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किताब-कॉपी की जगह हाथ में थमा दिया फावड़ा
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली।
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:26 AM IST
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student
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शामली/बाबरी। सरकारी स्कूलों में व्यवस्था आखिर कैसे सुधरे, जब बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभालने वाले अध्यापक ही आराम तलब हो जाएं। ऐसा ही नजारा बाबरी क्षेत्र के गांव लाडो मजरी स्थित सरकारी स्कूल का सामने आया है। वहां पर तैनात अध्यापक कक्षा में बच्चों की टाट पट्टी पर बस्ते को तकिया बनाकर लेटते नजर आए, तो बच्चों को फावड़ा देकर नाले की खुदाई में लगा दिया। अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची, तो अध्यापक बगल झांकने लगे।
प्रदेश सरकार की तरफ से परिषदीय स्कूलों में शिक्षा सुधार के लिए खूब प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ऐसे अध्यापक सरकार के प्रयासों को पलीता लगा रहे हैं। शुक्रवार को गांव लाडो मजरी के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने मीडिया को सूचना दी कि विद्यालय में अध्यापक पढ़ाते नहीं है।
अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची, तो कैमरे में कई चौंकाने वाले दृश्य कैद हुए। स्कूल में तैनात अध्यापक अरविंद कुमार बच्चों को पढ़ाने के बजाय कक्षा में टाट पट्टी को बिस्तर बनाकर लेटे थे और बच्चों के बैग को तकिया बनाया हुआ था। आराम से लेटकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। कुछ बच्चे भी उनके पास बैठे हुए थे। वहीं विद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं को फावड़ा व तसला देकर नाले की खुदाई में लगा दिया गया। इससे साफ है कि सरकारी स्कूल में अध्यापकों का ध्यान बच्चों को पढ़ाने में नहीं, बल्कि आराम फरमाने में ज्यादा रहता है।
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बच्चे स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं न कि काम करने के लिए। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो उक्त शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। -- राकेश कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी, थानाभवन।
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प्रदेश सरकार की तरफ से परिषदीय स्कूलों में शिक्षा सुधार के लिए खूब प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ऐसे अध्यापक सरकार के प्रयासों को पलीता लगा रहे हैं। शुक्रवार को गांव लाडो मजरी के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने मीडिया को सूचना दी कि विद्यालय में अध्यापक पढ़ाते नहीं है।
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अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची, तो कैमरे में कई चौंकाने वाले दृश्य कैद हुए। स्कूल में तैनात अध्यापक अरविंद कुमार बच्चों को पढ़ाने के बजाय कक्षा में टाट पट्टी को बिस्तर बनाकर लेटे थे और बच्चों के बैग को तकिया बनाया हुआ था। आराम से लेटकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। कुछ बच्चे भी उनके पास बैठे हुए थे। वहीं विद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं को फावड़ा व तसला देकर नाले की खुदाई में लगा दिया गया। इससे साफ है कि सरकारी स्कूल में अध्यापकों का ध्यान बच्चों को पढ़ाने में नहीं, बल्कि आराम फरमाने में ज्यादा रहता है।
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बच्चे स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं न कि काम करने के लिए। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो उक्त शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। -- राकेश कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी, थानाभवन।