुक्त जगह नहीं है। नांगल गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही बनत का फार्मासिस्ट बैठकर तीन दिन दवाई देता है। शासन से अभी तक जनपद में पूरे स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है।
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