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लापता विदेशी बने सिरदर्द
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sun, 17 Jan 2016 12:56 AM IST
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शामली। जिले से गायब हुए पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिक पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। कई माह बीतने के बाद भी पुलिस इनका कोई सुराग नहीं लगा पाई है। हालांकि पाकिस्तानी युवक की तलाश के लिए तीन टीमें लगी हुई हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। यही हाल गायब हुए बांग्लादेशी का भी है।
तीन मई 2015 को पाकिस्तान के जिला जंग सदर पंजाब से रहीसा अपने बेटे नवीद के साथ कैराना के पीपलोतला स्थित अपनी रिश्तेदारी में आई थी। यहां से नवीद 19 मई 2015 को संदिग्ध हालातों में गायब हो गया। पुलिस के साथ-साथ खुफिया विभाग ने भी नवीद की तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं लगा।
बाद में नवीद की मां को अकेले ही पाकिस्तान लौटना पड़ा। नवीद का अब तक कोई पता नहीं लगा है। वहीं, थानाभवन की मदीना कॉलोनी में यासीन नाम का बांग्लादेशी काफी समय से रह रहा था। इस बीच उसने अपने राशन कार्ड और पहचान पत्र भी बनवा लिए। मामला खुला, तो पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने यासीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और उसकी मदद करने वाले दो लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया। इस बीच यासीन 23 जून 2015 को अपने परिवार सहित गायब हो सका। उसका भी अब तक कोई सुराग नहीं लगा है।
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उधर, झिंझाना रोड स्थित अपना घर आश्रम में इलाज करा रहे मानसिक रोगी मायनूस ने खुद को बांग्लादेशी बताया, जिसके बाद खुफिया विभाग ने भी उसके बारे में जानकारी लेनी शुरू कर दी, लेकिन 18 नवंबर को वह अपना घर आश्रम से संदिग्ध हालात में लापता हो गया। उसका भी अभी तक कुछ पता नहीं लगा है। हालांकि पुलिस उसे बांग्लादेशी नहीं मान रही है।
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तीन मई 2015 को पाकिस्तान के जिला जंग सदर पंजाब से रहीसा अपने बेटे नवीद के साथ कैराना के पीपलोतला स्थित अपनी रिश्तेदारी में आई थी। यहां से नवीद 19 मई 2015 को संदिग्ध हालातों में गायब हो गया। पुलिस के साथ-साथ खुफिया विभाग ने भी नवीद की तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं लगा।
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बाद में नवीद की मां को अकेले ही पाकिस्तान लौटना पड़ा। नवीद का अब तक कोई पता नहीं लगा है। वहीं, थानाभवन की मदीना कॉलोनी में यासीन नाम का बांग्लादेशी काफी समय से रह रहा था। इस बीच उसने अपने राशन कार्ड और पहचान पत्र भी बनवा लिए। मामला खुला, तो पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने यासीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और उसकी मदद करने वाले दो लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया। इस बीच यासीन 23 जून 2015 को अपने परिवार सहित गायब हो सका। उसका भी अब तक कोई सुराग नहीं लगा है।
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उधर, झिंझाना रोड स्थित अपना घर आश्रम में इलाज करा रहे मानसिक रोगी मायनूस ने खुद को बांग्लादेशी बताया, जिसके बाद खुफिया विभाग ने भी उसके बारे में जानकारी लेनी शुरू कर दी, लेकिन 18 नवंबर को वह अपना घर आश्रम से संदिग्ध हालात में लापता हो गया। उसका भी अभी तक कुछ पता नहीं लगा है। हालांकि पुलिस उसे बांग्लादेशी नहीं मान रही है।