{"_id":"5c816348bdec222dcd5a7637","slug":"garibo-ki-madaad-kar-samaaj-me-banaai-pehchaan","type":"story","status":"publish","title_hn":"गरीबों की मदद कर समाज में बनाई अपनी पहचान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गरीबों की मदद कर समाज में बनाई अपनी पहचान
Fri, 08 Mar 2019 12:00 AM IST
NAVEEN GUPTA
amarujala
amarujala
Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Fri, 08 Mar 2019 12:00 AM IST
विज्ञापन
file
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
समय बदल रहा है। महिलाएं पुरुषों के कदम से कदम बढ़ाकर आगे बढ़ रही हैं। हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी धाक जमाई है। परिवार के साथ समाजसेवा में भी वह पीछे नहीं हैं। शहर में कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो परिवार के साथ समाजसेवा में भी जुटी हैं। इसके बूते उन्होंने अपनी पहचान बनाई हैं। किसी ने निसंतान दंपतियों की मदद का बीड़ा उठाया है, तो कोई बेटियों को मजबूत बनाने में जुटी हैं।
निर्धन बेटियों को आगे बढ़ाने में जुटी वीना
शिव गंज मंडी निवासी वीना अग्रवाल 26 साल से समाजसेवा के क्षेत्र में उतरी थीं। शुरू में उन्होंने निर्धन लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर प्रेरित किया। निर्धन बच्चों को निशुल्क शिक्षा, यूनिफार्म, बेटियों को सिलाई बुनाई, कंप्यूटर कोर्स आदि निशुल्क कराने में अपने संबंधों के माध्यम से मदद करती हैं। निर्धन बेटियों की शादी कराने में उनकी अहम भूमिका रहती है। उनकी इस सामाजिक सेवा के चलते 1999 में उन्हें समाज कल्याण समिति की सदस्य बनाया गया। 2011 में ऐच्छिक ब्यूरो परिवार परामर्श केंद्र की सदस्य बनी। 2015 में पुलिस की किशोर पुलिस यूनिट की कांउसलर बनीं। संगठन और आज भी वे पारिवारिक विवादों को निबटाने के अलावा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान मुहिम में सक्रिय भागीदारी की। इन सबने उनकी प्रदेश स्तर पर पहचान बनाई। आज वह कई सामाजिक संस्थाओं की पदाधिकारी हैं। शहर के अधिकांश आयोजन में उनका सम्मान होता है। बेटा और पुत्रवधू नौकरी करते है और उनके पीछे से घर की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाती हैं।
निस्वार्थ भाव योग का ज्ञान बांट रही कुमुद शर्मा
शहर के बुढ़ाना रोड निवासी डॉक्टर कुमुद शर्मा योगाचार्या हैं। संस्कृत भाषा पर पूरी पकड़ रखने वाली कुमुद शर्मा जिले में योग का उजाला फैला रही हैं। लोगों को निशुल्क योग का ज्ञान बांटती हैं। जगह जगह शिविर लगाकर योग सिखाती हैं। उसकी योग के प्रति ये ललक देख पतंजलि योग संस्थान ने उन्हें महिला योग समिति में जिले की जिम्मेदारी दी। योग के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को देख शामली से लेकर सहारनपुर समेत कई जिलों के जिलाधिकारी और सामाजिक संगठन उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
विज्ञापन
बेटियों को मजबूत बना रहीं मृदुला
शहर के माजरा रोड की रहने वाली डॉक्टर मृदुला जैन बेटियों को मजबूत करने का बीडा उठाए हैं। भारतीय जैन संगठन के कार्यक्रम एंपावरमेंट ऑफ कपल्स और एंपावयरमेंट ऑफ गर्ल्स ,स्मार्ट गर्ल्स के अंतर्गत स्कूलों में जाकर बेटियों को मजबूत करने को ट्रेनिंग देती हैं। समाजसेवा के क्षेत्र में इन्होंने अपनी पहचान बनाई है। शहर के खुद का अबेकस सेंटर खोला है इसमें निर्धन और जरूरतमंद के बच्चों को निशुल्क भी ज्ञान बांटती हैं। कई क्लब और संगठनों से वह जुड़ी हैं। उनका परिवार भी समाजसेवा में अग्रणी है।
