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Shamli News: स्वास्थ्य टीमें अधूरी... बच्चों की सेहत की जांच के नाम पर खानापूर्ति

Fri, 10 Jul 2026 01:38 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2026 01:38 AM IST
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Health teams are incomplete... a mere formality in the name of checking the health of children
- आरबीएसके की 10 टीमों में चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से स्वास्थ्य जांच प्रभावित
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- 72,984 बच्चों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 16,108 की हुई स्क्रीनिंग
- 491 बच्चे बीमार मिले, आठ नवजात जन्मजात बीमारी से पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर जन्मजात दोष, बीमारियां, कमियां और विकास में देरी आदि की पहचान कर मुफ्त उपचार दिया जाता है। जिले में आरबीएसके की दस टीमें बनाई गई हैं लेकिन सभी टीमें अधूरी होने के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्कूल हेल्थ कार्यक्रम के तहत विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की वर्ष में एक बार और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों की वर्ष में दो बार स्वास्थ्य की जांच किए जाने के शासन से निर्देश हैं। जिले में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के लिए आरबीएसके की दस टीमें हैं। मानक के अनुसार एक टीम में एक पुरुष चिकित्सक व एक महिला चिकित्सक और दो पैरामेडिकल स्टाफ होना चाहिए लेकिन टीमों में छह महिला चिकित्सक व कई पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते मानक के अनुसार कोई भी टीम पूरी नहीं है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य की जांच प्रभावित हो रही है।
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- 16108 बच्चों की हुई जांच 491 मिले बीमार
जिले में 985 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों में पांच वर्ष तक के पढ़ने वाले 72984 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच का लक्ष्य निर्धारित है। अप्रैल व मई माह में चलाए गए स्कूल हेल्थ कार्यक्रम के तहत 278 आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर 16108 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई, जो लक्ष्य का 22 प्रतिशत है। जांच में 491 बच्चे बीमार मिले, जिनको स्वास्थ्य टीमों द्वारा दवा दी गई। इसके अलावा जिले में 642 स्कूलों में 96431 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करने का लक्ष्य के सापेक्ष अप्रैल व मई महीने में 136 स्कूलों का निरीक्षण कर 11765 बच्चों की जांच हुई, जो लक्ष्य का 12 प्रतिशत है।
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-- जन्मजात बीमारी से पीड़ित मिले आठ बच्चे
जिले में प्रसव केंद्रों पर जन्मे 2002 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें आठ बच्चे जन्मजात बीमारियों से पीड़ित मिले। इनमें चार बच्चे होठ कटे हुए, तीन बच्चों के पैर मुड़े हुए और एक बच्चे में बहरापन की समस्या सामने आई। इन सभी बच्चों को अस्पताल भेजकर जांच व उपचार की सलाह दी गई।

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कोट
आरबीएसके टीमों द्वारा स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की जांच का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। शत प्रतिशत बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करने के निर्देश हैं। स्वास्थ्य टीम में चिकित्सक या स्टाफ की जो कमी है, उसकी जानकारी कर पूरा किया जाएगा। - डॉ. कृष्ण गोपाल, सीएमओ
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