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खाली भूमि में हरित पट्टी, व्यावसायिक भूमि को आवासीय दर्शाया
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शामली। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित शामली महायोजना 2031 में भारी खामियां उजागर हुई है। व्यावसायिक भूमि को आवासीय और खाली भूमि को हरित पट्टी दर्शा दिया गया है। नगर पालिका परिषद सीमा क्षेत्र की सीमा एक किमी बढ़ा दी गई है। हालांकि प्राधिकरण की ओर सभी आपत्तियों - सुझावों के लिए छह मार्च तक अंतिम तिथि नियत की गई।
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित शामली महायोजना 2031 प्रकाशन के बाद बुकलेट जिला मुख्यालय पर पहुंच गई है। महायोजना में पांच नगरीय क्षेत्र शामली व कैराना नगर पालिका परिषद को शामिल किया गया है। इसके अलावा बनत, झिंझाना और ऊन नगर पंचायत समेत जिले के 42 गांव महायोजना के दायरे में आ गई हैं। योजना का कुल क्षेत्र 215 वर्ग किमी है। जिसका क्षेत्रफल 3019.74 हैक्टेयर है। जिसमें शामली में आवासीय उपयोग 14 प्रतिशत, कृषि क्षेत्र कुल 62 प्रतिशत, शामली में औद्योगिक इकाई, हरित पट्टी, ट्रांसपोर्ट नगर, तीन बस अड्डे आदि मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। मगर महायोजना 2031 पर फिलहाल जो आपत्तियां आ रही हैं। उनमें व्यावसायिक भूमि को आवासीय और खाली भूमि को हरित पट्टी दर्शाया गया है। नगर पालिका परिषद का सीमा क्षेत्र एक किमी बढ़ाने के मामले आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शामली नगर पालिका परिषद की सीमा 1983 के बाद विस्तार नहीं हुआ है। क्षेत्र के विस्तार के लिए नगर पालिका परिषद बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव करके शासन को भेजा जाता है। उसके बाद आपत्तियों का निस्तारण के बाद सीमा विस्तार पर मुहर लगती है। इसी प्रकार शामली शहर के हनुमान रोड स्थित मध्य में वर्मा मार्केट, कनिका कांप्लेक्स को व्यवसायिक न दर्शाकर आवासीय कालोनी में अंकित किया गया है।
महायोजना में नगर पालिका बोर्ड को नहीं दिया प्रतिनिधित्व
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मानवेंद्र वर्मा का कहना है कि नियमों के मुताबिक मास्टर प्लान का कच्चा प्रारूप तैयार करके प्रकाशन करके प्राधिकरण के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने का प्रावधान है। आपत्तियों और सुझाव के बाद निस्तारण समिति को करना है। जबकि उत्तर प्रदेश नगर पालिका एक्ट में यह नियम है कि मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली महायोजना बोर्ड में संबंधित नगर पालिका बोर्ड के चेयरमैन या एक से लेकर चार सदस्य को समिति का प्रतिनिधि बनाना चाहिए। प्राधिकरण की महायोजना में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। सिर्फ डीएम शामली को रखा गया है। प्राधिकरण की प्रस्तावित महायोजना मे खामियों के संबंध में डीएम जसजीत कौर व मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. से मिलकर शिकायत करेंगे।
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खामियों को सुधारने के लिए मांगी जा रही है आपत्तियां
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण शामली कार्यालय के प्रभारी राजीव त्यागी ने बताया कि शामली महायोजना 2031 शहर के सुंदरीकरण के लिए प्रस्तावित की गई है। खामियों को सुधारने के लिए आपात्तियां सुनकर समिति निस्तारण करेगी। उनका कहना है कि फिलहाल महायोजना में 27 शिकायत प्राप्त हुई है। अगले सप्ताह शिकायत बढ़ सकती हैं।
शामली महायोजना क्षेत्र 2031
शहरी केंद्र
-शामली और कैराना नगर पालिका परिषद, बनत, झिंझाना और ऊन नगर पंचायत।
गांव- 42
योजना का क्षेत्र- 215 वर्ग किमी
कुल क्षेत्रफल- 3019.74 हेक्टेयर
जिले के गांवो की सूची
अलीपुर, बधेव, बधुपुरा, बलवा, बामनौली, बरलाजट, वेदखेड़ी, दरगाहपुर, ढ़िढाली, गाजीपुुर, घिस्सूगढ़, झाड़खेडी, झिंझाना देहात, कैराना देहात, कंडेला, कसेरवा कलां, कसेरवा खुर्द, खेडीकरमू, लिलौन,मन्ना माजरा, मुंडेट कलां, पंजीठ, पीरखेडा, रज्जाक नगर, सेहटा, शामली ग्रामीण, शेखपुरा, सिकंदरपुर, ताजपुर सिंभालका, टपराना, टिटौली, ऊन ग्रामीण, गोहरनी, हिंगोखेडी, होशंगपुर, जगनपुर, जहानपुरा, जलालपुर, जमालपुर, झाल आदि।
