{"_id":"602ac8ed8ebc3ee9243f0564","slug":"increased-cost-sugarcane-price-remain-the-same-shamli-news-mrt5255560159","type":"story","status":"publish","title_hn":"बढ़ती गई लागत, गन्ना मूल्य जस का तस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बढ़ती गई लागत, गन्ना मूल्य जस का तस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बढ़ती गई लागत, गन्ना मूल्य जस का तस
शामली। लगातार तीसरे साल भी गन्ना मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई जबकि उत्पादन लागत बढ़ती गई। किसानों के मुुताबिक गन्ने की उत्पादन लागत 348.87 रुपये हो रही है, जबकि अगेती प्रजाति का मूल्य 325 और सामान्य गन्ने का 315 रुपये मिल रहा है। किसानों का कहना है कि उन्हें 23 से 33 रुपये प्रति क्विंटल तक का नुकसान हो रहा है।
गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर की ओर से भी गन्ना मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की सिफारिश की गई थी। किसानों को उम्मीद थी कि 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी होगी लेकिन मूल्य नहीं बढ़ने से किसानों को झटका लगा है। किसानों के मुताबिक डीजल, बिजली, यूरिया, पेस्टीसाइड एवं मजदूरी बढ़ी है। बुवाई से लेकर सप्लाई तक चार सालों मे 25-30 प्रतिशत तक लागत बढ़ी है, जबकि गन्ना मूल्य में केवल 2.5 प्रतिशत ही वृद्धि हुई है। शामली के बलवा गुजरान के प्रगतिशील किसान राकेश शर्मा के अनुसार इस साल पेड़ी का उत्पादन खर्च 323.55 रुपये, जबकि पौधे का उत्पादन खर्च 348.87 रुपये क्विंटल आया है। इसका औसत 348.87 रुपये क्विंटल आता है।
400 रुपये प्रति क्विंटल की थी मांग
-सरकार को गन्ना किसानों चिंता नहीं: सुधीर पंवार
सपा नेता प्रोफेसर सुधीर पंवार का कहना है कि पेराई सत्र प्रारंभ होने के 100 दिन बाद गन्ना मूल्य जस का तस रखने की घोषणा किसानों के जख्मों पर नमक लगाने जैसी है। उत्तर प्रदेश में गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) के निर्धारण का आधार गन्ने की खेती का लागत मूल्य है। सरकार ने स्वयं ही बिजली, यूरिया, डीएपी और डीजल के दाम बढ़ाए हैं, गन्ना मूल्य स्थिर रखकर सरकार ने गन्ना मूल्य तय करने की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। शुगर मिलों को पिछले साल की तुलना में 24 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त आमदनी हुई है। सरकार को गन्ना किसानों की कोई चिंता नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शामली। लगातार तीसरे साल भी गन्ना मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई जबकि उत्पादन लागत बढ़ती गई। किसानों के मुुताबिक गन्ने की उत्पादन लागत 348.87 रुपये हो रही है, जबकि अगेती प्रजाति का मूल्य 325 और सामान्य गन्ने का 315 रुपये मिल रहा है। किसानों का कहना है कि उन्हें 23 से 33 रुपये प्रति क्विंटल तक का नुकसान हो रहा है।
गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर की ओर से भी गन्ना मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की सिफारिश की गई थी। किसानों को उम्मीद थी कि 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी होगी लेकिन मूल्य नहीं बढ़ने से किसानों को झटका लगा है। किसानों के मुताबिक डीजल, बिजली, यूरिया, पेस्टीसाइड एवं मजदूरी बढ़ी है। बुवाई से लेकर सप्लाई तक चार सालों मे 25-30 प्रतिशत तक लागत बढ़ी है, जबकि गन्ना मूल्य में केवल 2.5 प्रतिशत ही वृद्धि हुई है। शामली के बलवा गुजरान के प्रगतिशील किसान राकेश शर्मा के अनुसार इस साल पेड़ी का उत्पादन खर्च 323.55 रुपये, जबकि पौधे का उत्पादन खर्च 348.87 रुपये क्विंटल आया है। इसका औसत 348.87 रुपये क्विंटल आता है।
विज्ञापन
400 रुपये प्रति क्विंटल की थी मांग
-सरकार को गन्ना किसानों चिंता नहीं: सुधीर पंवार
सपा नेता प्रोफेसर सुधीर पंवार का कहना है कि पेराई सत्र प्रारंभ होने के 100 दिन बाद गन्ना मूल्य जस का तस रखने की घोषणा किसानों के जख्मों पर नमक लगाने जैसी है। उत्तर प्रदेश में गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) के निर्धारण का आधार गन्ने की खेती का लागत मूल्य है। सरकार ने स्वयं ही बिजली, यूरिया, डीएपी और डीजल के दाम बढ़ाए हैं, गन्ना मूल्य स्थिर रखकर सरकार ने गन्ना मूल्य तय करने की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। शुगर मिलों को पिछले साल की तुलना में 24 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त आमदनी हुई है। सरकार को गन्ना किसानों की कोई चिंता नहीं है।
विज्ञापन