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जनपद में नदी किनारे बसे 29 गांवों में लगेंगे स्वास्थ्य शिविर, पानी की होगी जांच
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शामली। जनपद में नदी किनारे गांवों में फैल रही गंभीर बीमारियों को लेकर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने ऐसे सभी गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाने और दूषित पानी की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने 29 गांवों में दो दिसंबर से स्वास्थ्य शिविर लगाने का माइक्रोप्लान तैयार किया है।
जनपद से गुजरने वाली कृष्णा नदी का पानी प्रदूषित होने के कारण इसके आसपास के गांवों का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। प्रदूषित पानी पीने से बीमारियों फैल रही हैं। एनजीटी ने इन गांवों में कैंसर, सांस, लीवर, त्वचा आदि रोगों के पांव पसारने की वजह प्रदूषित पेयजल होना माना है। जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को नदी किनारे बसे गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर मरीजों की जांच करने और पानी की जांच कराने के लिए माइक्रोप्लान तैयार करने को कहा है। शनिवार को स्वास्थ्य अधिकारी माइक्रोप्लान तैयार करने में जुटे रहे। डीएमओ (जिला मलेरिया अधिकारी) डाक्टर विनय कुुमार ने बताया कि नदी किनारे शामली नगर की बस्तियों सहित थानाभवन, कुड़ाना और कांधला ब्लाक के 29 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में दो दिसंबर से शिविर लगाकर मरीजों की जांच और उपचार किया जाएगा। गंभीर रोगियों का बड़े अस्पताल में उपचार की व्यवस्था की जाएगी। पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे। एनजीटी के निर्देश है कि जिन गांवों में प्रदूषित पानी पाया जाता है तो वहां पर पाइपलाइन से या टैंकर से पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
शिविर में पांच रोगों की जांच पर रहेगा फोकस
डीएमओ डाक्टर विनय कुमार के मुताबिक एनजीटी की गाइड लाइन के अनुसार स्वास्थ्य शिविर में मुख्य रूप से सांस, कैंसर, लीवर, उदर और चर्म रोग की जांच की जाएगी। जांच के दौरान अगर कोई नया मरीज गंभीर बीमारी कैंसर आदि से पीड़ित सामने आता है तो उसका इलाज बड़े अस्पताल में कराया जाएगा। पहले से बीमार चल रहे मरीजों के बारे में यह जानकारी ली जाएगी कि उनका इलाज किन अस्पतालों में चल रहा है।
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इन 29 गांवों में लगेंगे शिविर
गांव बंतीखेड़ा, हिरनवाड़ा, सोंटा रसूलपुर, कुतुबगढ़, लाडोमाजरी, थानाभवन नगर, थानाभवन देहात, गौसगढ़, भंनेड़ा, कुड़ाना, काबड़ौत, बुटराड़ी, समसपुर, जलालपुर, बनत, भिक्कीदेह, फतेहपुर, बरलाजट, लिलौन, तलवा माजरा, एलम, मखमूलपुर, मतनावली, लिसाढ़, राजपुर, सल्फा, सुन्ना में शिविर लगेंगे। हर ब्लाक में राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम की दो टीमें लगाई गई है। शामली नगर, थानाभवन और कांधला ब्लाक के गांवों में दो दिसंबर से पांच दिसंबर तक और कुड़ाना ब्लाक में दो से नौ दिसंबर तक शिविर लगाए जाएंगे। शिविर लगाने की जानकारी ग्रामीणों को पहले दिन एनाउंस कराकर दी जाएगी।
बहावड़ी में प्रदूषित पानी की हो चुकी पुष्टि
गांव बहावड़ी में गत 23 अक्तूबर को स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिविर लगाया गया था। ग्रामीणों ने हैंडपंप से प्रदूषित पानी आने की शिकायत की थी। इसके बाद गांव में अलग-अलग स्थानों से हैंडपंप से पानी के छह नमूने लिए गए थे। डीएमओ के मुताबिक पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट में शिव मंदिर के सामने और जितेंद्र के घर के निकट लगे हैंडपंप का पानी प्रदूषित पाया गया। इन हैंडपंपों के पानी की जांच में आयरन की मात्रा मानक एक से अधिक 1.3 व 1.5 प्रतिशत पाई गई।
कोट