अनीता ने उठाया निसंतान दंपतियों की मदद का बीड़ा
शहर की अनीता बसंल ने निस्तांन दंपतियों को बच्चे गोद दिलाने का बीडा उठाया है। संतान नहीं होने से परेशान लोगों तक वह खुद पहुंचकर उन्हें प्रेरित करती हैं। बकौल अनीता इस काम में उनके बेहद आत्म संतुष्टि मिलती है। अब तक करीब 20 से ज्यादा परिवारों की वह मदद कर चुकी हैं। संस्कार भारती, ऐच्छिक ब्यूरो समेत कई संगठनों से वह जुड़ी हैं। कई संगठन उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
धन की तंगी में न जाए किसी की जान
शहर की महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलम शुक्ला पेशे से भले ही चिकित्सक हैं, लेकिन सामाजिक कार्यों में उनकी रुचि कम नहीं है। निर्धनों के निशुल्क इलाज के अलावा उन्हें निशुल्क दवा भी देती हैं। कहती हैं डॉक्टर का फर्ज दूसरों का जीवन बचाने के लिए है। धन के अभाव में किसी की जान ना जाए यही सोच उनकी है ओर इसी सोच से वे आगे बढ़ रही हैं। उनके पति भी चिकित्सक हैं। कई सामाजिक संगठनों में वह सक्रिय हैं ।
70 की उम्र में भी सरोज में है समाजसेवा का जज्बा
70 वर्षीय सरोज तोमर उम्र से भले ही बुजुर्ग हो गई हों, लेकिन समाजसेवा के कार्य में वे कभी उम्र को आड़े नहीं आने देतीं। शहर में कोई भी सामाजिक कार्य हो हर किसी में निस्वार्थ भाव से पहुंचती हैं। बकौल सरोज उनकी शादी 15 साल की उम्र में हो गई थी। उस वक्त वह हाईस्कूल में थी। शादी के बाद ही वे पढ़ी। हालांकि कुछ लोग इसके पक्ष में नहीं थे लेकिन पति और पिता ने साथ दिया और एमए बीएड कर 1978 में शामली के हिंदू कन्या इंटर कालेज में सरकारी शिक्षिका की नौकरी मिली। उन्होंने अपने बचपन में बहुत गरीबी देखी थी। पैसों की तंगी से गरीब बच्चे नहीं पढ़ पाते थे। तभी उन्होंने मन बना लिया था कि वो टीचर बनेंगी। आज भी वे रिटायर हैं लेकिन निर्धन बच्चों को निशुल्क पढ़ाती हैं। सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में भी अपना सहयोग करती हैं।
विज्ञापन
निर्धन बेटियों को आगे बढ़ाने में जुटी वीना
शिव गंज मंडी निवासी वीना अग्रवाल 26 साल से समाजसेवा के क्षेत्र में उतरी थीं। शुरू में उन्होंने निर्धन लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर प्रेरित किया। निर्धन बच्चों को निशुल्क शिक्षा, यूनिफार्म, बेटियों को सिलाई बुनाई, कंप्यूटर कोर्स आदि निशुल्क कराने में अपने संबंधों के माध्यम से मदद करती हैं। निर्धन बेटियों की शादी कराने में उनकी अहम भूमिका रहती है। उनकी इस सामाजिक सेवा के चलते 1999 में उन्हें समाज कल्याण समिति की सदस्य बनाया गया। 2011 में ऐच्छिक ब्यूरो परिवार परामर्श केंद्र की सदस्य बनी। 2015 में पुलिस की किशोर पुलिस यूनिट की कांउसलर बनीं। संगठन और आज भी वे पारिवारिक विवादों को निबटाने के अलावा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान मुहिम में सक्रिय भागीदारी की। इन सबने उनकी प्रदेश स्तर पर पहचान बनाई। आज वह कई सामाजिक संस्थाओं की पदाधिकारी हैं। शहर के अधिकांश आयोजन में उनका सम्मान होता है। बेटा और पुत्रवधू नौकरी करते है और उनके पीछे से घर की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाती हैं।
