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3.60 करोड़ का बोझ बढ़ा रही स्वास्थ्य विभाग की मनमानी
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:01 AM IST
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- फोटो : demo
शामली। एक तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार गरीबों को सस्ती और सुलभ चिकित्सा सेवा प्रदान करना चाहती हैं, लेकिन शामली स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही और मनमानी से हर साल गरीब परिवारों की करीब 45 हजार गर्भवती महिलाओं पर पौने चार करोड़ रुपये का बोझ पड़ रहा है। यह आर्थिक बोझ गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने में हो रहा है। यह स्थिति तब है जब मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल में रखी अतिरिक्त मशीन को शामली लाने के आदेश भी हो चुके हैं।
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दरअसल, जिला अस्पताल के रूप में काम कर रहे शामली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की मशीन नहीं है। इसके चलते शामली अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को मजबूरन प्राइवेट अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। एक साल पूर्व सहायक निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) मधु सक्सेना ने शामली स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल में रखी अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड मशीन लाने के लिए कहा था। करीब छह महीना पूर्व पीसीपीएनडीटी की बैठक में इस पर मुहर लग गई थी। जिसके बाद मशीन 40 किलोमीटर दूर स्थित मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल से लानी थी। बावजूद इसके अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं लाई जा रही है।
धूल फांक रही पीपीपी मॉडल की फाइल
जिस जिले में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं होती है, वहां विकल्प के तौर पर पीपीपी मॉडल पर सरकारी अस्पताल द्वारा एक अल्ट्रासाउंड सेंटर को चुना जाता है। उसके यहां पर गर्भवती महिलाओं के निशुल्क अल्ट्रासाउंड कराए जाते हैं। उस अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक को सरकार द्वारा तय रकम अदा की जाती है। छह माह पूर्व शासन द्वारा यह आदेश शामली में भेजे गए थे, लेकिन यह फाइल भी अधिकारियों की लापरवाही के चलते धूल फांक रही है।
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सब कुछ फ्री, फिर भी लुट रही महिलाएं
जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकार अरबों रुपये खर्च कर रही है। गर्भवती महिलाओं की हर जांच निशुल्क है। एंबुलेंस से उनको अस्पताल लाना और प्रसव बाद घर छुड़वाने तक की जिम्मेदारी सरकार ले रही है। यही नहीं सरकारी अस्पताल में प्रसव के दौरान खाना भी फ्री है। बावजूद इसके अल्ट्रासाउंड कराने में गर्भवती महिलाओं को इतना मोटा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के मुताबिक शामली जिले में प्रत्येक वर्ष करीब 45 हजार गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पतालों में चेकअप के लिए पहुंचती हैं। गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत के बारे में जानकारी के लिए दो बार अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। इस लिहाज से 45 हजार गर्भवती महिलाओं को 90 हजार बार अल्ट्रासाउंड करना पड़ता है। प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड कराने पर एक बार में 400 रुपये का खर्चा होता है, इसके चलते यह रकम 96 हजार अल्ट्रासाउंड कराने पर करीब तीन करोड़ 60 लाख रुपये बनती है। ऐसे में सवाल उठता है कि अल्ट्रासाउंड मशीन न लाने में स्वास्थ्य विभाग मनमानी क्यों कर रहा है।
इस संबंध में कई बार पूर्व में दिशा निर्देश दिए जा चुके है। संबंधित नोडल को आदेशित करने के साथ ही वह व्यक्तिगत तौर पर इसमें कार्रवाई कराएंगे। जल्दी ही शामली अस्पताल में दोनों सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। - डाक्टर राजकुमार, सीएमओ।
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