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Shamli News: रात में पाला, दिन में धूप, 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा
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अधिकतम तापमान दो और न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस गिरा
सुबह और शाम कड़ाके की ठंड में ठिठुरते रहे लोग, दिन में धूप ने दी राहत
फोटो
शामली। उत्तरी भारत में पहाड़ों पर जमकर हो रही बर्फबारी और शीतलहर का असर जिले में भी देखने को मिल रहा है। रविवार सुबह जब किसान खेतों में पहुंचे तो उन्हें फसलों पर पाला नजर आया। पाला पड़ने से सुबह ठंड से लोग कांप उठे। रविवार को दिन में मौसम साफ रहा और धूप निकलने से लोगों को कुछ राहत मिली। 18 किलोमीटर घंटा की रफ्तार से तेज हवा चलती रही।
नया साल शुरू होने के साथ ही मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। शनिवार को पूरा दिन आसमान में बादल छाए रहे और धूप नहीं निकली। रात जिले में पाला पड़ा। खुले इलाकों में खेतों के आसपास सुबह बर्फ सी पाले की चादर बिछी दिखाई दी। धूप निकलने के बाद भी अधिकतम तापमान दो डिग्री नीचे गिरकर 14 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। न्यूनतम तापमान एक डिग्री गिकर छह डिग्री पर पहुंच गया। दिन में करीब 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। जिसने लोगों को परेशान किए रखा। शाम को एक बार फिर ठंड बढ़ने पर लोग घरों में दुबक गए।
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अभी और भी परेशान करेगी ठंड
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में ठंड का प्रकोप और बढ़ने की संभावना है। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मोदीपुरम के कृषि वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के मुताबिक उत्तर भारत में पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर यहां मैदानी इलाकों में भी दिखाई देगा। आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान अभी और नीचे जाएगा। शीतलहर भी चलेगी। बुधवार से अगले कुछ दिन तक हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं।
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पाले के कारण फसल प्रभावित
पाला लगने से पौधों की पत्तियां एवं फूल झुलस जाते हैं और कभी-कभी तो झड़ भी जाते हैं। इसके प्रभाव से अधपके फल सिकुड़ जाते हैं। आलू, सरसों, गेहूं और सब्जियों को पाले से नुकसान हो रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसलों को पाले से बचाने के लिए किसानों को दो-दो दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए। आलू की फसल को पाले से बचाने के लिए किसान पारंपरिक तरीका अपनाते हुए निश्चित दूरी पर धुआं भी कर रहे हैं।
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सुबह और शाम कड़ाके की ठंड में ठिठुरते रहे लोग, दिन में धूप ने दी राहत
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शामली। उत्तरी भारत में पहाड़ों पर जमकर हो रही बर्फबारी और शीतलहर का असर जिले में भी देखने को मिल रहा है। रविवार सुबह जब किसान खेतों में पहुंचे तो उन्हें फसलों पर पाला नजर आया। पाला पड़ने से सुबह ठंड से लोग कांप उठे। रविवार को दिन में मौसम साफ रहा और धूप निकलने से लोगों को कुछ राहत मिली। 18 किलोमीटर घंटा की रफ्तार से तेज हवा चलती रही।
नया साल शुरू होने के साथ ही मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। शनिवार को पूरा दिन आसमान में बादल छाए रहे और धूप नहीं निकली। रात जिले में पाला पड़ा। खुले इलाकों में खेतों के आसपास सुबह बर्फ सी पाले की चादर बिछी दिखाई दी। धूप निकलने के बाद भी अधिकतम तापमान दो डिग्री नीचे गिरकर 14 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। न्यूनतम तापमान एक डिग्री गिकर छह डिग्री पर पहुंच गया। दिन में करीब 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। जिसने लोगों को परेशान किए रखा। शाम को एक बार फिर ठंड बढ़ने पर लोग घरों में दुबक गए।
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अभी और भी परेशान करेगी ठंड
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में ठंड का प्रकोप और बढ़ने की संभावना है। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मोदीपुरम के कृषि वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के मुताबिक उत्तर भारत में पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर यहां मैदानी इलाकों में भी दिखाई देगा। आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान अभी और नीचे जाएगा। शीतलहर भी चलेगी। बुधवार से अगले कुछ दिन तक हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं।
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पाले के कारण फसल प्रभावित
पाला लगने से पौधों की पत्तियां एवं फूल झुलस जाते हैं और कभी-कभी तो झड़ भी जाते हैं। इसके प्रभाव से अधपके फल सिकुड़ जाते हैं। आलू, सरसों, गेहूं और सब्जियों को पाले से नुकसान हो रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसलों को पाले से बचाने के लिए किसानों को दो-दो दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए। आलू की फसल को पाले से बचाने के लिए किसान पारंपरिक तरीका अपनाते हुए निश्चित दूरी पर धुआं भी कर रहे हैं।