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मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित शामली महायोजना 2031 प्रकाशन के बाद बुकलेट जिला मुख्यालय पर पहुंच गई है। महायोजना में पांच नगरीय क्षेत्र शामली व कैराना नगर पालिका परिषद को शामिल किया गया है। इसके अलावा बनत, झिंझाना और ऊन नगर पंचायत समेत जिले के 42 गांव महायोजना के दायरे में आ गई हैं। योजना का कुल क्षेत्र 215 वर्ग किमी है। जिसका क्षेत्रफल 3019.74 हैक्टेयर है। जिसमें शामली में आवासीय उपयोग 14 प्रतिशत, कृषि क्षेत्र कुल 62 प्रतिशत, शामली में औद्योगिक इकाई, हरित पट्टी, ट्रांसपोर्ट नगर, तीन बस अड्डे आदि मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। मगर महायोजना 2031 पर फिलहाल जो आपत्तियां आ रही हैं। उनमें व्यावसायिक भूमि को आवासीय और खाली भूमि को हरित पट्टी दर्शाया गया है। नगर पालिका परिषद का सीमा क्षेत्र एक किमी बढ़ाने के मामले आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शामली नगर पालिका परिषद की सीमा 1983 के बाद विस्तार नहीं हुआ है। क्षेत्र के विस्तार के लिए नगर पालिका परिषद बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव करके शासन को भेजा जाता है। उसके बाद आपत्तियों का निस्तारण के बाद सीमा विस्तार पर मुहर लगती है। इसी प्रकार शामली शहर के हनुमान रोड स्थित मध्य में वर्मा मार्केट, कनिका कांप्लेक्स को व्यवसायिक न दर्शाकर आवासीय कालोनी में अंकित किया गया है।
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महायोजना में नगर पालिका बोर्ड को नहीं दिया प्रतिनिधित्व
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मानवेंद्र वर्मा का कहना है कि नियमों के मुताबिक मास्टर प्लान का कच्चा प्रारूप तैयार करके प्रकाशन करके प्राधिकरण के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने का प्रावधान है। आपत्तियों और सुझाव के बाद निस्तारण समिति को करना है। जबकि उत्तर प्रदेश नगर पालिका एक्ट में यह नियम है कि मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली महायोजना बोर्ड में संबंधित नगर पालिका बोर्ड के चेयरमैन या एक से लेकर चार सदस्य को समिति का प्रतिनिधि बनाना चाहिए। प्राधिकरण की महायोजना में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। सिर्फ डीएम शामली को रखा गया है। प्राधिकरण की प्रस्तावित महायोजना मे खामियों के संबंध में डीएम जसजीत कौर व मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. से मिलकर शिकायत करेंगे।
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खामियों को सुधारने के लिए मांगी जा रही है आपत्तियां
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण शामली कार्यालय के प्रभारी राजीव त्यागी ने बताया कि शामली महायोजना 2031 शहर के सुंदरीकरण के लिए प्रस्तावित की गई है। खामियों को सुधारने के लिए आपात्तियां सुनकर समिति निस्तारण करेगी। उनका कहना है कि फिलहाल महायोजना में 27 शिकायत प्राप्त हुई है। अगले सप्ताह शिकायत बढ़ सकती हैं।
शामली महायोजना क्षेत्र 2031
शहरी केंद्र
-शामली और कैराना नगर पालिका परिषद, बनत, झिंझाना और ऊन नगर पंचायत।
गांव- 42
योजना का क्षेत्र- 215 वर्ग किमी
कुल क्षेत्रफल- 3019.74 हेक्टेयर
जिले के गांवो की सूची
अलीपुर, बधेव, बधुपुरा, बलवा, बामनौली, बरलाजट, वेदखेड़ी, दरगाहपुर, ढ़िढाली, गाजीपुुर, घिस्सूगढ़, झाड़खेडी, झिंझाना देहात, कैराना देहात, कंडेला, कसेरवा कलां, कसेरवा खुर्द, खेडीकरमू, लिलौन,मन्ना माजरा, मुंडेट कलां, पंजीठ, पीरखेडा, रज्जाक नगर, सेहटा, शामली ग्रामीण, शेखपुरा, सिकंदरपुर, ताजपुर सिंभालका, टपराना, टिटौली, ऊन ग्रामीण, गोहरनी, हिंगोखेडी, होशंगपुर, जगनपुर, जहानपुरा, जलालपुर, जमालपुर, झाल आदि।