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Shamli News: आधा सत्र बीता, नहीं मिली 28 हजार बच्चों को यूनिफार्म
Fri, 18 Oct 2024 01:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Fri, 18 Oct 2024 01:18 AM IST
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शामली। जनपद में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई का आधा सत्र बीतने के बाद भी शत प्रतिशत बच्चों को यूनिफार्म, जूता मोजा और बैग नहीं मिल सका है। ऐसे में इन बच्चों को बिना स्कूल वेशभूषा के ही विद्यालय आने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
जनपद के लगभग 28 हजार बच्चों को शिक्षा सत्र के छह माह बीत जाने के बाद भी वेशभूषा की धनराशि नहीं मिली है। इससे यह स्कूली बच्चे बिना वेषभूषा के ही विद्यालय जाने को मजबूर हैं। परिषदीय, अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूलों के कक्षा आठ तक के बच्चे काॅन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर यूनिफार्म, जूते, मोजे, बस्ता, स्टेशनरी आदि लेकर विद्यालय जाएं, इसके लिए सरकार की ओर से योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के तहत शासन की ओर से 1200 रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेजी जाती है।
जनपद में इस साल लगभग 88 हजार बच्चों को योजना का लाभ दिया जाना है। अभी तक केवल तीन किस्तों में लगभग 60 हजार बच्चों को ही योजना का लाभ मिला है। जिसके चलते बच्चे स्कूलों में बिना वेशभूषा के ही आते है। अभिभावक भी डीबीटी के पैसे का इंतजार कर रहें हैं, ताकि वे पैसा निकालकर बच्चों की यूनिफार्म बनवा सके। वहीं अभी भी लगभग 2500 बच्चों के आधार कार्ड नहीं बन पाए है। जिस कारण उनका डीबीटी का पैसा आना मुश्किल लग रहा है।
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डीबीटी की लगभग तीन किस्त जा चुकी है। शेष रह गए छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खाते में पैसा भेजने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं जिन बच्चों के अभी तक आधार कार्ड नहीं बने है, उनका भी कोई हल निकालकर आधार कार्ड बनवाते हुए डीबीटी का पैसा भेजा जाएगा।
- लता राठौर, बीएसए
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जनपद के लगभग 28 हजार बच्चों को शिक्षा सत्र के छह माह बीत जाने के बाद भी वेशभूषा की धनराशि नहीं मिली है। इससे यह स्कूली बच्चे बिना वेषभूषा के ही विद्यालय जाने को मजबूर हैं। परिषदीय, अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूलों के कक्षा आठ तक के बच्चे काॅन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर यूनिफार्म, जूते, मोजे, बस्ता, स्टेशनरी आदि लेकर विद्यालय जाएं, इसके लिए सरकार की ओर से योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के तहत शासन की ओर से 1200 रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेजी जाती है।
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जनपद में इस साल लगभग 88 हजार बच्चों को योजना का लाभ दिया जाना है। अभी तक केवल तीन किस्तों में लगभग 60 हजार बच्चों को ही योजना का लाभ मिला है। जिसके चलते बच्चे स्कूलों में बिना वेशभूषा के ही आते है। अभिभावक भी डीबीटी के पैसे का इंतजार कर रहें हैं, ताकि वे पैसा निकालकर बच्चों की यूनिफार्म बनवा सके। वहीं अभी भी लगभग 2500 बच्चों के आधार कार्ड नहीं बन पाए है। जिस कारण उनका डीबीटी का पैसा आना मुश्किल लग रहा है।
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डीबीटी की लगभग तीन किस्त जा चुकी है। शेष रह गए छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खाते में पैसा भेजने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं जिन बच्चों के अभी तक आधार कार्ड नहीं बने है, उनका भी कोई हल निकालकर आधार कार्ड बनवाते हुए डीबीटी का पैसा भेजा जाएगा।
- लता राठौर, बीएसए