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अक्षय तृतीया पर जल भरे कलश दान का है महत्व
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शामली। जिले में अक्षय-तृतीया और भगवान परशुराम जयंती मंगलवार को मनाई जाएगी। अक्षय-तृतीया के दिन किए गए दान का फल अक्षय होता है। अक्षय-तृतीया के दिन व्यापार, विवाह संस्कार, मुंडन, नामकरण, वधु प्रवेश, द्विरागमन, वाहन क्रय, देवप्रतिष्ठा, व्रतोद्यापन आदि शुभ कार्य होते है। अक्षय तृतीया यानि आख्या तीज के शुभ मुहूर्त 3 मई मंगलवार को वैशाख माह शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है, जो अगले दिन 3:17 तक तक रहेगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र में रवि योग और शोभन योग रहेगा। पूरे दिन ही शुभ मुहूर्त और स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी रहेगा।
बुढ़ाना रोड श्री हनुमान ज्योतिष केंद्र के पंडित प्रभु शंकर शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया के ही दिन भगवान परशुराम, नर-नारायण व ह्यग्रीव का अवतार धरती पर हुआ था। अक्षय-तृतीया के दिन से त्रेतायुग का प्रारंभ भी हुआ था। आज के दिन श्रद्धालुओं को भगवान परशुराम, नर-नारायण व ह्यग्रीव भगवान की षोडशोपचार पूजन करना चाहिए एवं नैवेद्य में सत्तू, ककड़ी एवं बेसन की हलवे का भोग लगाना चाहिए। अक्षय-तृतीया के दिन श्रद्धालुओं को गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा एवं समुद्र स्नान करने के उपरांत यथासामर्थ्य दान अवश्य करना चाहिए।
जलपूरित कुंभ व धर्मघट दान का विशेष महत्व
अक्षय-तृतीया के दिन किसी मंदिर में जल से भरा घड़ा अवश्य दान करना चाहिए। तदुपरान्त किसी विप्र को धर्मघट अर्थात स्वर्ण, रजत या तांबे के पात्र में अन्न भरकर देना चाहिए। यदि आप ताम्रपात्र में अन्न भरकर दान कर रहे हैं, तो उसमें स्वर्ण या रजत डालकर अवश्य दान करना चाहिए। इस दिन नए आभूषण की खरीदी, नए व्यापार का आरंभ करना भी लाभदायी होता हैं। अक्षय तृतीया के दिन तीर्थ स्नान तथा पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। इस दिन यह कार्य अवश्य करें। इस दिन अविवाहित लोगों के लिए विवाह का अत्यंत शुभ मुहूर्त होता है। इस शुभ मुहूर्त में नूतन गृह प्रवेश, गृह निर्माण, दुकान अथवा प्रतिष्ठान का शुभारंभ कर सकते हैं। इस दिन नए आभूषण की खरीदी, नए व्यापार का आरंभ करना भी लाभदायी होता हैं। अक्षय तृतीया के दिन तीर्थ स्नान तथा पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। अत: इस दिन यह कार्य अवश्य करें।
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अक्षय तृतीय का शुभ मुहूर्त
मंगलवार को 3 मई के शुभ मुहर्त:
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:58 से दोपहर 12:50 तक। विजय मुहूर्त : दोपहर 02:34 से 03:26 तक। गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:41 से 07:05 तक। सायाह्न संध्या मुहूर्त : शाम 06:34 से 08:00 तक। अमृत काल मुहूर्त : रात्रि 11:44 से 01:30 तक।निशिता मुहूर्त : रात्रि 12:01 से 12:45 तक।
खरीदी का सबसे शुभ मुहूर्त : अक्षय तृतीया का दिन साल के उन साढ़े तीन मुहूर्त में से एक है जो सबसे शुभ माने जाते हैं। इस दिन पूरे दिन अधिकांश शुभ कार्य किए जा सकते हैं। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात गुड़ी पड़वा, दशहरा, अक्षय तृतीया और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा भाग। ये कुछ ऐसी तिथियां हैं, जबकि मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है। फिर भी आप चाहें तो अभिजीत या विजय मुहूर्त में खरीदी कर सकते हैं।
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बुढ़ाना रोड श्री हनुमान ज्योतिष केंद्र के पंडित प्रभु शंकर शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया के ही दिन भगवान परशुराम, नर-नारायण व ह्यग्रीव का अवतार धरती पर हुआ था। अक्षय-तृतीया के दिन से त्रेतायुग का प्रारंभ भी हुआ था। आज के दिन श्रद्धालुओं को भगवान परशुराम, नर-नारायण व ह्यग्रीव भगवान की षोडशोपचार पूजन करना चाहिए एवं नैवेद्य में सत्तू, ककड़ी एवं बेसन की हलवे का भोग लगाना चाहिए। अक्षय-तृतीया के दिन श्रद्धालुओं को गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा एवं समुद्र स्नान करने के उपरांत यथासामर्थ्य दान अवश्य करना चाहिए।
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जलपूरित कुंभ व धर्मघट दान का विशेष महत्व
अक्षय-तृतीया के दिन किसी मंदिर में जल से भरा घड़ा अवश्य दान करना चाहिए। तदुपरान्त किसी विप्र को धर्मघट अर्थात स्वर्ण, रजत या तांबे के पात्र में अन्न भरकर देना चाहिए। यदि आप ताम्रपात्र में अन्न भरकर दान कर रहे हैं, तो उसमें स्वर्ण या रजत डालकर अवश्य दान करना चाहिए। इस दिन नए आभूषण की खरीदी, नए व्यापार का आरंभ करना भी लाभदायी होता हैं। अक्षय तृतीया के दिन तीर्थ स्नान तथा पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। इस दिन यह कार्य अवश्य करें। इस दिन अविवाहित लोगों के लिए विवाह का अत्यंत शुभ मुहूर्त होता है। इस शुभ मुहूर्त में नूतन गृह प्रवेश, गृह निर्माण, दुकान अथवा प्रतिष्ठान का शुभारंभ कर सकते हैं। इस दिन नए आभूषण की खरीदी, नए व्यापार का आरंभ करना भी लाभदायी होता हैं। अक्षय तृतीया के दिन तीर्थ स्नान तथा पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। अत: इस दिन यह कार्य अवश्य करें।
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अक्षय तृतीय का शुभ मुहूर्त
मंगलवार को 3 मई के शुभ मुहर्त:
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:58 से दोपहर 12:50 तक। विजय मुहूर्त : दोपहर 02:34 से 03:26 तक। गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:41 से 07:05 तक। सायाह्न संध्या मुहूर्त : शाम 06:34 से 08:00 तक। अमृत काल मुहूर्त : रात्रि 11:44 से 01:30 तक।निशिता मुहूर्त : रात्रि 12:01 से 12:45 तक।
खरीदी का सबसे शुभ मुहूर्त : अक्षय तृतीया का दिन साल के उन साढ़े तीन मुहूर्त में से एक है जो सबसे शुभ माने जाते हैं। इस दिन पूरे दिन अधिकांश शुभ कार्य किए जा सकते हैं। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात गुड़ी पड़वा, दशहरा, अक्षय तृतीया और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा भाग। ये कुछ ऐसी तिथियां हैं, जबकि मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है। फिर भी आप चाहें तो अभिजीत या विजय मुहूर्त में खरीदी कर सकते हैं।