{"_id":"33fd2bec11d7e1b20fa70964d777f24d","slug":"holding-wheat-rations-clean-chit-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पकड़े राशन के गेहूं को क्लीन चिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पकड़े राशन के गेहूं को क्लीन चिट
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Mon, 15 Feb 2016 12:49 AM IST
विज्ञापन
कैराना। थानों और प्रशासनिक व्यवस्था में दलालों का राज कायम है। ताजा मामला गेहूं की कालाबाजारी का है। खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम के चेयरमैन ने कांधला रोड पर गेहूं से भरी गाड़ी पकड़ ली। जिसे कोतवाली पहुंचकर पूर्ति निरीक्षक ने गेहूं सरकारी न होना बताते हुए क्लीन चिट दे दी।
सुबह करीब नौ बजे खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम के चेयरमैन रियासत राणा समर्थकों के साथ कांधला रोड पर थे। जहां कांधला की ओर से आ रही पिकअप को रियासत ने रुकवा लिया। गाड़ी में 49 बोरी गेहूं की थी। गेहूं की बोरी को उल्टा कर अनाज भरा गया था। उन्होंने बोरी को खाली कराने के बाद पलटा, तो उस पर हरियाणा सरकार की खाद्य विभाग की मोहर छपी हुई थी।
चालक व दो मजदूरों को कोतवाली ले आए। पुलिस ने चालक व मजदूरों को हिरासत में लेकर पूर्ति निरीक्षक को कोतवाली में बुलवा लिया। उनके आने के बाद गाड़ी को छोड़ दिया गया। जबकि रियासत ने आरोपियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मगर पुलिस व पूर्ति विभाग ने उनके आदेशों को धता बता दिया। उधर, कोतवाली प्रभारी एमएस गिल ने बताया कि अनाज सरकारी न होकर किसान का है। पूर्ति निरीक्षक ने लिखित में दिया है। इसके बाद ही गाड़ी व अनाज को छोड़ा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुबह करीब नौ बजे खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम के चेयरमैन रियासत राणा समर्थकों के साथ कांधला रोड पर थे। जहां कांधला की ओर से आ रही पिकअप को रियासत ने रुकवा लिया। गाड़ी में 49 बोरी गेहूं की थी। गेहूं की बोरी को उल्टा कर अनाज भरा गया था। उन्होंने बोरी को खाली कराने के बाद पलटा, तो उस पर हरियाणा सरकार की खाद्य विभाग की मोहर छपी हुई थी।
विज्ञापन
चालक व दो मजदूरों को कोतवाली ले आए। पुलिस ने चालक व मजदूरों को हिरासत में लेकर पूर्ति निरीक्षक को कोतवाली में बुलवा लिया। उनके आने के बाद गाड़ी को छोड़ दिया गया। जबकि रियासत ने आरोपियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मगर पुलिस व पूर्ति विभाग ने उनके आदेशों को धता बता दिया। उधर, कोतवाली प्रभारी एमएस गिल ने बताया कि अनाज सरकारी न होकर किसान का है। पूर्ति निरीक्षक ने लिखित में दिया है। इसके बाद ही गाड़ी व अनाज को छोड़ा गया।
विज्ञापन