विज्ञापन
निस्वार्थ भाव योग का ज्ञान बांट रही कुमुद शर्मा
शहर के बुढ़ाना रोड निवासी डॉक्टर कुमुद शर्मा योगाचार्या हैं। संस्कृत भाषा पर पूरी पकड़ रखने वाली कुमुद शर्मा जिले में योग का उजाला फैला रही हैं। लोगों को निशुल्क योग का ज्ञान बांटती हैं। जगह जगह शिविर लगाकर योग सिखाती हैं। उसकी योग के प्रति ये ललक देख पतंजलि योग संस्थान ने उन्हें महिला योग समिति में जिले की जिम्मेदारी दी। योग के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को देख शामली से लेकर सहारनपुर समेत कई जिलों के जिलाधिकारी और सामाजिक संगठन उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
विज्ञापन
बेटियों को मजबूत बना रहीं मृदुला
शहर के माजरा रोड की रहने वाली डॉक्टर मृदुला जैन बेटियों को मजबूत करने का बीडा उठाए हैं। भारतीय जैन संगठन के कार्यक्रम एंपावरमेंट ऑफ कपल्स और एंपावयरमेंट ऑफ गर्ल्स ,स्मार्ट गर्ल्स के अंतर्गत स्कूलों में जाकर बेटियों को मजबूत करने को ट्रेनिंग देती हैं। समाजसेवा के क्षेत्र में इन्होंने अपनी पहचान बनाई है। शहर के खुद का अबेकस सेंटर खोला है इसमें निर्धन और जरूरतमंद के बच्चों को निशुल्क भी ज्ञान बांटती हैं। कई क्लब और संगठनों से वह जुड़ी हैं। उनका परिवार भी समाजसेवा में अग्रणी है।
अनीता ने उठाया निसंतान दंपतियों की मदद का बीड़ा
शहर की अनीता बसंल ने निस्तांन दंपतियों को बच्चे गोद दिलाने का बीडा उठाया है। संतान नहीं होने से परेशान लोगों तक वह खुद पहुंचकर उन्हें प्रेरित करती हैं। बकौल अनीता इस काम में उनके बेहद आत्म संतुष्टि मिलती है। अब तक करीब 20 से ज्यादा परिवारों की वह मदद कर चुकी हैं। संस्कार भारती, ऐच्छिक ब्यूरो समेत कई संगठनों से वह जुड़ी हैं। कई संगठन उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
धन की तंगी में न जाए किसी की जान
शहर की महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलम शुक्ला पेशे से भले ही चिकित्सक हैं, लेकिन सामाजिक कार्यों में उनकी रुचि कम नहीं है। निर्धनों के निशुल्क इलाज के अलावा उन्हें निशुल्क दवा भी देती हैं। कहती हैं डॉक्टर का फर्ज दूसरों का जीवन बचाने के लिए है। धन के अभाव में किसी की जान ना जाए यही सोच उनकी है ओर इसी सोच से वे आगे बढ़ रही हैं। उनके पति भी चिकित्सक हैं। कई सामाजिक संगठनों में वह सक्रिय हैं ।
70 की उम्र में भी सरोज में है समाजसेवा का जज्बा
70 वर्षीय सरोज तोमर उम्र से भले ही बुजुर्ग हो गई हों, लेकिन समाजसेवा के कार्य में वे कभी उम्र को आड़े नहीं आने देतीं। शहर में कोई भी सामाजिक कार्य हो हर किसी में निस्वार्थ भाव से पहुंचती हैं। बकौल सरोज उनकी शादी 15 साल की उम्र में हो गई थी। उस वक्त वह हाईस्कूल में थी। शादी के बाद ही वे पढ़ी। हालांकि कुछ लोग इसके पक्ष में नहीं थे लेकिन पति और पिता ने साथ दिया और एमए बीएड कर 1978 में शामली के हिंदू कन्या इंटर कालेज में सरकारी शिक्षिका की नौकरी मिली। उन्होंने अपने बचपन में बहुत गरीबी देखी थी। पैसों की तंगी से गरीब बच्चे नहीं पढ़ पाते थे। तभी उन्होंने मन बना लिया था कि वो टीचर बनेंगी। आज भी वे रिटायर हैं लेकिन निर्धन बच्चों को निशुल्क पढ़ाती हैं। सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में भी अपना सहयोग करती हैं।