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Shamli News: कलयुग में घर को ही तीर्थ बनाने की जरूरत
Sun, 27 Sep 2026 01:04 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 27 Sep 2026 01:04 AM IST
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शामली में रामकथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत आयोजक
शामली। शामली में कैराना रोड स्थित जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन शनिवार को संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि कलयुग में भगवान की प्राप्ति के लिए घर-बार छोड़कर वन में रहने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने घर को ही तीर्थ बनाने की जरूरत है।
कथा में मनु-शतरूपा प्रसंग सुनाते हुए विजय कौशल जी महाराज ने बताया कि मनु और शतरूपा ने राज्य तथा सांसारिक मोह का त्याग कर भगवान की प्राप्ति के लिए घोर तपस्या की थी। भगवान श्री हरि ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि वे स्वयं उनके घर पुत्र रूप में जन्म लेंगे। यही मनु-शतरूपा आगे चलकर राजा दशरथ और माता कौशल्या बने और भगवान श्रीराम ने उनके घर पुत्र रूप में जन्म लिया।
महाराज ने बताया कि जब अधर्म का प्रभाव बढ़ गया और धरती, ऋषि-मुनि तथा देवता भगवान की शरण में पहुंचे, तब भगवान ने सूर्यवंश में मानव रूप में अवतार लेकर अधर्म का अंत करने का आश्वासन दिया।
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रामकथा के दौरान संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सांसारिक जीवन में आचरण के सूत्र समझाते हुए कहा कि शुभ कार्य तत्काल करना चाहिए, जबकि अशुभ कार्य को कल पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीर्थ में प्रवास करना चाहिए, लेकिन तीर्थ को स्थायी निवास नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि संकट के समय उचित मार्गदर्शन कर जो मनुष्य का बोझ हल्का कर दे, वही सच्चा गुरु है। गुरु जीवन को सही दिशा देने का कार्य करता है और उसके मार्गदर्शन से मनुष्य कठिन परिस्थितियों का भी सामना कर सकता है।
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कथा में मनु-शतरूपा प्रसंग सुनाते हुए विजय कौशल जी महाराज ने बताया कि मनु और शतरूपा ने राज्य तथा सांसारिक मोह का त्याग कर भगवान की प्राप्ति के लिए घोर तपस्या की थी। भगवान श्री हरि ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि वे स्वयं उनके घर पुत्र रूप में जन्म लेंगे। यही मनु-शतरूपा आगे चलकर राजा दशरथ और माता कौशल्या बने और भगवान श्रीराम ने उनके घर पुत्र रूप में जन्म लिया।
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महाराज ने बताया कि जब अधर्म का प्रभाव बढ़ गया और धरती, ऋषि-मुनि तथा देवता भगवान की शरण में पहुंचे, तब भगवान ने सूर्यवंश में मानव रूप में अवतार लेकर अधर्म का अंत करने का आश्वासन दिया।
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रामकथा के दौरान संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सांसारिक जीवन में आचरण के सूत्र समझाते हुए कहा कि शुभ कार्य तत्काल करना चाहिए, जबकि अशुभ कार्य को कल पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीर्थ में प्रवास करना चाहिए, लेकिन तीर्थ को स्थायी निवास नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि संकट के समय उचित मार्गदर्शन कर जो मनुष्य का बोझ हल्का कर दे, वही सच्चा गुरु है। गुरु जीवन को सही दिशा देने का कार्य करता है और उसके मार्गदर्शन से मनुष्य कठिन परिस्थितियों का भी सामना कर सकता है।

शामली में रामकथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत आयोजक