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कुड़ाना का शौकीन रखता है नवरात्र के व्रत
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कुड़ाना का शौकीन रखता है नवरात्र के व्रत
शामली। कुड़ाना गांव के शौकीन सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है। मुस्लिम होने के बावजूद उसने अपनी दुकान में कलश स्थापना की हैै और पूरे नवरात्र व्रत रखता है। कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही व्रत खोलता है।
शौकीन गांव में ही हेयर सैलून चलाता है। उसने बताया कि करीब 18 साल पहले वह गांव के आसपास के होने वाले धार्मिक कार्यक्रम देखने जाता था। इस दौरान बागपत जिले के किशनपुर बराल के महावीर गिरी महाराज से वह काफी प्रभावित हुआ। उनके धार्मिक कार्यक्रम में भी जाने लगा। उनके गुरु देवी मां के भक्त थे। व्यक्तित्व से प्रभावित होकर वह महावीर गिरी महाराज का भक्त बन गया। बाद में महावीर गिरी महाराज ने बागपत के मलकपुर में समाधि ले ली। शौकीन के मुताबिक दुर्गा नवरात्र में वह दुकान में माता का दरबार लगाता है। कलश स्थापित करके पूरे नवरात्र व्रत रखता है। दोनों वक्त पूजा अर्चना करता है। नवमी के दिन कन्याओं को घर में भोजन कराने के बाद ही व्रत खोलता है। व्रत के पूरे नियम भी निभाता है। सुबह के वक्त पूजा किए बिना काम भी शुरू नहीं करता। कोई ग्राहक आता भी है तो भी वो पूजा के बाद ही उसका काम करता है।
परिजनों को पसंद नहीं, लेकिन विरोध भी नहीं करते
शौकीन के अनुसार घर में पत्नी परवीन और दो बेटे हैं। बड़ा बेटा राजा कक्षा 11 में पढ़ता है जबकि छोटा बेटा सोहेल कक्षा नौ का छात्र है। शौकीन के अनुसार उसके परिजनों को ये सब ज्यादा पसंद नहीं है लेकिन वह विरोध भी नहीं करते। कन्याओं के लिए हलवा पूरी भी पत्नी ही बनाती है। शौकीन का कहना है कि भगवान तो एक है। बस धर्म के अनुसार लोगों ने नाम अलग अलग कर लिए हैं। इंसानियत से बड़ा कुछ नहीं होता। उनके गुरू माता के भक्त थे तो वो भी बन गया। गांव वाले भी शौकीन की दुर्गा भक्ति की चर्चा करते हैं।
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शामली। कुड़ाना गांव के शौकीन सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है। मुस्लिम होने के बावजूद उसने अपनी दुकान में कलश स्थापना की हैै और पूरे नवरात्र व्रत रखता है। कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही व्रत खोलता है।
शौकीन गांव में ही हेयर सैलून चलाता है। उसने बताया कि करीब 18 साल पहले वह गांव के आसपास के होने वाले धार्मिक कार्यक्रम देखने जाता था। इस दौरान बागपत जिले के किशनपुर बराल के महावीर गिरी महाराज से वह काफी प्रभावित हुआ। उनके धार्मिक कार्यक्रम में भी जाने लगा। उनके गुरु देवी मां के भक्त थे। व्यक्तित्व से प्रभावित होकर वह महावीर गिरी महाराज का भक्त बन गया। बाद में महावीर गिरी महाराज ने बागपत के मलकपुर में समाधि ले ली। शौकीन के मुताबिक दुर्गा नवरात्र में वह दुकान में माता का दरबार लगाता है। कलश स्थापित करके पूरे नवरात्र व्रत रखता है। दोनों वक्त पूजा अर्चना करता है। नवमी के दिन कन्याओं को घर में भोजन कराने के बाद ही व्रत खोलता है। व्रत के पूरे नियम भी निभाता है। सुबह के वक्त पूजा किए बिना काम भी शुरू नहीं करता। कोई ग्राहक आता भी है तो भी वो पूजा के बाद ही उसका काम करता है।
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परिजनों को पसंद नहीं, लेकिन विरोध भी नहीं करते
शौकीन के अनुसार घर में पत्नी परवीन और दो बेटे हैं। बड़ा बेटा राजा कक्षा 11 में पढ़ता है जबकि छोटा बेटा सोहेल कक्षा नौ का छात्र है। शौकीन के अनुसार उसके परिजनों को ये सब ज्यादा पसंद नहीं है लेकिन वह विरोध भी नहीं करते। कन्याओं के लिए हलवा पूरी भी पत्नी ही बनाती है। शौकीन का कहना है कि भगवान तो एक है। बस धर्म के अनुसार लोगों ने नाम अलग अलग कर लिए हैं। इंसानियत से बड़ा कुछ नहीं होता। उनके गुरू माता के भक्त थे तो वो भी बन गया। गांव वाले भी शौकीन की दुर्गा भक्ति की चर्चा करते हैं।
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