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बारिश से अस्पताल में बढ़े मरीज, वायरल बुखार ने पकड़ा जोर

Fri, 05 Aug 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Aug 2022 12:15 AM IST
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Fluctuations in the weather continue, taking a toll on health
संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। जिले में बारिश एवं तेज धूप के चलते मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। सरकारी अस्पताल में एक सप्ताह से करीब 25 फीसदी मरीज ज्यादा आ रहे हैं। सबसे ज्यादा लगभग 30 फीसदी मरीज वायरल के हैं। इसके अतिरिक्त टाइफाइड बुखार, नजला, जुकाम, खांसी तथा त्वचा संबंधी रोगों से पीड़ितों की भी अस्पताल में कतार लगी है।
बारिश एवं धूप के चलते मौसम में उतार-चढ़ाव की वजह से मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सीएचसी शामली में एक सप्ताह में करीब 25 प्रतिशत से ज्यादा मरीज बढ़े हैं। पहले एक दिन में औसतन 700 के आसपास मरीज आ रहे थे। अब मरीजों की संख्या 1200-1300 के आसपास है। ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। इसके चलते मरीजों को कतार लंबी हो गई है। इसमें खड़े होकर अपने नंबर का इंतजार करना पड़ रहा है। सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. रामनिवास भी दो दिन से वायरल की चपेट में हैं। सबसे ज्यादा लगभग 30 प्रतिशत मरीज वायरल बुखार से और पांच प्रतिशत मरीज टाइफाइड से पीड़ित हैं। नजला, जुकाम और खांसी के मरीजों की भी लाइन लगी है। करीब दस फीसदी मरीज त्वचा संबंधी रोग पीड़ित आ रहे हैं।
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डॉ. उपकार मलिक ने बताया कि बच्चों में वायरल बुखार के साथ नजला, जुकाम व खांसी के मरीज ज्यादा हैं। डॉ. दीपक का कहना है कि बारिश के मौसम में वायरल बुखार के अतिरिक्त त्वचा संबंधी रोगों के मरीज बढ़े हैं। चिकित्साधीक्षक डॉ. रामनिवास ने बताया कि मौसम में उतार-चढ़ाव से अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। वायरल बुखार के सबसे ज्यादा मरीज हैं। टाइफाइड बुखार के भी मरीज आ रहे हैं। इसके अतिरिक्त नजला, जुकाम, खांसी और खाज-खुजली के मरीज आ रहे हैं। इसलिए मच्छरों से बचाव के लिए एहतियात बरतने की जरूरत है। अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध हैं।
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चिकित्सक की कुर्सी खाली, मरीज करते रहे इंतजार
सीएचसी में एक कक्ष में मरीजों की भीड़ लगी रही और चिकित्सक की कुर्सी खाली थी। आधे घंटे से भी अधिक समय से चिकित्सक नहीं पहुंचे। इससे मरीजों को इंतजार काफी समय तक इंतजार करना पड़ा। चिकित्साधीक्षक डॉ. रामनिवास ने बताया कि इमरजेंसी में ड्यूटी होने के कारण चिकित्सक कुछ समय के लिए गए थे। सभी चिकित्सकों ने ओपीडी में रहकर मरीजों की जांच कर उपचार किया।
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