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पर्यावरण प्रेमी दीपेंद्र के जज्बे को सलाम
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Mon, 16 Jul 2018 12:45 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। पर्यावरण से प्रेम करना कोई दीपेंद्र से सीखे। दिव्यांग होने के बावजूद उसमें अनूठा जज्बा है। ग्राम पंचायत की तरफ से सड़क किनारे लगाए गए पौधों में वह रोजाना सुबह शाम पानी देता है। पर्यावरण सरंक्षण के प्रति उसके इस प्रयास की हर कोई सराहना करता है। केंद्र और प्रदेश सरकार का भी उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण किया जाए। इसके लिए जनांदोलन खड़ा किया जाए और पौधरोपण के बाद इनका रख-रखाव करने की जिम्मेदारी भी नागरिक लें। मगर, पौधरोपण करने के बाद उनके संरक्षण पर किसी का ध्यान नहीं रहता है।
वहीं, गांव भभीसा निवासी दिव्यांग दीपेंद्र ने ऐसी मिसाल पेश की है, जो दूसरों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। 32 वर्षीय दीपेंद्र ट्राई साइकिल से चलता है। ग्राम पंचायत की तरफ से सड़क के दोनों ओर पौधे लगवाए गए हैं। कैंची पुल से बैंक के सामने तथा स्कूल के सामने पौधे लगवाए गए, लेकिन उन्हें पानी देने और देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
एक पखवाड़ा पूर्व से दीपेंद्र ने इन पौधों को सींचने के लिए मन में संकल्प लिया और प्रयास शुरू कर दिया। अब दीपेंद्र की आदत बन गई है। रोजाना सुबह और शाम को दीपेंद्र अपनी ट्राई साइकिल से निकलता है और प्रत्येक पौधे में पानी डालता है। पानी डालने के लिए नगर पंचायत की टोंटी से गिलास में पानी भरता है और पौधों में डालता है। दीपेंद्र ने बताया कि इस कार्य को करने के लिए उससे किसी ने कहा नहीं, बल्कि खुद ही मन में यह बात आई कि लगाए गए पौधों को यदि पानी नहीं मिलेगा, तो यह सूख जाएंगे। इसी कारण वह रोजाना पौधों में पानी डालने निकल पड़ता है। गांव के लोग भी दीपेंद्र के इस प्रयास की खूब सराहना कर रहे हैं।
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वहीं, गांव भभीसा निवासी दिव्यांग दीपेंद्र ने ऐसी मिसाल पेश की है, जो दूसरों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। 32 वर्षीय दीपेंद्र ट्राई साइकिल से चलता है। ग्राम पंचायत की तरफ से सड़क के दोनों ओर पौधे लगवाए गए हैं। कैंची पुल से बैंक के सामने तथा स्कूल के सामने पौधे लगवाए गए, लेकिन उन्हें पानी देने और देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
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एक पखवाड़ा पूर्व से दीपेंद्र ने इन पौधों को सींचने के लिए मन में संकल्प लिया और प्रयास शुरू कर दिया। अब दीपेंद्र की आदत बन गई है। रोजाना सुबह और शाम को दीपेंद्र अपनी ट्राई साइकिल से निकलता है और प्रत्येक पौधे में पानी डालता है। पानी डालने के लिए नगर पंचायत की टोंटी से गिलास में पानी भरता है और पौधों में डालता है। दीपेंद्र ने बताया कि इस कार्य को करने के लिए उससे किसी ने कहा नहीं, बल्कि खुद ही मन में यह बात आई कि लगाए गए पौधों को यदि पानी नहीं मिलेगा, तो यह सूख जाएंगे। इसी कारण वह रोजाना पौधों में पानी डालने निकल पड़ता है। गांव के लोग भी दीपेंद्र के इस प्रयास की खूब सराहना कर रहे हैं।
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