एनजीटी के निर्देश पर जनपद में नदी किनारे के 29 गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाने और पानी की जांच के लिए माइक्रोप्लान तैयार कर लिया गया है। दो दिसंबर से इन गांवों में कैंप लगाए जाएंगे। - डाक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।
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जनपद से गुजरने वाली कृष्णा नदी का पानी प्रदूषित होने के कारण इसके आसपास के गांवों का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। प्रदूषित पानी पीने से बीमारियों फैल रही हैं। एनजीटी ने इन गांवों में कैंसर, सांस, लीवर, त्वचा आदि रोगों के पांव पसारने की वजह प्रदूषित पेयजल होना माना है। जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को नदी किनारे बसे गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर मरीजों की जांच करने और पानी की जांच कराने के लिए माइक्रोप्लान तैयार करने को कहा है। शनिवार को स्वास्थ्य अधिकारी माइक्रोप्लान तैयार करने में जुटे रहे। डीएमओ (जिला मलेरिया अधिकारी) डाक्टर विनय कुुमार ने बताया कि नदी किनारे शामली नगर की बस्तियों सहित थानाभवन, कुड़ाना और कांधला ब्लाक के 29 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में दो दिसंबर से शिविर लगाकर मरीजों की जांच और उपचार किया जाएगा। गंभीर रोगियों का बड़े अस्पताल में उपचार की व्यवस्था की जाएगी। पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे। एनजीटी के निर्देश है कि जिन गांवों में प्रदूषित पानी पाया जाता है तो वहां पर पाइपलाइन से या टैंकर से पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
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शिविर में पांच रोगों की जांच पर रहेगा फोकस
डीएमओ डाक्टर विनय कुमार के मुताबिक एनजीटी की गाइड लाइन के अनुसार स्वास्थ्य शिविर में मुख्य रूप से सांस, कैंसर, लीवर, उदर और चर्म रोग की जांच की जाएगी। जांच के दौरान अगर कोई नया मरीज गंभीर बीमारी कैंसर आदि से पीड़ित सामने आता है तो उसका इलाज बड़े अस्पताल में कराया जाएगा। पहले से बीमार चल रहे मरीजों के बारे में यह जानकारी ली जाएगी कि उनका इलाज किन अस्पतालों में चल रहा है।
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इन 29 गांवों में लगेंगे शिविर
गांव बंतीखेड़ा, हिरनवाड़ा, सोंटा रसूलपुर, कुतुबगढ़, लाडोमाजरी, थानाभवन नगर, थानाभवन देहात, गौसगढ़, भंनेड़ा, कुड़ाना, काबड़ौत, बुटराड़ी, समसपुर, जलालपुर, बनत, भिक्कीदेह, फतेहपुर, बरलाजट, लिलौन, तलवा माजरा, एलम, मखमूलपुर, मतनावली, लिसाढ़, राजपुर, सल्फा, सुन्ना में शिविर लगेंगे। हर ब्लाक में राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम की दो टीमें लगाई गई है। शामली नगर, थानाभवन और कांधला ब्लाक के गांवों में दो दिसंबर से पांच दिसंबर तक और कुड़ाना ब्लाक में दो से नौ दिसंबर तक शिविर लगाए जाएंगे। शिविर लगाने की जानकारी ग्रामीणों को पहले दिन एनाउंस कराकर दी जाएगी।
बहावड़ी में प्रदूषित पानी की हो चुकी पुष्टि
गांव बहावड़ी में गत 23 अक्तूबर को स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिविर लगाया गया था। ग्रामीणों ने हैंडपंप से प्रदूषित पानी आने की शिकायत की थी। इसके बाद गांव में अलग-अलग स्थानों से हैंडपंप से पानी के छह नमूने लिए गए थे। डीएमओ के मुताबिक पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट में शिव मंदिर के सामने और जितेंद्र के घर के निकट लगे हैंडपंप का पानी प्रदूषित पाया गया। इन हैंडपंपों के पानी की जांच में आयरन की मात्रा मानक एक से अधिक 1.3 व 1.5 प्रतिशत पाई गई।
कोट
एनजीटी के निर्देश पर जनपद में नदी किनारे के 29 गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाने और पानी की जांच के लिए माइक्रोप्लान तैयार कर लिया गया है। दो दिसंबर से इन गांवों में कैंप लगाए जाएंगे। - डाक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।